चेटीचंड महापर्व 2026 पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का संदेश, अखंड भारत की भावना, सिंधी समाज का चल समारोह और सांस्कृतिक एकता का महत्व जानिए।
चेटीचंड महापर्व 2026: अखंड भारत की भावना का जीवंत प्रतीक
चेटीचंड महापर्व 2026 का महत्व
चेटीचंड महापर्व 2026 सिंधी समाज का प्रमुख और अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का भी परिचायक है।हर वर्ष चैत्र मास की शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पर्व नए वर्ष की शुरुआत का भी संकेत देता है। इस दिन लोग भगवान झूलेलाल की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का संदेश
चेटीचंड महापर्व 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारतीयों को अखंड भारत की भावना से जोड़ता है और हमारे दिलों में एकता का सपना जीवित रखता है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव समाज में प्रेम, भाईचारा और आपसी सद्भाव को बढ़ाते हैं। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के गुणों—वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता—को याद करते हुए शासन में इन आदर्शों को अपनाने की बात कही।
उज्जैन में भव्य चल समारोह
इस कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए, जिनमें:
- राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री
- प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता
- टीवी कलाकार
- स्थानीय जनप्रतिनिधि
सिंधी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
अखंड भारत की भावना और सांस्कृतिक एकता
चेटीचंड महापर्व 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता का प्रतीक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व हमें हमारे इतिहास और परंपराओं की याद दिलाता है। यह हमें सिखाता है कि विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम और सहयोग से ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है।अखंड भारत की भावना केवल भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों, संस्कृति और मूल्यों में भी झलकती है।
सिंधी समाज की परंपरा और आस्था
सिंधी समाज के लिए चेटीचंड महापर्व 2026 विशेष महत्व रखता है। इस दिन:
- भगवान झूलेलाल की पूजा होती है
- शोभायात्राएं निकाली जाती हैं
- भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं
यह पर्व समाज को अपनी जड़ों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराता है।
सिंहस्थ 2028 और विकास की दिशा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में कई विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहर की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।
निष्कर्ष
चेटीचंड महापर्व 2026 केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, एकता और अखंड भारत की भावना का जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश इस पर्व के महत्व को और भी गहराई से प्रस्तुत करता है।यह पर्व हमें सिखाता है कि विविधता में ही हमारी शक्ति है और एकता ही हमारे राष्ट्र की पहचान है।

