—Advertisement—

धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव की पद्मपुराण आधारित रामकथा में सत्पुरुष-गुण संदेश, कोटा श्री दिगंबर जैन मंदिर में भक्ति आयोजन

Author Picture
Published On: 28 November 2025
WhatsApp Image 2025 11 28 at 6.38.25 PM

—Advertisement—

धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव ने कहा—“सत्पुरुष गुण चुनते हैं, दुर्जन दोष”

रामपुरा श्री दिगंबर जैन मंदिर में पद्मपुराण आधारित रामकथा का दिव्य आयोजन**

कोटा (राजस्थान)।
रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान परम पूज्य धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव ससंघ के सान्निध्य में चल रही पद्मपुराण आधारित रामकथा का अष्टम दिवस भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। कथा के दौरान गुरुदेव ने जीवन, धर्म, करुणा और सम्यक्त्व पर कई गहन संदेश दिए, जिन्हें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर श्रवण किया।

कार्यक्रम की जानकारी राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” ने दी। उन्होंने बताया कि कोटा में यह दिव्य रामकथा 21 नवंबर से 30 नवंबर तक प्रतिदिन संगीतपूर्ण वातावरण में आयोजित हो रही है। अनेक नगरवासी, समाजजन और धर्मानुरागी इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ ले रहे हैं।


मां जिनवाणी का भव्य अभिषेक और पालकी यात्रा

अकलंक संस्थान कोटा के अध्यक्ष पीयूष बज एवं सचिव अनिमेष जैन ने बताया कि आज मां जिनवाणी को मंदिर से पालकी में विराजमान कर गुरुदेव के करकमलों में भेंट करने का सौभाग्य श्रीमती मैना जैन, प्रतीक–विनीता, अनाया, तनीषा, वेद परिवार को प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में दिगंबर जैन समाज के गणमान्य उपस्थित रहे।

विमल गौधा नांता, विनोद टोरड़ी, जे. के. जैन, नरेश वैद, मधु शाह, आशा श्रीमाल, आशा सेठी, कविता बज, साधना मुवासा, इंदौर से किशोर कुमार, राजकुमार, चिन्मय जैन, देहरादून से पोमिल जैन सहित कई समाज श्रेष्ठी उपस्थिति रहे।

WhatsApp Image 2025 11 28 at 6.38.26 PM


गुरुदेव के प्रेरक प्रवचन—“हंस दूध ग्रहण करता है, सत्पुरुष गुण”

धर्मसभा को संबोधित करते हुए धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति गुरुदेव ने कहा—

“जिस प्रकार हंस दूध–जल में से केवल दूध ही ग्रहण करता है, उसी प्रकार सत्पुरुष भी गुणों को ही ग्रहण करते हैं।
कौआ हाथी के गंडस्थल में मोतियों को छोड़कर मांस चुनता है—जैसे दुर्जन दोष चुनते हैं।
उल्लू सूरज को भी अंधकारमय देखता है, उसी प्रकार दुर्जन संसार को दोषयुक्त पाते हैं।”

उन्होंने समझाया कि सज्जन और दुर्जन का स्वभाव जल पर जमी जाली की तरह होता है—जाली कचरा रोक लेती है, पर निर्मल जल नीचे प्रवाहित होता रहता है।


विभीषण का राज्याभिषेक और लंका से अयोध्या तक के प्रसंग

गुरुदेव ने पद्मपुराण के अनेक अद्भुत प्रसंगों का वर्णन किया—

● राम, लक्ष्मण और सीता सहित सभी विभीषण के भक्न में प्रवेश करते हैं, जहाँ पद्मरागमणि से निर्मित तेजस्वी जिनबिंब के दर्शन से पापों का नाश होता है।
● राम लंका का राज्य विभीषण को सौंप देते हैं।
● छह वर्षों तक राम लंका में निवास करते हैं।
● इसके बाद नारद माता कौशल्या की स्मृति दिलाते हुए राम को अयोध्या लौटने का संकेत देते हैं।


विभीषण द्वारा अयोध्या का अद्भुत सौंदर्य-विधान

कथा में गुरुदेव ने बताया—

● विभीषण हज़ारों विद्याधर कारीगरों द्वारा अयोध्या में नए जिनालय, भवन, उद्यान, वापिकाएँ, सरोवर बनवाते हैं।
● पूरी अयोध्या रत्नों और धन-धान्य से भर जाती है।
● यह दिव्य सौंदर्य सौ वर्षों में भी वर्णित नहीं किया जा सकता।

गुरुदेव ने कहा—

“पूर्वभव का किया हुआ पुण्य ही जीवन में कल्याणकारी अवसर उपलब्ध कराता है।
इसलिए पुण्य कर्म करते रहो, ताकि संताप का सामना न करना पड़े।”

WhatsApp Image 2025 11 28 at 6.38.26 PM 1


अयोध्या में पुत्र–माताओं का मिलन, भरत का वैराग्य

अयोध्या पहुंचने पर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का माताओं से हर्षपूर्ण मिलन होता है।

परंतु समस्त सुख-सुविधाओं में रहते हुए भी भरत वैराग्य से परिपूर्ण रहते हैं और सोचते हैं—

“यह राज्य मुझे कब मुक्त करेगा? मैं धर्म की उपासना कब करूँगा?”


त्रिलोकमंडन हाथी का चमत्कार और जिनदीक्षा

● नगर में उत्पात मचा रहा त्रिलोकमंडन हाथी भरत को देखते ही शांत हो जाता है।
● अयोध्या में केवली भगवान देशभूषण–कुंभूषण केक्ली का आगमन होता है।
● चारों भाई भगवान के दर्शन करने जाते हैं।
● भरत एक हजार राजाओं के साथ जिनदीक्षा लेते हैं।
● कैकयी और तीन सौ रानियाँ आर्यिका दीक्षा ग्रहण करती हैं।


मधु–शत्रुघ्न युद्ध और महामारी प्रसंग

गुरुदेव ने मधु–शत्रुघ्न युद्ध का वर्णन करते हुए बताया—

● मधु युद्ध में घायल होकर वैराग्य से भर उठता है और समाधिमरण कर देवता बन जाता है।
● उसके मित्र चमरेन्द्र द्वारा फैलायी महामारी सप्तऋषियों के तप से शांत होती है।
● गुरुदेव ने कहा—

“मूर्ख की सेवा संभव है, पर कृतघ्न को दूर से ही त्याग देना चाहिए।”


सीता त्याग प्रसंग ने सभागार को भावुक किया

कथा का सबसे मार्मिक प्रसंग तब आया जब गुरुदेव ने बताया—

● प्रजा द्वारा उठाए गए अपवादों के कारण राम सीता को वन में भेजने के लिए बाध्य होते हैं।
● सेनापति द्वारा वन में छोड़े जाने पर सीता संदेश भेजती हैं—

“राम! मेरे त्याग से विषाद मत करना… सम्यक्त्व को कभी मत त्यागना।
सम्यक्त्व साम्राज्य से श्रेष्ठ है, क्योंकि साम्राज्य नश्वर है पर सम्यकदर्शन शाश्वत सुख देता है।”

सीता के ये शब्द सुनकर पूरा सभागार भावुक हो उठा।


भक्ति, संगीत और अध्यात्म से परिपूर्ण रामकथा

पूरी कथा को संगीत, वाद्य ध्वनियों एवं कलापूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया।
श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर ज्ञान, भक्ति और संस्कृति का दिव्य संगम अनुभव कर रहे हैं।


प्रस्तुति:
पारस जैन “पार्श्वमणि”
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, दिगंबर जैन समाज
कोटा
9414764980

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp