Dhar भोजशाला केस: आखिरी सुनवाई आज, ASI सर्वे पर मुस्लिम पक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
मध्यप्रदेश के Dhar में स्थित ऐतिहासिक Bhojshala Complex को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई आज इंदौर हाईकोर्ट में होने जा रही है, जिसे अंतिम बहस माना जा रहा है। सुनवाई से पहले ही दोनों पक्षों की ओर से तीखे तर्क और गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
यह मामला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को लेकर विवाद का केंद्र बना हुआ है। हिंदू पक्ष द्वारा इसे धार्मिक स्थल घोषित करने और नियंत्रण की मांग की गई है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसके स्वरूप और सर्वे प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाए हैं।
2022 में दायर हुई थी याचिका
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई, जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि Bhojshala Complex का धार्मिक स्वरूप निर्धारित किया जाए और इसका अधिपत्य हिंदू समाज को सौंपा जाए।
इसके बाद न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को परिसर का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक सर्वे करने के निर्देश दिए थे। समय के साथ इस मामले में अन्य पक्ष भी जुड़ते गए और विवाद और गहरा होता गया।
मुस्लिम पक्ष ने उठाए ASI सर्वे पर सवाल
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अन्य वकीलों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की प्रक्रिया और रिपोर्ट पर कई गंभीर सवाल उठाए।
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और रिपोर्ट पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सर्वे के दौरान दोनों पक्षों की समान भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही।
सर्वे की प्रक्रिया पर उठे सवाल
अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सर्वे के दौरान सभी पक्षकारों को उचित सूचना नहीं दी गई थी। उनका कहना था कि कई जगहों पर सर्वे किया गया, लेकिन उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिली, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए सूचित किया गया।
इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि सर्वे एक साथ कई स्थानों पर किया गया, जिससे दोनों पक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी। मुस्लिम पक्ष ने इसे प्रक्रिया की गंभीर त्रुटि बताया।
वीडियोग्राफी और रिपोर्ट पर आपत्ति
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि उन्हें जो वीडियोग्राफी दिखाई गई, वह स्पष्ट नहीं थी। साथ ही, सर्वे की रंगीन तस्वीरें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उदाहरण के तौर पर Ayodhya में रामलला की मूर्ति स्थापित थी, जबकि इस मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं पाई गई है। इसलिए दोनों मामलों की तुलना करना उचित नहीं होगा।
मूर्तियों और ऐतिहासिक तथ्यों पर विवाद
मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि सर्वे के दौरान गौतम बुद्ध की एक मूर्ति मिलने का दावा किया गया, लेकिन उसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया। इस पर भी उन्होंने ASI की रिपोर्ट को अधूरा और त्रुटिपूर्ण बताया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि कोई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य मिलता है, तो उसका सही तरीके से दस्तावेजीकरण होना चाहिए, जो इस मामले में नहीं किया गया।
अधिकारियों की मौजूदगी पर भी सवाल
अधिवक्ता तौसीफ वारसी ने दलील दी कि सर्वे के दौरान जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, जैसे एसपी और कलेक्टर, मौजूद थे, जबकि आदेश में उनकी उपस्थिति का उल्लेख नहीं था। उन्होंने इसे प्रक्रिया में अनियमितता बताया।
इसके अलावा यह भी कहा गया कि सर्वे में आधुनिक तकनीक का सही उपयोग नहीं किया गया और पुरानी पद्धतियों के आधार पर जांच की गई, जिससे परिणामों की विश्वसनीयता पर असर पड़ा।
आज की सुनवाई पर टिकी नजरें
आज होने वाली अंतिम सुनवाई इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर कोई बड़ा निर्णय या दिशा-निर्देश दे सकती है।
पूरा मामला धार्मिक, ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से काफी संवेदनशील बना हुआ है, और इसका प्रभाव स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
Dhar Bhojshala Complex मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ संवेदनशील विषय बन चुका है। ASI सर्वे पर उठ रहे सवाल और दोनों पक्षों की मजबूत दलीलों के चलते यह मामला और भी जटिल हो गया है।
अब सभी की निगाहें इंदौर हाईकोर्ट की आज होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस लंबे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
