अमानक सोयाबीन बीज देने का आरोप, धामनोद व्यापारी और कंपनी पर कार्रवाई की मांग
कौशिक पण्डित ,मनावर जिला धार मध्य प्रदेश
70 प्रतिशत बीज अंकुरित नहीं होने से किसानों को लाखों का नुकसान, कृषि विभाग की टीम ने खेतों में पहुंचकर बनाया पंचनामा
मनावर/धार।
Dhar जिले के धामनोद क्षेत्र में सोयाबीन बीज की गुणवत्ता को लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों ने धामनोद के एक व्यापारी और संबंधित बीज कंपनी पर अमानक एवं खराब गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि खराब बीज के कारण उनकी मेहनत, समय और आर्थिक निवेश पर संकट खड़ा हो गया है।
मामले को लेकर प्रभावित किसानों ने धामनोद थाना और धार कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यापारी और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।
महंगे दामों पर खरीदा था सोयाबीन बीज
किसानों के अनुसार, उन्होंने खरीफ सीजन के लिए धामनोद स्थित श्रीराम ट्रेडर्स से सोयाबीन बीज खरीदा था। किसानों ने बताया कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर बीज खरीदा और समय पर खेतों में बोवनी की, लेकिन अंकुरण के समय उन्हें बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा।
किसानों का आरोप है कि खरीदे गए बीज में से केवल करीब 30 प्रतिशत बीज ही अंकुरित हो पाया, जबकि लगभग 70 प्रतिशत बीज अंकुरित नहीं हुआ। इससे खेतों में फसल की स्थिति खराब हो गई और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरी उम्मीद के साथ खेती में निवेश किया था, लेकिन खराब बीज के कारण अब उन्हें दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।#DharNews

कई किसानों ने दर्ज कराई शिकायत
मामले में अहिरवास, रामाधामा और वासलीपुरा क्षेत्र के किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है। किसानों में नीलेश सिसोदिया, रणछोड़, मांगीलाल, सीताराम, प्रताप, कन्हैया, छोटू और शोभाराम सहित अन्य किसान शामिल हैं।
किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें अमानक बीज उपलब्ध कराया गया, जिसकी वजह से खेतों में अपेक्षित फसल नहीं हो सकी। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बीज की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
किसान कांग्रेस नेता कैलाश ठाकुर और नहर अध्यक्ष रामाधामा ने भी किसानों की समस्या को गंभीर बताते हुए प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।
कृषि विभाग और वैज्ञानिकों की टीम ने किया निरीक्षण
किसानों की शिकायत के बाद कृषि विभाग ने मामले की जांच शुरू की। इसके लिए कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों की टीम किसानों के खेतों तक पहुंची और फसल की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया।
जांच दल में जे.एस. चौहान, प्रेमसिंह ओहरिया, धार एवं मनावर क्षेत्र के अधिकारी तथा वैज्ञानिक दिलीप रघुवंशी, भारत भावेल और बलवंत सोलंकी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
टीम ने एक-एक खेत में जाकर सोयाबीन फसल की स्थिति देखी और मौके पर पंचनामा तैयार किया। अधिकारियों ने बीज अंकुरण, फसल की स्थिति और किसानों को हुए नुकसान से संबंधित जानकारी जुटाई।
किसानों ने मांगा मुआवजा और कार्रवाई
किसानों का कहना है कि जांच टीम द्वारा खेतों का निरीक्षण किए जाने के बाद भी अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। किसानों ने कहा कि न तो उन्हें नुकसान का मुआवजा मिला है और न ही संबंधित व्यापारी एवं बीज कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द निर्णय लिया जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि यह केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका से जुड़ा गंभीर विषय है।

बीज की गुणवत्ता जांच व्यवस्था मजबूत करने की मांग
किसानों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि किसानों को खराब या अमानक बीज मिलता है तो पूरी फसल प्रभावित हो जाती है और इसका सीधा असर किसान की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बीज विक्रेताओं और कंपनियों की नियमित जांच की जाए, ताकि भविष्य में किसानों को इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसानों का कहना है कि प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल कृषि विभाग की टीम द्वारा किए गए निरीक्षण के आधार पर जांच प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय करेगा और खराब बीज से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित कदम उठाएगा।
सोयाबीन फसल को लेकर सामने आए इस मामले ने एक बार फिर बीज की गुणवत्ता और किसानों के हितों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
