पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, लेकिन महंगाई का खतरा बरकरार: CRISIL रिपोर्ट ने जताई चिंता
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 मई को हुई बढ़ोतरी के बाद 3 जून को पूरे देश में ईंधन दरें स्थिर बनी रहीं। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ती कीमतों और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता के कारण आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है और आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर अनिश्चितता ने कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इसी कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बनी हुई है।
वहीं मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। कोलकाता में पेट्रोल ₹113.47 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जो देश के बड़े महानगरों में सबसे अधिक कीमतों में से एक है।
दक्षिण भारत के चेन्नई शहर में पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर पर स्थिर है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹110.93 और डीजल ₹98.80 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
हैदराबाद में पेट्रोल ₹115.69 प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो देश में सबसे अधिक दरों में शामिल है, जबकि डीजल ₹103.82 प्रति लीटर है।
अहमदाबाद में पेट्रोल ₹101.70 और डीजल ₹97.84 प्रति लीटर, लखनऊ में पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर तथा पटना में पेट्रोल ₹113.35 और डीजल ₹99.36 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स संरचना और परिवहन लागत के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।
पिछले कुछ हफ्तों में लगातार बढ़ोतरी
तेल कंपनियों और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 15 मई के बाद से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹7.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह बढ़ोतरी पिछले कुछ महीनों में चार चरणों में हुई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार को लगातार प्रभावित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल बढ़ोतरी ₹10 प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।
CRISIL रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
रेटिंग एजेंसी CRISIL की ताजा रिपोर्ट ने ईंधन की कीमतों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹7.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होती है तो इससे खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में लगभग 0.36 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
वहीं यदि यह बढ़ोतरी ₹10 प्रति लीटर तक पहुंचती है, तो महंगाई दर में 0.48 प्रतिशत तक का उछाल देखा जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईंधन की कीमतों का प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे अर्थव्यवस्था में फैल जाता है।
क्यों बढ़ती है महंगाई?
भारत की अर्थव्यवस्था में माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन का बहुत बड़ा योगदान है। देश में कुल माल ढुलाई का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा सड़क परिवहन के माध्यम से होता है।
सड़क परिवहन की कुल लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 42 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि जैसे ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, ट्रांसपोर्टेशन की लागत सीधे बढ़ जाती है।
इसके बाद इसका असर पूरे सप्लाई चेन पर पड़ता है—
- ट्रक किराया बढ़ता है
- लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ता है
- फैक्ट्रियों की लागत बढ़ती है
- और अंत में उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो जाती हैं
किन चीजों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है।
खाद्य पदार्थ:
दूध, फल, सब्जियां, दालें, मसाले, चाय-कॉफी, मांस और मछली जैसी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं क्योंकि ये पूरी तरह सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर:
रेडीमेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, लकड़ी, रसायन और धातु उद्योगों में उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
अन्य सेवाएं:
ऑनलाइन डिलीवरी, ई-कॉमर्स, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है।
तेल कंपनियों की रणनीति
तेल विपणन कंपनियां (OMCs) धीरे-धीरे अपने नुकसान (under-recoveries) को कम करने की कोशिश कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है।
ऐसे में आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।
कच्चे तेल की स्थिति
क्रूड ऑयल की कीमतें वर्तमान में सरकार और रिजर्व बैंक के अनुमान से ऊपर चल रही हैं। अनुमानित स्तर लगभग $95 प्रति बैरल था, जबकि बाजार में यह औसतन $110 से $112 प्रति बैरल तक बना हुआ है।
यह अंतर भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
RBI के लिए चुनौती
महंगाई में संभावित बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि वर्तमान में खुदरा महंगाई 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, लेकिन ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से यह फिर से ऊपर जा सकती है।
RBI का लक्ष्य 2% से 6% के दायरे में महंगाई को बनाए रखना है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां इस लक्ष्य को प्रभावित कर सकती हैं।
सरकार और बाजार की नजर
सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता है, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
इसके साथ ही मानसून की स्थिति, कृषि उत्पादन और घरेलू मांग भी महंगाई की दिशा तय करेंगे।
निष्कर्ष
3 जून को पेट्रोल और डीजल की कीमतें भले ही स्थिर रहीं, लेकिन वैश्विक अस्थिरता और CRISIL की चेतावनी से यह स्पष्ट है कि आने वाला समय महंगाई के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी पूरे अर्थव्यवस्था में बड़ा असर डाल सकती है। ट्रांसपोर्ट से लेकर खाद्य वस्तुओं तक हर क्षेत्र इससे प्रभावित होता है।
सरकार, तेल कंपनियां और RBI सभी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कैसे ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखते हुए आर्थिक संतुलन बनाए रखा जाए।
