Delhi Red Fort Blast: महू से जुड़ा चौंकाने वाला कनेक्शन, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और जवाद सिद्दीकी जांच के घेरे में
दिल्ली में लाल किले (Red Fort) के पास हुए भयंकर धमाके ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जांच के ताज़ा सुराग बताते हैं कि इस आतंकी हमले का सीधा संबंध मध्यप्रदेश के महू (Mhow) से जुड़ा हुआ है। धमाके के मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी (Dr. Umar Nabi) जिस यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर था, उस Al-Falah University (अल-फलाह यूनिवर्सिटी) के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी (Javad Ahmad Siddiqui) मूल रूप से महू के रहने वाले हैं। यही नहीं, यह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने Al-Falah Charitable Trust की स्थापना की थी — जिसके अंतर्गत यूनिवर्सिटी और अस्पताल दोनों संचालित होते हैं।
जांच में उजागर हुआ मध्यप्रदेश कनेक्शन
जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि दिल्ली धमाके का ताना-बाना केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार हरियाणा, मध्यप्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ है।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि डॉ. उमर नबी, जो मुख्य आरोपी है, फरीदाबाद स्थित Al-Falah University में प्रोफेसर था। इसी यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद सिद्दीकी, महू (मध्य प्रदेश) के मूल निवासी हैं।
एजेंसियों का मानना है कि यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट की गतिविधियों के वित्तीय और मानव संसाधन (Human Resource) संबंधी पहलुओं की जांच बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यही नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों के लिए आधार बन सकता है।
Al-Falah University और ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवाल
यह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ा अस्पताल लंबे समय से Al-Falah Charitable Trust के अधीन काम कर रहे हैं। इसी ट्रस्ट के जरिए अल-फलाह अस्पताल, इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान चलाए जा रहे थे।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल शकील (Dr. Muzammil Shakeel) नामक एक अन्य व्यक्ति, जो आतंकवादी गतिविधियों में पकड़ा गया है, भी इसी यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर था। इसके अलावा, उमर मोहम्मद और शाहीन शाहिद नामक दो संदिग्ध व्यक्ति अल-फलाह अस्पताल से जुड़े पाए गए हैं।
अब जांच एजेंसियां यूनिवर्सिटी-ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, नियुक्तियों और बैंक खातों की बारीकी से जांच कर रही हैं।
जवाद सिद्दीकी का सफर: महू से दिल्ली तक
मध्यप्रदेश के महू से ताल्लुक रखने वाले जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपने करियर की शुरुआत निवेश कारोबार से की थी।
उन्होंने महू में Al-Falah Investment Company के नाम से व्यवसाय शुरू किया था, जिसमें लोगों को ऊंचे मुनाफे का वादा कर निवेश कराया गया। 2001 में वित्तीय गड़बड़ी और विवादों के बाद वे परिवार सहित दिल्ली चले गए।
वहीं से उन्होंने Al-Falah Engineering College की नींव रखी, जो आगे चलकर यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हुई।
आज वही संस्थान इस आतंकी जांच के केंद्र में है — और यही बात जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा संकेत बन गई है।
धमाके की घटना: कैसे हुआ Red Fort Blast
सोमवार शाम करीब 7 बजे दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास एक Hyundai i20 कार में विस्फोट हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और कई लोग घायल हुए।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई आकस्मिक विस्फोट नहीं, बल्कि सुनियोजित आतंकी हमला था।
सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डंप और संदिग्ध ट्रांजेक्शन ट्रेल के आधार पर जांच एजेंसियां अब इस घटना को संगठित नेटवर्क से जोड़ रही हैं।
महू लिंक क्यों है बेहद गंभीर
महू (Madhya Pradesh) का नाम इस जांच में सामने आने से मामला और जटिल हो गया है।
क्योंकि अब यह सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि तीन राज्यों — दिल्ली, हरियाणा और मध्यप्रदेश — को जोड़ने वाला मामला बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रस्ट-यूनिवर्सिटी-अस्पताल मॉडल के जरिए वित्तीय संसाधनों और मानव नेटवर्क का उपयोग आतंकी मॉड्यूल्स तक पहुंचाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यही कारण है कि जांच एजेंसियों ने इस केस को UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत दर्ज किया है और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
जांच की दिशा और आने वाली चुनौतियाँ
जांच एजेंसियों ने अब Al-Falah University, Al-Falah Hospital और Al-Falah Charitable Trust से जुड़े सभी कर्मचारियों, शिक्षकों और वित्तीय साझेदारों की प्रोफाइल खंगालनी शुरू कर दी है।
इनमें बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल डेटा, यात्रा रिकॉर्ड और ईमेल एक्सचेंज जैसी जानकारियां भी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों — विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और मध्यप्रदेश — में एक साथ तलाशी अभियान जारी है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह जांच “स्थानीय आतंकवादी हमला” नहीं बल्कि एक मल्टी-स्टेट नेटवर्क का हिस्सा मानी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस केस को “राष्ट्रीय सुरक्षा श्रेणी” में रखते हुए, NIA और दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा को संयुक्त रूप से जांच का जिम्मा सौंपा है।
इसके साथ ही देशभर में शैक्षणिक संस्थानों और ट्रस्ट-आधारित संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सख्त नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में शिक्षा और धर्म-सेवा के नाम पर काम करने वाले कुछ ट्रस्ट और एनजीओ ऐसे हैं, जिनकी गतिविधियों पर अब सख्त निगरानी जरूरी है।
निष्कर्ष: एक नेटवर्क, तीन राज्य और बड़ी चुनौती
Delhi Red Fort Blast की जांच ने यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद अब सीमित भौगोलिक दायरे में नहीं रह गया है।
मध्यप्रदेश के महू से लेकर फरीदाबाद और दिल्ली तक फैला यह नेटवर्क बताता है कि किस तरह सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं की आड़ में देशविरोधी गतिविधियाँ चल सकती हैं।
महू निवासी जवाद सिद्दीकी, उनके ट्रस्ट Al-Falah Charitable Trust, और उससे जुड़ी यूनिवर्सिटी व अस्पताल की भूमिका अब जांच के केंद्र में है।
आने वाले दिनों में यह केस भारत की सुरक्षा प्रणाली के लिए एक अहम टेस्ट साबित होगा — कि क्या हम शिक्षा, वित्त और मानव संसाधन के बीच छिपे आतंक के ताने-बाने को समय रहते पहचान पाते हैं या नहीं।

