मध्य प्रदेश के 7 शहरों को मिला स्वच्छता सम्मान, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया ₹5,364 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण
भोपाल। मध्य प्रदेश ने एक बार फिर स्वच्छता और विकास के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के 7 शहरों को स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “मध्य प्रदेश अब मेट्रोपॉलिटन राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां स्वच्छता, सुशासन और सतत विकास हमारी प्राथमिकता है।”
यह अवसर था पांचवें राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान समारोह का, जो भोपाल में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने अमृत योजना (AMRUT) के अंतर्गत ₹5,364 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं में जल प्रदाय, सीवरेज सिस्टम, हरित क्षेत्र और नगरीय अधोसंरचना विकास से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
🌿 ‘स्वच्छता समग्र’ कार्यशाला का आयोजन
समारोह के साथ-साथ ‘स्वच्छता समग्र कार्यशाला’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों और नगर निकाय प्रतिनिधियों ने प्रदेश की वायु गुणवत्ता, शहरी स्वच्छता, लीगेसी वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
राज्य के नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने कार्यशाला में मध्य प्रदेश की स्वच्छता की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीतियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकाय अब “शून्य अपशिष्ट शहर” के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
🏆 इन शहरों को मिला स्वच्छता सम्मान
राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में जबलपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, देवास नगर निगमों के साथ-साथ शाहगंज नगर परिषद और बुधनी नगर पालिका को उत्कृष्ट स्वच्छता कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
इन सातों शहरों ने अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा निस्तारण, सीवरेज सुधार, जनभागीदारी और हरित क्षेत्र विस्तार में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“हमारा लक्ष्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है। हम कचरे से करिश्मा करने वाले शहर बना रहे हैं, जहां हर नागरिक स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी माने।”
💧 ₹5,364 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य में अमृत योजना के तहत ₹5,364 करोड़ की लागत से जल प्रदाय, सीवरेज, हरित क्षेत्र और अधोसंरचना विकास की परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
इन योजनाओं से प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को बेहतर पेयजल सुविधा, स्वच्छ सीवरेज सिस्टम और हरित पर्यावरण का लाभ मिलेगा।
“यह निवेश न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार का प्रतीक है, बल्कि यह स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के निर्माण की दिशा में ठोस कदम है,”
— मुख्यमंत्री मोहन यादव
🌍 विशेषज्ञों ने रखे अपने सुझाव
कार्यशाला में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, छिंदवाड़ा महापौर विक्रम अहाके, ग्वालियर महापौर शोभा सिकरवार और विभिन्न नगर निगम आयुक्तों ने अपने शहरों में किए जा रहे नवाचार और चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
नर्मदा घाटी और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता पर चर्चा करते हुए उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह, पर्यटन निगम के एमडी इलैया राजा और जिम्मेदार पर्यटन मिशन के डायरेक्टर डीपी सिंह ने स्वच्छ पर्यटन की दिशा में ठोस सुझाव दिए।
🌆 समानांतर सत्र में शहरी विकास पर विचार
समानांतर सत्र में भोपाल महापौर मालती राय, उज्जैन आयुक्त अभिलाष मिश्रा, भोपाल आयुक्त संस्कृति जैन और सागर आयुक्त राजकुमार खत्री ने छोटे शहरों के विकास, शहरी सौंदर्यीकरण और ठोस कचरा प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि कैसे नवाचार और जनसहभागिता से छोटे शहर भी “स्मार्ट सिटी” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
🎬 स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 का डिजिटल पोस्टर लॉन्च
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘स्वच्छता सर्वेक्षण 2025’ का डिजिटल पोस्टर लॉन्च किया।
इस अवसर पर स्वच्छता पखवाड़े पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें सफाई मित्रों की मेहनत और समर्पण को दर्शाया गया।
मुख्यमंत्री ने सफाई मित्रों से संवाद करते हुए कहा —
“आप सभी हमारे शहरों के असली नायक हैं। आपकी मेहनत से ही मध्य प्रदेश देशभर में स्वच्छता का मॉडल बना है।”
कार्यक्रम में सफाई मित्रों की सुरक्षा, कौशल विकास और कल्याण योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सफाई कर्मियों के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की, जिनमें आधुनिक उपकरण, स्वास्थ्य बीमा और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
💬 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य विचार
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“स्वच्छता और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।”
सीएम ने कहा कि स्वच्छ शहर ही स्वस्थ समाज का निर्माण करते हैं और इससे निवेश और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। -
“हर नगर निकाय को आत्मनिर्भर बनना होगा।”
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रत्येक निकाय को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। -
“मध्य प्रदेश को मेट्रोपॉलिटन राज्य बनाना लक्ष्य।”
सीएम ने कहा कि आज हमारे शहर तेजी से मेट्रोपॉलिटन स्तर की ओर अग्रसर हैं, जो कभी कल्पना से परे था। -
“जनभागीदारी ही असली ताकत है।”
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
🌱 स्वच्छता और विकास की नई दिशा
मध्य प्रदेश में इंदौर पहले ही देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका है और अब प्रदेश के अन्य शहर भी उसी दिशा में अग्रसर हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक सभी नगरीय निकायों को 100% वेस्ट-फ्री और हरित शहर बनाया जाए।
संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन ने बताया —
“राज्य की नीति अब Reduce, Reuse, Recycle पर आधारित है। हर शहर में लीगेसी वेस्ट साइटों को ग्रीन जोन में बदला जा रहा है।”
🌟 निष्कर्ष
पांचवें राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान समारोह ने एक बार फिर यह साबित किया कि मध्य प्रदेश न केवल स्वच्छता में अग्रणी है, बल्कि सतत विकास और जनकल्याण की दिशा में भी देश के लिए उदाहरण बन रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने यह संदेश दिया है कि “स्वच्छता से ही समृद्धि का मार्ग निकलता है।”
