धीरेन्द्र शास्त्री जी की राष्ट्रीय एकता यात्रा को रोकने के दुष्प्रयासों का दलित पिछड़ा समाज संगठन ने किया तीव्र विरोध
“संत समाज को रोकना सनातन संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला” — सुनील सिंह यादव
नई दिल्ली / भोपाल।
भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने वाली पूज्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी (बागेश्वर धाम सरकार) की राष्ट्रीय एकता और सद्भावना यात्रा को रोकने के प्रयासों का देशभर में विरोध शुरू हो गया है।
दलित पिछड़ा समाज संगठन ने इस विषय पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ निहित स्वार्थी संगठन, सनातन संस्कृति और समाज की समरसता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
संगठन का विरोध — “यह यात्रा समाज को जोड़ने का अभियान है, तोड़ने का नहीं”
दलित पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी दामोदर सिंह यादव ने स्पष्ट कहा कि कुछ संगठनों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दी गई याचिका न केवल तथ्यहीन है, बल्कि यह देश की धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) का भी उल्लंघन करती है।
उन्होंने कहा,
“पूज्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी की राष्ट्रीय एकता यात्रा भारत की आत्मा को एक सूत्र में बाँधने का कार्य कर रही है। यह यात्रा किसी समुदाय, जाति या वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, नशा मुक्ति और सेवा के संदेश को फैलाने के लिए है।”
श्री यादव ने कहा कि जो लोग इस यात्रा को रोकने की माँग कर रहे हैं, वे देश की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपरा को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव का सशक्त संदेश
दलित पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने अपने बयान में कहा —
“यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ स्वार्थी समूह सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक आत्मा पर प्रहार कर रहे हैं।
धीरेन्द्र शास्त्री जी की यात्राएँ समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं, तोड़ने का नहीं। उनका उद्देश्य समाज में एकता, भाईचारा, और नशा मुक्त जीवन का संदेश फैलाना है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रयास संविधान में प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के सीधे उल्लंघन के समान है।
“भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन इसकी आत्मा सनातन संस्कृति और सेवा भावना में निहित है। किसी भी संत या धार्मिक गुरु की शांति और सद्भावना यात्रा को रोकने का प्रयास सामाजिक विघटन को बढ़ावा देता है।”
श्री यादव ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह ऐसी विभाजनकारी मानसिकता को अस्वीकार करे और बागेश्वर धाम सरकार जी की राष्ट्रीय एकता यात्रा को बाधारहित आगे बढ़ाने का आदेश दे।
अन्य पदाधिकारियों ने भी किया विरोध — “भ्रम फैलाने की कोशिशें निंदनीय”
संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, संतोष सिंह पवार, प्रेम कुमार वैद्य, जीवन लाल जैन (चाय वाले), मनीष गुप्ता, श्रीमती अनीता दुबे, श्रीमती सौंपा चटर्जी, श्रीमती मधु शर्मा, आलोक उमरे और भावेश नाहर ने भी एक संयुक्त बयान जारी किया।
उन्होंने कहा,
“बागेश्वर धाम सरकार जी की यात्राएँ समाज के गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित हैं। इन यात्राओं के माध्यम से न केवल धार्मिक जागरण हो रहा है बल्कि समाजसेवा, शिक्षा और नशा मुक्ति जैसे अभियानों को भी बल मिल रहा है।”
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यात्रा को रोकने की माँग तथ्यहीन, उद्देश्यहीन और पूर्णतः असंवैधानिक है।
“यह न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि मानव अधिकारों का भी उल्लंघन है। किसी भी संत की सेवा-आधारित यात्रा में बाधा डालना सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक है।”
“संतों के कार्यों में बाधा मानवता के खिलाफ” — संगठन की अपील
दलित पिछड़ा समाज संगठन ने यह भी कहा कि संत समाज की भूमिका सदैव राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और मानव सेवा से जुड़ी रही है।
“संतों ने सदैव समाज को मार्गदर्शन दिया है — चाहे वह गरीबों की सेवा हो, या नशा मुक्ति और शिक्षा के लिए प्रेरणा देना। ऐसे में किसी भी संत या धार्मिक गुरु की शांतिपूर्ण यात्रा को रोकने का प्रयास भारत की संस्कृति और संविधान दोनों के साथ अन्याय है।”
संगठन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे ऐसे भ्रामक प्रचारों से दूर रहें और राष्ट्रीय एकता, धार्मिक सौहार्द और सामाजिक समरसता के प्रयासों में सहयोग करें।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का समर्थन
इस विषय पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने भी अपना समर्थन जताते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक यात्रा को रोकना मानव अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध है।
ट्रस्ट ने कहा,
“भारत की विविधता इसकी ताकत है। पूज्य धीरेन्द्र शास्त्री जी जैसे संत उस ताकत को और मजबूत कर रहे हैं। वे देश को जोड़ने, समाज को नशा मुक्त और एकजुट करने का संदेश दे रहे हैं। हम उनके मिशन का पूर्ण समर्थन करते हैं।”
सर्वोच्च न्यायालय से अपेक्षा — “सत्य और न्याय का पक्ष ले”
दलित पिछड़ा समाज संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह तथ्यों और संविधान की भावना को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर निर्णय दे।
“हम न्यायालय से निवेदन करते हैं कि वह ऐसे किसी भी अभियान या याचिका को अस्वीकार करे, जो समाज में भ्रम फैलाने या विभाजन की भावना पैदा करने का कार्य कर रही हो। सत्य, न्याय और धर्म की विजय ही भारत की असली पहचान है।”
निष्कर्ष — “भारत एकता, सद्भाव और सनातन संस्कृति का प्रतीक है”
पूज्य बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र शास्त्री जी की राष्ट्रीय एकता यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह सामाजिक पुनर्जागरण का आंदोलन है। यह यात्रा हर वर्ग, हर धर्म और हर समुदाय को जोड़ने का कार्य कर रही है।
दलित पिछड़ा समाज संगठन और भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट दोनों ने मिलकर इस यात्रा के समर्थन में स्पष्ट किया है कि —
“भारत एक धर्मनिरपेक्ष लेकिन सनातन मूल्यों वाला राष्ट्र है। यहाँ की संस्कृति सेवा, एकता और प्रेम की है। संतों के कदम जहाँ पड़ते हैं, वहाँ शांति और सद्भाव का दीप प्रज्वलित होता है।”


