कांग्रेस रैली से नाराज व्यापारियों ने फिर लिखा राहुल गांधी को पत्र, कहा—‘हमसे 20 मिनट मिल लें’
दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने 20 बाजारों के प्रतिनिधियों के साथ राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांगा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर रैली से कारोबार बढ़ने की बात उन्हें समझाई गई तो वे विरोध वापस ले लेंगे; अगर उन्होंने संभावित नुकसान समझाया, तो राहुल गांधी से रैली दिवाली के बाद करने की अपील करेंगे।
दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों और राजनीतिक दल के बीच बातचीत की मांग तेज हो गई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने 28 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक खुला पत्र लिखकर 20 मिनट की मुलाकात मांगी। पत्र में कहा गया है कि रामलीला मैदान के आसपास के 20 बड़े बाजारों के प्रतिनिधि उनसे मिलना चाहते हैं।
CTI ने राहुल गांधी के सामने एक प्रस्ताव रखा है: वे व्यापारियों को समझाएं कि रैली से बाजारों में ग्राहक और कारोबार बढ़ेगा, तो व्यापारी अपना विरोध वापस लेकर आयोजन का स्वागत करेंगे। वहीं, अगर व्यापारी उन्हें समझा पाए कि रैली से कारोबार प्रभावित होगा, तो उनसे आयोजन को दिवाली के बाद तक टालने की अपील की जाएगी। CTI ने पत्र में कहा कि वह टकराव नहीं, संवाद चाहता है।
दिवाली से पहले कारोबार प्रभावित होने की आशंका
CTI की आपत्ति रैली के समय और उसके संभावित असर को लेकर है। संगठन के मुताबिक, रामलीला मैदान के एक से पांच किलोमीटर के दायरे में कई थोक और खुदरा बाजार हैं। व्यापारियों को आशंका है कि बड़ी भीड़, ट्रैफिक डायवर्जन और रास्तों पर प्रतिबंध से ग्राहकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यह समय दिल्ली के कारोबारियों के लिए त्योहारों की खरीदारी का अहम दौर है।
जिन बाजारों का नाम CTI ने लिया है, उनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, कश्मीरी गेट, करोल बाग, अजमेरी गेट और दरियागंज शामिल हैं। इसके अलावा नई सड़क, किनारी बाजार, दरीबा कलां, फतेहपुरी, नया बाजार, पहाड़गंज, गफ्फार मार्केट और जामा मस्जिद-मीना बाजार जैसे कारोबारी इलाके भी सूची में हैं। इन बाजारों में मसालों, अनाज और सूखे मेवों से लेकर कपड़े, किताबें, इलेक्ट्रॉनिक्स, आभूषण और ऑटो पार्ट्स तक का कारोबार होता है।
‘रैली से फायदा है तो समझाइए’
अपने पत्र में व्यापारियों ने राहुल गांधी से कहा कि वे 20 बाजारों के 20 प्रतिनिधियों को सिर्फ 20 मिनट का समय दें। उनका सवाल है कि अगर रैली में बड़ी संख्या में लोगों के आने से बाजारों को लाभ होने वाला है, तो यह बात व्यापारियों को समझाई जाए। CTI का कहना है कि ऐसा होने पर वे अपना विरोध वापस ले लेंगे और आयोजन का स्वागत करेंगे।
इसके उलट, अगर बातचीत में व्यापारी यह बताते हैं कि भीड़ और यातायात व्यवस्था से ग्राहकों की आवाजाही और बिक्री पर असर पड़ेगा, तो वे रैली को दिवाली के बाद करने की मांग करेंगे। पत्र में राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले नारे का उल्लेख करते हुए CTI ने कहा कि वह उनका सम्मान करता है, लेकिन त्योहारों के दौरान बाजारों का कारोबार बाधित नहीं होना चाहिए।
पहले भी रैली टालने की मांग कर चुका है CTI
यह राहुल गांधी को CTI का दूसरा पत्र बताया गया है। इससे पहले भी संगठन ने 1 नवंबर की रैली को दिवाली और भाई दूज के बाद आयोजित करने या व्यावसायिक इलाकों से दूर किसी दूसरी जगह करने की अपील की थी। उस मांग में CTI ने कहा था कि रैली के कारण दिल्ली के कई बाजारों में यातायात और कारोबार प्रभावित हो सकता है। संगठन ने संभावित नुकसान का अपना अनुमान भी साझा किया था; यह व्यापारियों की आशंका और दावा है, रैली के असर का कोई स्वतंत्र रूप से पुष्ट आंकड़ा नहीं।
रैली को लेकर राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर दिल्ली के व्यापारियों की चिंताओं का जवाब दिया था। CTI के नए पत्र में इसी संवाद को आगे बढ़ाने और आमने-सामने चर्चा करने का प्रस्ताव रखा गया है। व्यापारियों ने अपने पत्र में कहा है कि वे बैठक के जरिए रैली और बाजारों पर उसके संभावित प्रभाव के बारे में बात करना चाहते हैं।
रैली का मुद्दा और आगे की स्थिति
कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक की यह रैली 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसका संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विपक्ष के विरोध से है। दिल्ली पुलिस की ओर से रैली के लिए NOC दिए जाने की भी खबर आई है।
फिलहाल CTI ने राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांगा है और रैली को दिवाली के बाद करने की अपनी अपील दोहराई है। राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इस 20 मिनट की बैठक के प्रस्ताव पर जवाब मिलने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है। अब यह देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है या नहीं, और क्या रैली की तारीख या आयोजन व्यवस्था में कोई बदलाव किया जाता है।
