गीता जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा उपहार: इंदौर को मिला अत्याधुनिक “नया गीता भवन”, प्रदेश के हर नगर में बनेंगे गीता भवन
मुख्यमंत्री बोले— “गीता का हर अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य भावना से परिपूर्ण; संघर्ष में गीता देती है आत्मबल”
इंदौर, 1 दिसंबर 2025।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश को एक ऐतिहासिक सौगात मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त “नये गीता भवन” का लोकार्पण कर इसे प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में समर्पित किया। यह राज्य शासन द्वारा विकसित ऐसा पहला गीता भवन है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि
“प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर नये गीता भवन बनाए जाएंगे।”
गीता भवन: विरासत संरक्षण और आधुनिकता का संगम
नई परियोजना के अंतर्गत स्मार्ट सिटी इंदौर द्वारा गोपाल मंदिर परिसर को आधुनिक स्वरूप देते हुए इसे गीता भवन के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ सांस्कृतिक आयोजनों, प्रवचनों, शिक्षा, आध्यात्मिक अध्ययन और सांस्कृतिक शोध के लिए अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा—
“मालवा की गौरवशाली विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश मध्यप्रदेश की दिशा तय करते हैं। गीता संघर्ष में आत्मबल, उलझन में सारथी और अंधकार में मार्गदर्शक बनती है।”
कार्यक्रम में मौजूद रहे ये प्रमुख जनप्रतिनिधि
लोकार्पण कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री गोलू शुक्ला, श्री सुमित मिश्रा, श्री श्रवण सिंह चावड़ा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष श्री सावन सोनकर, श्री गौरव रणदिवे, पार्षद सुश्री रूपाली पेंढारकर, श्रीमती कंचन गिदवानी, श्रीमती सुनीता हडिया, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री दिलीप कुमार यादव, भारत न्यास के सचिव श्री श्रीराम तिवारी, स्मार्ट सिटी सीईओ श्री अर्थ जैन, क्षेत्रीय पार्षद व अन्य जनप्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य संबोधन के प्रमुख बिंदु
1. गीता—ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और कर्तव्य का मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री ने कहा,
“गीता का प्रत्येक अध्याय जीवन को दिशा देता है। इसमें ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग और कर्म मार्ग—तीनों से मोक्ष का मार्ग दिखता है। गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का विज्ञान है।”
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने विराट स्वरूप के माध्यम से मानव को भय से मुक्त होकर कर्तव्य पालन की प्रेरणा दी।
2. मालवा—कृष्ण लीला और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र
मुख्यमंत्री ने मालवा की ऐतिहासिक आध्यात्मिक पहचान को रेखांकित करते हुए कहा—
-
उज्जैन में ही भगवान कृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की
-
अहिल्या बाई होलकर ने भारतभर के मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया
-
मालवा संस्कृति सदैव धर्म, ज्ञान और साहस का प्रतीक रही है

3. प्रतियोगिता विजेताओं को ई-रिक्शा, ई-बाइक, लैपटॉप सहित पुरस्कार
गीता जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा भी की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजेताओं को नगद राशि के साथ ई-रिक्शा, ई-बाइक, लैपटॉप, प्रमाण-पत्र आदि प्रदान किए जा रहे हैं।
4. सांस्कृतिक पुस्तकों का विमोचन और सम्मान राशि की घोषणा
मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया—
-
श्रीकृष्ण चरित मानस (लेखक: श्री रामेश्वर लखनलाल पाटीदार)
-
अमृतस्य अवंतिका (लेखक: श्री राघवदास पंडितदास)
मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण चरित मानस के लेखक को 5 लाख रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की।
5. कृष्ण लीला पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति
लोकार्पण के पश्चात मुख्यमंत्री ने श्री संजीव मालवीय द्वारा निर्देशित कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य-नाटिका का अवलोकन किया।
महापौर का वक्तव्य: “धर्म और मम:—कर्तव्य पालन ही जीवन का सार”
महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा—
“गीता के 16वें अध्याय के प्रारंभ में ‘धर्म’ और अंत में ‘मम:’ शब्द है, जिसका अर्थ है कि यदि हम अपने धर्म व कर्तव्य का पालन करें, तो अधिकार स्वतः सुरक्षित हो जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में नयी सांस्कृतिक धारा का उदय हुआ है।
गोपाल मंदिर में मुख्यमंत्री का पूजन-अर्चन
कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने गोपाल मंदिर में पूजा कर प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
उन्होंने मंदिर में बने आधुनिक प्रदर्शनी कक्ष एवं लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया।
नया गीता भवन: अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित
गोपाल मंदिर परिसर में विकसित नए गीता भवन में आध्यात्मिक अध्ययन, शोध, सांस्कृतिक आयोजन और आधुनिक शिक्षा के लिए विविध सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
1. विशाल 550-सीटर अत्याधुनिक सभागृह
गीता भवन में आकर्षक एवं नवीन तकनीक आधारित 550 सीटों वाला सभागृह बनाया गया है, जिसमें—
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
- व्याख्यान
- गीता प्रवचन
- सेमिनार
- आध्यात्मिक कार्यशालाएँ
आयोजित की जा सकेंगी।
2. आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी और रीडिंग हॉल
लाइब्रेरी की प्रमुख विशेषताएँ—
50-सीटर शांत एवं सकारात्मक रीडिंग हॉल
आध्यात्मिक, योग, ध्यान, दर्शन, संस्कृति व माइंडफुलनेस से संबंधित 1200 से अधिक पुस्तकों का संग्रह
ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑनलाइन कोर्स के लिए डिजिटल आर्काइव
प्राकृतिक रंगों, इनडोर प्लांट्स और सौम्य लाइटिंग से युक्त ध्यान-उन्मुख इंटीरियर
लाइब्रेरी को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि साधक, विद्यार्थी और शोधकर्ता एकाग्रता के साथ अध्ययन कर सकें।
3. प्रदर्शनी कक्ष— विरासत और कला का केंद्र
पुनर्विकसित मंदिर परिसर में बने प्रदर्शनी कक्ष—
- धार्मिक विरासत
- कला एवं संस्कृति
- ऐतिहासिक महत्व
को जनता के सामने सुलभ रूप में प्रस्तुत करेंगे।
इससे यह स्थल केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि समावेशी सांस्कृतिक केंद्र बन गया है।
निष्कर्ष: मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक नवजागरण की दिशा में बड़ा कदम
गीता जयंती के अवसर पर लोकार्पित यह नया गीता भवन मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक नवजागरण, विरासत संरक्षण और आध्यात्मिक शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा से स्पष्ट है कि आने वाले समय में प्रदेश के हर नगर में आधुनिक गीता भवन—
- अध्यात्म
- भारतीय संस्कृति
- युवा प्रेरणा
- ज्ञान एवं शिक्षा
का केंद्र बनेंगे।
गीता का संदेश—
कर्तव्य, साहस, भक्ति, ज्ञान और जीवन मार्गदर्शन
आज मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक विकास का आधार बन रहा है।





