Dhar भोजशाला विवाद पर अदालत का ऐतिहासिक निर्णय
Dhar । मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद में इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि भोजशाला परिसर एक प्राचीन मंदिर है और यहां हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त है।
यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत रिपोर्ट, ऐतिहासिक साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद दिया गया है। कोर्ट के इस निर्णय के बाद पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
कोर्ट ने ASI रिपोर्ट को माना सबसे अहम आधार
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को निर्णायक साक्ष्य माना है। अदालत ने कहा कि:
- परिसर में परमार काल के मंदिर के अवशेष मिले हैं
- वर्तमान संरचना में प्राचीन मंदिर के अवशेषों का उपयोग हुआ है
- स्थल मूल रूप से एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था
ASI ने अपनी लगभग 2000 पन्नों की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया था कि भोजशाला परिसर के नीचे और भीतर मंदिर संरचना के प्रमाण मौजूद हैं।
हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार, नमाज पर रोक
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार रहेगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसर में नमाज की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट ने कहा कि यह स्थल किसी मस्जिद के रूप में प्रमाणित नहीं होता है, बल्कि यह एक प्राचीन धार्मिक संरचना है।
मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक जमीन की संभावना
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष अपनी मांग सरकार के सामने रख सकता है। सरकार इस पर विचार कर वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने पर निर्णय ले सकती है।
यह टिप्पणी फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, जिससे आगे प्रशासनिक स्तर पर नई प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
विवाद का लंबा इतिहास
भोजशाला परिसर 11वीं सदी का एक ऐतिहासिक स्थल माना जाता है। इसे लेकर वर्षों से अलग-अलग समुदायों के बीच विवाद चलता रहा है।
- हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर मानता है
- मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है
- कुछ जैन समुदाय के लोग इसे प्राचीन जैन मंदिर भी बताते हैं
इस बहुपक्षीय दावे के कारण यह मामला वर्षों से अदालत में विचाराधीन था।
ASI सर्वे कैसे बना फैसला का आधार
हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को ASI को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था। इसके बाद 22 मार्च 2024 से शुरू हुआ सर्वे करीब 98 दिनों तक चला।
इस दौरान:
- स्थल की गहन खुदाई और जांच की गई
- शिलालेख, मूर्तियां और संरचनात्मक अवशेषों का अध्ययन किया गया
- विशेषज्ञों की टीम ने वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की
ASI ने अदालत को बताया कि यहां परमार काल के मंदिर के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं और बाद की संरचना में उसी सामग्री का उपयोग हुआ है।
दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क पेश किए।
हिंदू पक्ष का दावा:
- स्थल प्राचीन सरस्वती मंदिर है
- यहां मिले शिलालेख और मूर्तियां मंदिर के प्रमाण हैं
- यह स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है
मुस्लिम पक्ष की दलील:
- ASI रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया गया
- संरचना को मस्जिद के रूप में ऐतिहासिक पहचान दी गई
- सर्वे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए
हालांकि ASI ने स्पष्ट किया कि सर्वे पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से किया गया था और इसमें विभिन्न विशेषज्ञ शामिल थे।
फैसले के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
फैसला सुनाए जाने से पहले धार शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
- करीब 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए
- संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल लगाया गया
- सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाई गई
- भड़काऊ पोस्ट पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई
विशेष रूप से शुक्रवार और नमाज के समय को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर था।
फैसले के बाद बढ़ी चर्चा
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद भोजशाला विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। विभिन्न सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को ऐतिहासिक मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे संवेदनशील मुद्दा बता रहे हैं।
निष्कर्ष
धार भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट का यह फैसला वर्षों पुराने विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। ASI रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर दिए गए इस निर्णय ने स्थल की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को लेकर नई स्थिति स्पष्ट की है।
यह फैसला आने वाले समय में प्रशासनिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर कई नई प्रक्रियाओं की दिशा तय कर सकता है।
