गोपालक सम्मेलन में सीएम मोहन यादव बोले—मध्यप्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में कहा कि मध्यप्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत हो रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उन्होंने दूध उत्पादन बढ़ाने, दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार करने और डेयरी व्यवस्था मजबूत बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने में पशुपालन और दूध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन से जुड़े कार्य किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने गोपालन, दूध उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का उल्लेख किया। उनके अनुसार, किसानों के हित में विभिन्न विभागों को जोड़कर काम किया जा रहा है।
डॉ. यादव ने स्वयं किसान परिवार से होने का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पशुपालकों की परेशानियों को समझते हैं। उन्होंने सहकारी व्यवस्था के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ पहुंचाने पर जोर दिया।
गांवों में नई दुग्ध समितियां बनाने की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां नहीं हैं, वहां नई समितियां बनाई जाएंगी। उन्होंने प्रदेश के दुग्ध संघों की कार्यप्रणाली, पारदर्शी नीतियों और दूध के संग्रहण से लेकर विपणन तक की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही।
सम्मेलन से संबंधित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 1,926 नई दुग्ध समितियां गठित की गई हैं और 801 निष्क्रिय समितियों को दोबारा सक्रिय किया गया है। इसके बाद राज्य में कुल 7,171 समितियां क्रियाशील बताई गई हैं। समितियों के विस्तार को पशुपालकों को संगठित बाजार से जोड़ने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
दूध संग्रहण बढ़ाने की तैयारी
प्रदेश में सहकारी व्यवस्था के माध्यम से दूध संग्रहण बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। संबंधित रिपोर्ट में वर्तमान संग्रहण लगभग 12 लाख लीटर प्रतिदिन बताया गया है। इसे बढ़ाने के लिए समितियों, प्रसंस्करण संयंत्रों और अन्य सुविधाओं के विस्तार की योजना है।
रिपोर्ट के अनुसार, डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए 2,973 करोड़ रुपये की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और सहकारी नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने में मदद करना है।
उज्जैन और भोपाल की डेयरी परियोजनाएं
सम्मेलन के आधिकारिक कार्यक्रम में उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले दूध प्रसंस्करण संयंत्र का डिजिटल भूमिपूजन शामिल था। इसकी क्षमता तीन लाख लीटर प्रतिदिन निर्धारित है।
भोपाल में 16.5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला दुग्ध उत्पाद संयंत्र और 12.42 करोड़ रुपये की राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला भी कार्यक्रम में शामिल रहे। शिवपुरी के मिनी डेयरी प्लांट में 6.5 करोड़ रुपये से किए गए सुदृढ़ीकरण कार्यों का उल्लेख भी सरकारी विवरण में किया गया।
महिला गोपालकों की भागीदारी को प्रोत्साहन
डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना भी सम्मेलन का प्रमुख विषय रहा। उल्लेखनीय कार्य करने वाली गोपालक दीदियों के सम्मान और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र देने की व्यवस्था रखी गई।
इसके साथ भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों के सदस्यों को बोनस तथा डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को लाभांश वितरण कार्यक्रम का हिस्सा रहा। आधिकारिक विवरण में लाभांश की कुल राशि 15.10 करोड़ रुपये बताई गई है।
राष्ट्रीय पहल से जुड़ा प्रदेश का अभियान
राष्ट्रीय स्तर पर श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत सहकारिता मंत्रालय ने 19 सितंबर 2024 को की थी। इसलिए मुख्यमंत्री के बयान को मध्यप्रदेश में इस दिशा में नई गतिविधियों और परियोजनाओं के विस्तार के संदर्भ में समझना चाहिए। राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य सहकारी पहुंच बढ़ाना, रोजगार और महिला सशक्तीकरण को प्रोत्साहन देना तथा पांच वर्षों में डेयरी सहकारी संस्थाओं की दूध खरीद में 50 प्रतिशत वृद्धि करना है। इसके अंतर्गत देश में 75 हजार नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
