Indore में साइबर ठगी का बढ़ता जाल: बैंक खाते से 65 हजार की ऑनलाइन चोरी, जॉब फ्रॉड का भी खुलासा
Indore (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश में एक तरफ जहां सरकार द्वारा साइबर सुरक्षा और जागरूकता को लेकर व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला आर्थिक नगरी इंदौर से सामने आया है, जहां ऑनलाइन फ्रॉड के दो अलग-अलग मामलों ने साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांधी नगर क्षेत्र में बैंक खाते से 65 हजार की ठगी
इंदौर के गांधी नगर थाना क्षेत्र में एक 45 वर्षीय व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो गया। पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब उसने अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट निकलवाया।
जानकारी के अनुसार, खाते की जांच करने पर पता चला कि लगभग 15 दिन पहले ही उसके बैंक खाते से दो अलग-अलग अज्ञात खातों में 65,504 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए थे। यह लेन-देन कथित रूप से UPI के माध्यम से किया गया था।
पीड़ित ने मामले की जानकारी मिलते ही थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में जुटी, आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद पूरे मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है। बैंक खातों और ट्रांजेक्शन डिटेल्स की मदद से आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की जांच की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत साइबर जागरूकता अभियान
इसी बीच, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों से बचाव के लिए ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत इंदौर में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में और डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी की निगरानी में रविवार सुबह नेहरू स्टेडियम से साइबर जागरूकता मैराथन का आयोजन किया गया।
यह मैराथन नेहरू स्टेडियम से शुरू होकर जीपीओ, नवलखा चौराहा और भंवरकुआं होते हुए पुनः नेहरू स्टेडियम पर समाप्त हुई। इस दौरान प्रतिभागियों को ऑनलाइन ठगी, साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
जॉब दिलाने के नाम पर दूसरी बड़ी ठगी
इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला एमआईजी थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक युवक को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगों ने अपने जाल में फंसा लिया।
पीड़ित को एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें एक युवती ने खुद को जॉब प्लेसमेंट एजेंसी से जुड़ा बताया। कॉल के दौरान उसे बताया गया कि उसका चयन डेटा एंट्री जॉब के लिए हो गया है और जल्द ही इंटरव्यू लिया जाएगा।
इसके बाद पीड़ित से रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 1800 रुपये ऑनलाइन जमा करने को कहा गया। साथ ही यह आश्वासन दिया गया कि यह राशि बाद में वापस कर दी जाएगी।
इसके बाद अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल करके पीड़ित से विभिन्न प्रकार के शुल्क वसूले गए। ठगों ने प्रक्रिया के नाम पर कई बार पैसे ऐंठकर पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
इस मामले में भी पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
साइबर अपराधों पर बढ़ती चुनौती
इंदौर में सामने आए ये दोनों मामले यह दर्शाते हैं कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक तरफ जहां UPI और डिजिटल भुगतान के जरिए ठगी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ नौकरी और रोजगार के नाम पर भी लोगों को फंसाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ-साथ साइबर सतर्कता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। बिना जांचे-परखे किसी भी लिंक, कॉल या ऑफर पर भरोसा करना भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर में सामने आए ये साइबर फ्रॉड के मामले एक बार फिर यह चेतावनी देते हैं कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। पुलिस भले ही लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियान चला रही हो, लेकिन आम नागरिकों को भी सतर्क रहकर ही साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।
