मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे विभागीय समीक्षा, कैबिनेट फेरबदल की रणनीति हो सकती है तय
(MP Cabinet Review 2025 | मुख्यमंत्री मोहन यादव विभागीय समीक्षा | MP मंत्रियों का प्रदर्शन | खजुराहो कैबिनेट बैठक | बुंदेलखंड विकास)
मध्यप्रदेश की राजनीति में दिसंबर की शुरुआत खास होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 से 5 दिसंबर 2025 के बीच राज्य के सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा करने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह समीक्षा सिर्फ विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे भविष्य में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की जमीन भी तैयार हो सकती है। बीते दो वर्षों में मंत्रियों द्वारा किए गए कार्यों, उनके विभागों की प्रगति, योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट उपयोग जैसे बिंदुओं पर मुख्यमंत्री स्वयं बारीकी से आकलन करेंगे।
मंत्रियों को भेजी गई तिथियाँ — 1 से 5 दिसंबर तक होगी विभागवार समीक्षा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने विभाग की उपलब्धियों, चुनौतियों, बजट स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार रखें। इस समीक्षा में मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन, विभागों के अपर मुख्य सचिव, सचिव और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सरकार इसे “विभागीय समीक्षा बैठक” कह रही है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे आगामी कैबिनेट स्ट्रक्चर तैयार करने की प्रक्रिया माना जा रहा है।
क्या इस समीक्षा से बदलेगी मंत्रियों की कुर्सी?
सूत्रों के अनुसार, कई विभागों के कामकाज की शिकायतें लगातार मुख्यमंत्री के पास पहुँच रही थीं। ऐसे में माना जा रहा है कि समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि—
- कौन मंत्री अपनी जिम्मेदारी पर कायम रहेगा
- किन मंत्रियों का विभाग बदला जाएगा
- और किसके प्रदर्शन को कमजोर मानकर उनकी भूमिका पर पुनर्विचार किया जा सकता है
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मोहन यादव सरकार 2026 के रोडमैप को मजबूत करने के लिए मंत्रिमंडल के प्रदर्शन में कठोर बदलाव कर सकती है।
8–9 दिसंबर को खजुराहो में विभागीय बैठकें, 9 दिसंबर को कैबिनेट मीटिंग
समीक्षा प्रक्रिया के बाद 8 और 9 दिसंबर को ऐतिहासिक शहर खजुराहो में विभागीय बैठकें आयोजित होंगी। इसके अगले ही दिन 9 दिसंबर को वहीं पर महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक भी होगी। यह बैठक वर्ष 2025 की अंतिम कैबिनेट मीटिंग होगी, इसलिए कई बड़े निर्णय लिए जाने की संभावना है।
बुंदेलखंड विकास पर फोकस
खजुराहो में होने वाली बैठक में सरकार की प्राथमिकता बुंदेलखंड का समग्र विकास होगा।
मुख्य प्रमुख एजेंडा में शामिल हो सकते हैं—
- केन–बेतवा लिंक परियोजना की प्रगति
- बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल समस्या का समाधान
- कृषि सिंचाई नेटवर्क का विस्तार
- सड़क, पर्यटन और औद्योगिक विकास योजनाएँ
- ग्रामीण आजीविका मिशन की गति बढ़ाने पर विचार
खजुराहो (छतरपुर) को पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ रणनीतिक रूप से बुंदेलखंड के केंद्र में होने के कारण बैठक के लिए चुना गया है। इससे पहले कैबिनेट बैठकें सिंग्रामपुर, राजबाड़ा और महेश्वर में आयोजित की जा चुकी हैं।
1 दिसंबर को गीता जयंती बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी
मंगलवार की कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जानकारी दी कि इस वर्ष भी 1 दिसंबर को गीता जयंती पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाई जाएगी। मध्यप्रदेश इस बार भी कुरुक्षेत्र में 24 नवंबर से 1 दिसंबर तक चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रमुख भागीदार रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मध्यप्रदेश की भव्य प्रस्तुति
कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी—
- जय श्रीकृष्ण नृत्य नाट्य
- श्रीकृष्ण लीला मंचन
- कृष्णायन कार्यक्रम
- जनजातीय एवं लोक नृत्य
- चित्र प्रदर्शनी और शास्त्रीय कला प्रदर्शन
प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के लिए विशेष दलों को कुरुक्षेत्र भेजा जा रहा है।
प्रदेशभर में 3 लाख लोग करेंगे गीता पाठ
प्रदेश के 313 विकासखंड, 55 जिला मुख्यालय, और 10 संभागों में गीता जयंती के राज्यस्तरीय आयोजन होंगे। परंपरा के आचार्यों की उपस्थिति में लगभग 3 लाख गीता प्रेमी मिलकर श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक सस्वर पाठ करेंगे।
इसके साथ ही—
- गीता ज्ञान प्रतियोगिता
- कृष्णायन नृत्य नाटिका
- सांस्कृतिक जुलूस
- धार्मिक प्रवचन
जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
समीक्षा बैठकें क्यों महत्वपूर्ण हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह समीक्षा इसलिए भी अहम है क्योंकि—
- कई विभागों के कामकाज पर जनता और विधायकों ने असंतोष जताया है
- 2026 की विकास योजनाओं के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाना है
- मंत्रिमंडल को संकुचित या विस्तृत करने की संभावनाएँ खुली हैं
- सरकार भविष्य की रणनीति को “परफॉर्मेंस बेस्ड” बनाना चाहती है
मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने कार्यकाल को तेज गति देने के लिए “Accountability + Efficiency मॉडल” पर फोकस कर रहे हैं। विभागीय समीक्षा उसी मॉडल का हिस्सा है।
निष्कर्ष
1 से 9 दिसंबर के बीच होने वाली सभी बैठकें—विभागीय समीक्षा, खजुराहो बैठकें और कैबिनेट मीटिंग—मध्यप्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।
बुंदेलखंड विकास, मंत्रियों का प्रदर्शन, मंत्रिमंडल फेरबदल की संभावनाएँ, और गीता जयंती के भव्य आयोजन—ये सभी मुद्दे दिसंबर की शुरुआत को राज्य के लिए बेहद खास बना रहे हैं।
