CJP आंदोलन के कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद का दावा: ‘जीत के दिन साथियों से नहीं मिल पाने का रहेगा अफसोस’
35 दिन तक जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के लिए जुटाते रहे खाना-पानी, 25 जुलाई को अचानक गायब होने की बताई पूरी कहानी
नई दिल्ली। CJP आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले मोहम्मद जुनैद अब आंदोलन की सफलता के बाद भी एक अलग तरह के दर्द से गुजर रहे हैं। जंतर-मंतर पर 6 जून से शुरू हुए आंदोलन के दौरान जुनैद लगातार आंदोलनकारियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करते नजर आए थे। लेकिन जिस दिन आंदोलन अपनी बड़ी उपलब्धि तक पहुंचा, उस दिन वे वहां मौजूद नहीं थे।
जुनैद का कहना है कि उन्हें दो बातों का सबसे ज्यादा अफसोस है। पहला, जीत के उस पल में वे अपने साथियों और आंदोलन में शामिल लोगों से मिल नहीं पाए और दूसरा, उनके परिवार को इस दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों की सेवा में जुटे थे जुनैद
मोहम्मद जुनैद ने बताया कि वह 6 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का हिस्सा थे। शुरुआत में उन्होंने महसूस किया कि तेज गर्मी के बीच आंदोलन स्थल पर पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी थी। इसके बाद उन्होंने पानी की व्यवस्था शुरू की।
धीरे-धीरे उन्होंने खाने-पीने की अन्य चीजों का इंतजाम भी करना शुरू कर दिया। आंदोलन में शामिल लोगों के लिए बिस्किट, नमकीन, स्नैक्स और भोजन की व्यवस्था की जाने लगी।
जुनैद के अनुसार, उन्होंने कभी किसी से नकद चंदा नहीं लिया। जो लोग मदद करना चाहते थे, उनसे पानी, खाने के पैकेट या जरूरत की अन्य सामग्री देने को कहा जाता था।
सामूहिक सहयोग से चलता रहा भोजन का इंतजाम
जुनैद ने बताया कि शुरुआत भले ही उन्होंने की थी, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी कई लोगों ने मिलकर संभाली। अलग-अलग समुदायों और संगठनों के लोग मदद के लिए आगे आए।
उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के लोगों ने लंगर की व्यवस्था की, मंदिरों से भी भोजन आया, किसान संगठनों और अन्य लोगों ने भी सहयोग किया।
उनके अनुसार, आंदोलन स्थल पर लोग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देते थे। कोई पानी लेकर आता था तो कोई बिस्किट, भोजन या अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराता था।
25 जुलाई को कहां थे जुनैद?
आंदोलन की सफलता के बाद जब जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जा रहा था, उस समय जुनैद वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने बताया कि 24 जुलाई की रात उन्हें कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद वे रैबीज का टीका लगवाने के लिए अस्पताल गए थे।
जुनैद के अनुसार, अस्पताल से लौटते समय रास्ते में एक घटना हुई। उन्होंने दावा किया कि बिना नंबर प्लेट वाली एक गाड़ी में आए कुछ लोगों ने उन्हें और उनके साथी को रोक लिया। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया और पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए।
जुनैद का कहना है कि उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर एक जगह रखा गया और अगले दिन पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि उनसे आंदोलन में खाने-पीने की व्यवस्था, पैसों के स्रोत और अन्य जानकारियों के बारे में सवाल पूछे गए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ किसी तरह की मारपीट नहीं की गई और पुलिसकर्मियों ने खाने-पीने की व्यवस्था भी की।
मसूरी-देहरादून में छोड़े जाने का दावा
जुनैद के मुताबिक, पूछताछ के बाद उन्हें कई घंटे तक वाहन में ले जाया गया। शाम करीब 6 बजे उन्हें छोड़ा गया और जब आंखों की पट्टी हटाई गई तो वह खुद को पहाड़ी इलाके में पाए।
उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों से पूछने पर उन्हें पता चला कि वह मसूरी-देहरादून क्षेत्र में हैं।
परिवार से पूछताछ को लेकर जताई नाराजगी
जुनैद ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल होने का असर उनके परिवार पर भी पड़ा। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके पिता और भाई से पूछताछ की।
उनके अनुसार, परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की गई। जुनैद का कहना है कि उनके घर से कुछ दस्तावेज भी ले जाए गए।
उन्होंने कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनकी भूमिका केवल आंदोलनकारियों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने तक सीमित थी।
जीत के दिन साथियों से नहीं मिल पाने का दर्द
जुनैद भावुक होकर कहते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि आंदोलन की सफलता के समय वह अपने साथियों के बीच मौजूद नहीं थे।
उन्होंने कहा कि 35-36 दिनों तक जिन लोगों के साथ उन्होंने समय बिताया, उनसे विदाई के समय मुलाकात नहीं हो सकी। कई लोग अलग-अलग राज्यों से आए थे और अब दोबारा मिलना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि जुनैद का कहना है कि उन्हें खुशी है कि जिस उद्देश्य के लिए आंदोलन किया गया था, उसमें सफलता मिली।
परिवार की परेशानी को बताया सबसे बड़ा दुख
जुनैद ने कहा कि खुद की परेशानियों से ज्यादा उन्हें अपने परिवार को हुई तकलीफ का दुख है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने आंदोलन में हिस्सा लेने का फैसला अपने विश्वास के आधार पर किया था, लेकिन परिवार को इससे जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कौन हैं मोहम्मद जुनैद?
मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मसूरी क्षेत्र के नाहल गांव के रहने वाले हैं। वह पेशे से वकील हैं।
उन्होंने गाजियाबाद के शंभू दयाल कॉलेज और सुंदर दीप कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में भी वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
जुनैद इससे पहले CAA विरोध प्रदर्शन, किसान आंदोलन और अन्य सामाजिक आंदोलनों में भी शामिल रहे हैं। उनका कहना है कि सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाना उनके सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रहा है।
