श्री टीकमचंद जैन सर्राफ का देवलोक गमन: जैन समाज में शोक की लहर
मड़ावरा (उ.प्र.)—समाज के प्रखर धर्मानुरागी, भद्रपरिणामी एवं सात्त्विक जीवन के धनी श्री टीकमचंद जी जैन सर्राफ का 27 नवम्बर 2025, गुरुवार सायंकाल 89 वर्ष की आयु में शांत-परिणामों के साथ देवलोकगमन हो गया। उनके देह-परिवर्तन की खबर मिलते ही भारतवर्षीय जैन समाज में गहरा शोक व्याप्त हो गया। समाज में उन्हें एक धर्मनिष्ठ, सेवाभावी और तीर्थ-विकास के अग्रदूत के रूप में सदैव स्मरण किया जाएगा।
मदनपुर अतिशय क्षेत्र के विकास में रहा महत्वपूर्ण योगदान
समाजसेवी राजेश जैन दद्दू ने भावपूर्ण स्मरण करते हुए बताया कि श्री टीकमचंद जी जैन सर्राफ ने अतिशय क्षेत्र मदनपुर के मंत्री पद पर रहते हुए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों का नेतृत्व किया। उनके ही करकमलों से मदनपुर जी के जीर्णोद्धार और तीर्थ-विस्तार की आधारशिला पड़ी। समाज आज भी उनकी दूरदृष्टि और विनम्र नेतृत्व को कृतज्ञतापूर्वक याद करता है।
धर्मसाधना और गुरु-भक्ति के थे प्रतीक
दिवंगत श्री टीकमचंद जी का सम्पूर्ण जीवन धर्म, साधना और संयम को समर्पित रहा। वे प्रतिदिन प्रक्षाल-पूजन, स्वाध्याय और जैनाचार्यों की गुरुभक्ति में रत रहते थे। सादगी, सौम्यता और सात्त्विकता उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज सेवा, तीर्थ विकास, धर्मप्रचार और सामाजिक upliftment में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए।
जैन समाज के वरिष्ठजनों ने व्यक्त किया शोक
उनके देवलोकगमन पर जैन समाज के अनेक वरिष्ठजनों ने गहरी संवेदना व्यक्त की।
डॉ. जैनेन्द्र जैन (इंदौर), डॉ. सुदीप जैन (दिल्ली), महेंद्र जैन (रसिया), मनोज जैन, राजेश जैन दद्दू और नवनीत जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि श्री टीकमचंद जैन सर्राफ का वियोग सकल जैन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जाना एक ऐसे युग का अंत है जिसमें धर्म, सेवा और संस्कारों की गहरी जड़ें थीं।
समाज के लिए हमेशा रहेंगे प्रेरणास्रोत
समाजजन का कहना है कि उनकी सात्त्विक जीवनशैली, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्र व्यवहार आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शन देगा। श्री टीकमचंद जी ने जीवन भर अहिंसा, सत्य, करुणा और जैन सिद्धांतों का पालन करते हुए समाज में उच्च आदर्श स्थापित किए।
श्रद्धांजलि एवं मंगलभावना
पूरे जैन समाज की ओर से दिवंगत भव्यात्मा को
सुगतिगमन, बोधिलाभ तथा शीघ्र निर्वाणप्राप्ति की मंगलकामनाओं सहित विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
ओम् शान्ति शान्ति शान्ति।
