मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के 8 ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति की छापेमारी
मध्य प्रदेश, 15 अक्टूबर 2025 — दिवाली से पहले लोकायुक्त विभाग ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के तहत रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के कुल आठ ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के संदेह में simultaneous छापेमारी की गई। इंदौर, ग्वालियर समेत अन्य जिलों में दस्तावेजों, नकदी, विदेश मुद्रा, आभूषण और लाइसेंसी हथियार बरामद होने की खबर है।
कार्रवाई की पृष्ठभूमि
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धर्मेंद्र सिंह भदौरिया इस समय रिटायर्ड हैं और जुलाई- अगस्त 2025 में उन्होंने सेवा निवृत्ति ली थी।
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बताया जा रहा है कि उनके पास ऐसी संपत्तियाँ पायी गयी हैं जिनका मूल्य उनकी नौकरी के दौरान अर्जित आमदनी से बहुत अधिक है।
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इस छापेमारी की शुरुआत लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर स्थित पलासिया स्थित फ्लैट से की, जहां टीम ने दस्तावेजों की तहकीकात और संपत्तियों की बरामदगी शुरू की।

छापेमारी की मुख्य बातें
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ठिकानों की संख्या व लोकेशन
कुल मिलाकर 8 ठिकानों पर छापेमारी हो रही है। इनमें इंदौर, ग्वालियर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इंदौर में पलासिया का फ्लैट, बिजनेस पार्क और एरोड्रम रोड स्थित कार्यालय भी शामिल हैं। -
इंदौर फ्लैट की स्थिति
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पलासिया के कैलाश कुंज अपार्टमेंट में स्थित फ्लैट नंबर 201 में लोकायुक्त टीम पहुँची।
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वहाँ दस्तावेज़, अलमारियाँ, बक्से आदि खुलवाए गए।
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संपत्ति में नकदी, सोने व चाँदी के आभूषण, लाइसेंसी हथियार आदि बरामद हुए।
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ग्वालियर व अन्य स्थानों पर जांच
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ग्वालियर के इंद्रमणि नगर में उनका पैतृक निवास है, जहाँ उनकी ही नहीं बल्कि अन्य परिजनों के नाम की संपत्ति की भी जांच हो रही है।
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कार्यालयों, फार्महाउस, कृषि भूमि आदि की स्थितियों की छानबीन की जा रही है।
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आय और संपत्ति का अंतर
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प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, भदौरिया की नौकरी के दौरान कुल आय लगभग 2 करोड़ रुपए थी।
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लेकिन सिर्फ एक फ्लैट की संपत्ति का अनुमान 7–8 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।
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कानूनी पहलू और लोकायुक्त की भूमिका
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यह मामले “आय से अधिक संपत्ति” की श्रेणी में आते हैं, जो कि लोकायुक्त कानून के अंतर्गत एक गंभीर आरोप है।
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लोकायुक्त विभाग इस तरह के मामलों की जांच करता है, जहां किसी सरकारी अधिकारी ने ज्ञात आय स्रोतों से बहुत अधिक संपत्ति अर्जित की हो।
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इस तरह की कार्रवाई से अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी संदेश जाता है कि लोकायुक्त सतर्क है और पारदर्शिता की मांग है।

संभावित प्रभाव और आगे क्या हो सकता है
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यदि जांच में यह साबित होता है कि सम्पत्ति अवैध स्रोतों से अर्जित की गई है, तो ज़रूरी कार्रवाई और वे सज़ा भी हो सकती है—जैसे कि प्रॉपर्टी जब्ती, जुर्माना, या अन्य कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
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इस मामले से राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक व नियमित कर्मचारियों में भय एवं सतर्कता बढ़ने की संभावना है।
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मीडिया और जनता में चर्चा बढ़ने की संभावना है, क्योंकि यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की मुहिम की एक बड़ी मिसाल हो सकता है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की यह बड़ी कार्रवाई यह दिखाती है कि राज्य सरकार और लोकायुक्त विभाग भ्रष्टाचार एवं आय से अधिक संपत्ति के मामलों को गंभीरता से ले रहे हैं। रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ पद पर रहते ही आमदनी से अधिक संपत्ति होना सुरक्षा कवच नहीं है। आगे की जांच के परिणामों से यह पता चलेगा कि कितनी संपत्ति वैध थीं और किन हिस्सों में भ्रष्टाचार या कानूनन उल्लंघन हुआ है।
