—Advertisement—

Dewas ग्राम पंचायत मालसगोदा अवैध शराब बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई | आदिवासी परिवारों को मिला न्याय का भरोसा

Author Picture
Published On: 7 May 2026
WhatsApp Image 2026 05 07 at 7.20.03 PM 1

—Advertisement—

Dewas जिले की ग्राम पंचायत मालसगोदा में अवैध शराब बिक्री के विरोध में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की बड़ी पहल। पीड़ित आदिवासी परिवारों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचीं, एडिशनल एसपी सौम्या जैन ने दिए तत्काल निर्देश।

मालसगोदा में अवैध शराब बिक्री का मामला

Dewas जिले की ग्राम पंचायत मालसगोदा में अवैध शराब बिक्री के विरोध में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई। ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से चल रही अवैध शराब बिक्री से स्थानीय परिवारों, विशेष रूप से आदिवासी समाज, पर गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव पड़ रहा था। लगातार बढ़ती समस्याओं के बीच संगठन ने पीड़ित परिवारों की आवाज बनकर प्रशासन तक उनकी बात पहुंचाने का कार्य किया।

ग्रामीणों के अनुसार अवैध शराब बिक्री के कारण परिवारों में विवाद, आर्थिक परेशानियां, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे एवं सामाजिक असंतुलन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से संवाद किया और समस्याओं को गंभीरता से समझा।

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की पहल

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा देवास जिले की ग्राम पंचायत मालसगोदा में अवैध शराब बिक्री एवं उससे प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं को लेकर महत्वपूर्ण पहल की गई।

संगठन के Dewas जिला अध्यक्ष श्री सतीश जी खण्डेलवाल, देवास जिला संगठन मंत्री श्रीमती रीना जी खण्डेलवाल, देवास जिला मंत्री श्री महेन्द्र जी गुर्जर, कन्नौद नगर प्रभारी श्री शंकर जी जाट एवं देवास जिला कार्यकारिणी सदस्य श्री अशोक जी गुर्जर सहित संगठन के समस्त पदाधिकारियों ने ग्राम पंचायत मालसगोदा पहुंचकर पीड़ित आदिवासी महिला एवं परिवार की समस्याओं को गंभीरता से सुना।

ग्रामीणों ने संगठन के समक्ष अपनी परेशानियां रखते हुए बताया कि गांव में अवैध शराब बिक्री के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। महिलाओं एवं बच्चों के जीवन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। संगठन ने सभी समस्याओं को विस्तार से सुना और तत्काल प्रशासन तक मामला पहुंचाने का निर्णय लिया।

पीड़ित आदिवासी परिवारों की समस्याएं

इस पूरे मामले में पीड़ित महिला उर्मिला पति अशोक, जाति अहिरवाल, की पारिवारिक समस्याओं को विशेष रूप से प्रशासन के सामने रखा गया। संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है बल्कि यह सामाजिक न्याय और मानव अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

महिला ने अपनी समस्याओं को बताते हुए कहा कि अवैध शराब के कारण परिवारों में तनाव बढ़ रहा है और महिलाओं को मानसिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने भी इस समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

एडिशनल एसपी सौम्या जैन से मुलाकात

इस दौरान संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने कन्नौद एडिशनल एसपी श्रीमती सौम्या जैन मैडम जी से मुलाकात कर ग्रामीण क्षेत्र में हो रही अवैध शराब बिक्री, उससे प्रभावित परिवारों की स्थिति एवं सामाजिक दुष्प्रभावों से अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को बताया कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में नियमित निगरानी एवं अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी मैडम जी द्वारा तत्काल संबंधित थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया कि ग्राम में चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों को समझाइश दी जाए एवं समस्या का उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देश

एडिशनल एसपी मैडम जी ने पीड़ित महिला को आश्वस्त करते हुए कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर तुरंत 112 पर कॉल कर प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन हर संभव सहायता के लिए सदैव तत्पर रहेगा।प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने एवं महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई करेगी। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।

ग्रामीणों में बढ़ती जागरूकता

Dewas ग्राम पंचायत मालसगोदा अवैध शराब बिक्री के विरोध में उठाई गई इस पहल से ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ी है। गांव के लोगों ने संगठन एवं प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो अवैध शराब जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। महिलाओं ने विशेष रूप से इस पहल की सराहना की और कहा कि इससे उन्हें अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का साहस मिला है।

संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों के हित में निरंतर जनसेवा, सामाजिक न्याय, मानव अधिकार संरक्षण एवं जागरूकता के कार्य किए जा रहे हैं। संगठन समाज के कमजोर एवं पीड़ित वर्गों की आवाज बनकर उनके अधिकारों की रक्षा हेतु निरंतर प्रयासरत है।इस अभियान में संगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता एवं जीवनलाल जैन (चाय वाले) ने संयुक्त रूप से कहा कि भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति के साथ खड़ा है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में जनजागरूकता, महिला सुरक्षा एवं सामाजिक न्याय के लिए संगठन लगातार कार्य करता रहेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव का बयान

राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री समाज एवं परिवारों को खोखला कर रही है। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट सदैव पीड़ित एवं शोषित परिवारों के साथ खड़ा है।उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज में जागरूकता लाकर सामाजिक न्याय एवं मानव अधिकारों की रक्षा करना है। प्रशासन एवं समाज के संयुक्त प्रयासों से ही इस प्रकार की सामाजिक बुराइयों पर नियंत्रण संभव है।उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध गतिविधियां दिखाई दें तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय पर फोकस

Dewas ग्राम पंचायत मालसगोदा अवैध शराब बिक्री का यह मामला केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह महिला सुरक्षा, आदिवासी अधिकार और सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती अवैध शराब बिक्री का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद परिवारों की आय शराब में खर्च होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर प्रभावित होता है।

इसी कारण सामाजिक संगठनों एवं प्रशासन की संयुक्त पहल अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।

जनजागरूकता अभियान की जरूरत

ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब के खिलाफ केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज में जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार पंचायत स्तर पर लगातार चौपाल, महिला समूह बैठकों एवं युवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा शुरू की गई यह पहल भविष्य में अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

सोशल मीडिया और प्रशासनिक सहयोग की भूमिका

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया भी सामाजिक बदलाव का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सोशल मीडिया के जरिए प्रशासन तक पहुंचाया जा सकता है।यदि प्रशासन, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग मिलकर कार्य करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

निष्कर्ष

Dewas जिले की ग्राम पंचायत मालसगोदा में अवैध शराब बिक्री के विरोध में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा उठाया गया कदम सामाजिक न्याय और मानव अधिकार संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।संगठन के पदाधिकारियों द्वारा पीड़ित आदिवासी परिवारों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना, एडिशनल एसपी श्रीमती सौम्या जैन द्वारा तत्काल कार्रवाई के निर्देश देना एवं ग्रामीणों को जागरूक करने की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में महिला सुरक्षा, सामाजिक न्याय और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन एवं समाज के संयुक्त प्रयास भविष्य में और अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp