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Delhi High Court ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 के CSAT पेपर-2 की याचिकाएं खारिज की

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Published On: 5 February 2026
Delhi High Court Rejects Petitions Challenging Civil Services Preliminary Exam 2023 CSAT Paper-2
— Delhi High Court Rejects Petitions Challenging Civil Services Preliminary Exam 2023 CSAT Paper-2

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Delhi High Court ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 की चुनौती खारिज की

Delhi High Court ने सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2023 के पेपर-2 यानी सीसैट (CSAT) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने की। असफल उम्मीदवारों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे और इस वजह से परीक्षा निष्पक्ष नहीं रही।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित होता है। अदालत केवल यह देख सकती है कि प्रक्रिया में कोई गंभीर अनियमितता या संवैधानिक उल्लंघन हुआ है या नहीं। विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित प्रश्नों की प्रकृति और स्तर पर अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील

असफल उम्मीदवारों का तर्क था कि सीसैट पेपर-2 में लगभग 11 प्रश्न कक्षा 11 और 12 की NCERT पाठ्यक्रम से लिए गए थे, जबकि परीक्षा नियमों के अनुसार पेपर का स्तर केवल कक्षा 10 तक सीमित होना चाहिए था।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की थी कि:

  1. संशोधित मेरिट सूची जारी की जाए।
  2. मुख्य परीक्षा को फिर से आयोजित किया जाए।
  3. वैकल्पिक रूप से अतिरिक्त प्रयास या आयु में छूट दी जाए।

याचिकाओं में यह भी दावा किया गया कि पेपर के इन प्रश्नों ने उम्मीदवारों के अंक और परिणाम को प्रभावित किया है।

Delhi High Court का दृष्टिकोण

खंडपीठ ने कहा कि विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नों का चयन और परीक्षा स्तर तय करना संस्थागत क्षमता का हिस्सा है। अदालत के पास प्रश्नों की समीक्षा करके निर्णय लेने की योग्यता नहीं होती।

पीठ ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि उम्मीदवार विशेषज्ञों के आकलन से असहमत हैं, यह न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुपरिसंगत या गंभीर त्रुटि पाए जाने पर ही न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना बनती है।

UPSC और स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की भूमिका

याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समिति ने जांच की और निष्कर्ष निकाला कि पेपर-2 के सभी विवादित प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम के भीतर ही थे।

याचिकाकर्ताओं के दावे कि पेपर स्तर कक्षा 10 तक सीमित होना चाहिए था, विशेषज्ञ समिति ने अस्वीकार कर दिया। आयोग के अनुसार, CSAT का उद्देश्य उम्मीदवारों की समान्य योग्यता और तर्कशक्ति को मापना है, और इसमें पाठ्यक्रम स्तर की थोड़ी विविधता प्राकृतिक है।

न्यायिक समीक्षा की सीमा

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतियोगी परीक्षा में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित होता है। केवल तभी हस्तक्षेप किया जा सकता है जब प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता, भेदभाव या पारदर्शिता का उल्लंघन हो।

खंडपीठ ने कहा कि UPSC के पास प्रश्न निर्धारित करने, स्तर तय करने और परीक्षा सामग्री तैयार करने का अनुभव और विशेषज्ञता है। इसलिए अदालत को इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

पिछले फैसले और CAT का दृष्टिकोण

इससे पहले, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने भी अभ्यर्थियों की दलीलों को खारिज कर दिया था। CAT ने यह स्पष्ट किया था कि केवल कुछ प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर लगने की धारणा पर्याप्त नहीं है।

CAT और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने यह माना कि UPSC ने अपनी प्रक्रिया में सभी जरूरी सावधानियां बरती थीं। उम्मीदवारों की आपत्तियों पर स्वतंत्र समिति ने भी जांच कर पुष्टि की कि पेपर नियमों के भीतर ही था।

विशेषज्ञ समिति की जांच

विशेषज्ञ समिति ने पेपर-2 के सभी सवालों की विस्तृत समीक्षा की। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि:

  • सभी सवाल निर्धारित पाठ्यक्रम के भीतर थे।
  • पेपर का स्तर उम्मीदवारों की योग्यता और परीक्षा के उद्देश्य के अनुरूप था।
  • कोई भी प्रश्न ऐसी प्रकृति का नहीं था जो असमान्य रूप से उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाता।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर UPSC ने कोर्ट को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे मान्यता दी और याचिकाओं को खारिज कर दिया।

उम्मीदवारों के लिए संदेश

इस फैसले के बाद उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट संदेश है कि:

  • UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्नों का स्तर और प्रकृति विशेषज्ञों के निर्णय पर निर्भर होती है।
  • अदालत केवल तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हो।
  • सामान्य असहमति या व्यक्तिगत अनुभव न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बन सकता।

यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि UPSC की पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता अदालत द्वारा मान्य है।

निष्कर्ष

Delhi High Court ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023, विशेष रूप से सीसैट पेपर-2 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा में प्रश्नों का चयन और स्तर तय करना विशेषज्ञों का काम है। केवल असहमति को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप संभव नहीं है। UPSC ने विवादित प्रश्नों की स्वतंत्र जांच करवा ली और उन्हें पाठ्यक्रम के भीतर पाया गया।

इस प्रकार, उम्मीदवारों को अब आगामी मुख्य परीक्षा और चयन प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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