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दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दो हफ्ते में कार्रवाई का कड़ा निर्देश

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Published On: 22 April 2026
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दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते का समय दिया, जैन समाज ने प्रतिनिधित्व की मांग उठाई।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद: हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दो हफ्ते में कार्रवाई का निर्देश

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस विषय पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दो सप्ताह के भीतर आयोग के रिक्त पदों को भरने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद पर कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली में दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी।

याचिका का पूरा विवरण

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू (इंदौर) ने जानकारी देते हुए बताया कि यह याचिका जैन समाज के हित में वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन द्वारा दायर की गई है।

  • याचिका संख्या: WPC 5418/2026
  • केस: सलेक चंद जैन बनाम जीएनसीटीडी

याचिका में मुख्य मांग यह रखी गई है कि:

  • आयोग में चेयरमैन और सदस्यों के पद शीघ्र भरे जाएं
  • जैन समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए

जैन समाज की प्रमुख मांग

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद को लेकर जैन समाज ने निम्नलिखित मांगें रखीं:

प्रतिनिधित्व की मांग

जैन समाज के व्यक्ति को आयोग में सदस्य और चेयरमैन पद पर शामिल किया जाए।

रोटेशन प्रणाली

चेयरमैन का पद अलग-अलग अल्पसंख्यक समुदायों के बीच रोटेशन के आधार पर भरा जाए।

कोर्ट की सख्त चेतावनी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया और कहा:

  • यदि दो हफ्तों में कोई कार्रवाई नहीं हुई
    तो दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को कोर्ट में तलब किया जाएगा
  • कोर्ट ने यह भी कहा:
    “यदि पद भरने ही नहीं हैं, तो आयोग बनाने की जरूरत क्या थी?”

इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।

समाज के प्रमुख लोगों की प्रतिक्रिया

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद पर कोर्ट की कार्रवाई को समाज के कई वरिष्ठ लोगों ने सराहा और इसे समाज हित में बताया।प्रमुख नाम:

  • संजय जैन – विश्व जैन संगठन अध्यक्ष
  • डॉ. जैनेन्द्र जैन – महावीर ट्रस्ट अध्यक्ष
  • अमित कासलीवाल
  • मंयक जैन – राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ
  • सुभाष काला – जैन राजनीतिक चेतना मंच
  • हंसमुख गांधी
  • टीके वेद
  • श्रीमती पुष्पा कासलीवाल – राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका
  • श्रीमती मुक्ता जैन – महिला परिषद
  • रेखा जैन

इन सभी ने कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता जताई और इसे समाज के लिए सकारात्मक कदम बताया।

प्रतिनिधित्व का महत्व

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद का मुद्दा सिर्फ पद भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समान प्रतिनिधित्व और न्याय की भावना से जुड़ा है।

क्यों जरूरी है प्रतिनिधित्व?

  • सभी समुदायों की आवाज सुनी जाए
  • नीतियों में संतुलन बना रहे
  • सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिले

निष्कर्ष

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग रिक्त पद का मामला अब निर्णायक स्थिति में है। हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली सरकार तय समय सीमा के भीतर क्या कदम उठाती है।जैन समाज की मांग न केवल प्रतिनिधित्व की है, बल्कि यह समान अधिकार और भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है।

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