Ujjain : महाकाल की नगरी से तय होगा दुनिया का समय साइंस सेंटर’ बनेगा भविष्य की प्रयोगशाला
Ujjain । मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में विज्ञान और आध्यात्म का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। बसंत विहार में बनने वाला 15 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत वाला उज्जैन साइंस सेंटर न केवल विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक आधुनिक प्रयोगशाला साबित होगा, बल्कि यह उज्जैन की ऐतिहासिक समय गणना परंपरा को भी आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को इसका लोकार्पण करेंगे।
इतिहास गवाह है कि Ujjain का पंचांग सदियों से ग्रहों की चाल और समय का सटीक अनुमान बताता रहा है। महाकाल की नगरी को ‘काल का स्वामी’ माना जाता है और इसी गौरवशाली विरासत को अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम से पेश किया जाएगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास शेन्डे का कहना है कि उज्जैन साइंस सेंटर उसी आध्यात्मिक सत्य को वैज्ञानिक प्रमाणों के रूप में प्रस्तुत करेगा, जिससे यह सेंटर केवल एक सरकारी इमारत नहीं बल्कि दुनिया को समय की गणना का आधुनिक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
साइंस सेंटर की खासियत
Ujjain साइंस सेंटर में अत्याधुनिक गैलरी और आउटडोर साइंस पार्क होंगे। यहाँ विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि प्रयोगों और कार्यशालाओं के माध्यम से वास्तविक विज्ञान का अनुभव मिलेगा। सेंटर में सैटेलाइट निर्माण, रिमोट कंट्रोल प्लेन, और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। यह खासतौर पर मालवा क्षेत्र के युवाओं को इसरो और नासा जैसी वैश्विक संस्थाओं के प्रोजेक्ट्स से जोड़ने का प्रयास है।
साइंस सेंटर केवल छात्रों और वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं रहेगा। आम जनता के लिए भी इसमें स्पेस और ब्रह्मोस मिसाइल मॉडल, अंतरिक्ष अभियानों की प्रदर्शनी और आधुनिक विज्ञान के अनुभव प्रदर्शित किए जाएंगे। यह न सिर्फ तकनीकी ज्ञान बढ़ाएगा, बल्कि भारत की बढ़ती हुई स्पेस इकॉनमी को भी उजागर करेगा।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’
साइंस सेंटर के उद्घाटन समारोह के साथ ही तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ की शुरुआत भी होगी। इसमें इसरो, डीआरडीओ और नीति आयोग सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक एस्ट्रोफिजिक्स के बीच सेतु बनाने का काम करेगा।
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य उज्जैन के डोंगला गांव को ‘ग्लोबल मेरिडियन’ के रूप में स्थापित करना है। डोंगला गांव कर्क रेखा पर स्थित है, जो इसे खगोलीय गणना के लिए दुनिया का सबसे सटीक बिंदु बनाता है। इस परियोजना के माध्यम से सरकार का संकल्प है कि उज्जैन को समय गणना का वैश्विक केंद्र बनाया जाए और ग्रीनविच के बजाय भारत के शून्य देशांतर से दुनिया का समय निर्धारित किया जा सके।
डोंगला: विज्ञान और समय का केंद्र
डोंगला गांव केवल एक जियोग्राफिकल स्थान नहीं है। यहाँ से गुजरती कर्क रेखा और ऐतिहासिक पंचांग व्यवस्था इसे खगोलशास्त्र में महत्वपूर्ण बनाती है। उज्जैन साइंस सेंटर और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि भारत फिर से समय और खगोल विज्ञान में विश्व गुरु की भूमिका निभा सकता है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए शिक्षा
साइंस सेंटर में आयोजित कार्यशालाओं और प्रदर्शनी से विद्यार्थियों और युवाओं को व्यावहारिक विज्ञान का अनुभव मिलेगा। उपग्रह निर्माण, रोबोटिक्स और स्पेस तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स उन्हें इसरो और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सपनों से जोड़ेंगे। यह सिर्फ एक शैक्षिक केंद्र नहीं बल्कि उज्जैन को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन सिर्फ आध्यात्मिक नगरी नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और विज्ञान का केंद्र भी बन सकता है। उज्जैन साइंस सेंटर इस दृष्टि का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भाग लेने का अवसर देगा।
निष्कर्ष
Ujjain साइंस सेंटर केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक विरासत और भविष्य की प्रौद्योगिकी का संगम है। डोंगला गांव से निकलने वाली कर्क रेखा और महाकाल की नगरी की ऐतिहासिक समय गणना को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर उज्जैन अब वैश्विक स्तर पर ‘समय केंद्र’ के रूप में उभरने जा रहा है। यह सेंटर युवाओं के लिए शिक्षा और प्रौद्योगिकी का पटल तैयार करेगा और भारत को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेगा।
3 अप्रैल से शुरू होने वाले इस आयोजन से Ujjain का नाम न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समय और खगोल विज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित होगा। यह केवल उद्घाटन नहीं बल्कि उज्जैन के वैज्ञानिक और खगोलीय गौरव की पुनर्स्थापना है।
