चातुर्मास तमाशा नहीं बल्कि आत्मकल्याण और धर्म आराधना का अवसर है। हार्दिक हुंडिया ने धर्मप्रेमी श्रावकों से सादगी, साधर्मिक सेवा और धार्मिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च रोकने की अपील की। पढ़ें पूरा संदेश।
ये भव और परभव सुधारने का अनमोल अवसर यानि चौमासा ना बने तमाशा ?? : हार्दिक हुंडिया
पवित्र पुण्य करने का अनमोल अवसर आ रहा है चार महीने का चातुर्मास . चातुर्मास में हर जैन परिवार धर्म आराधना करेंगे । परिवार तो जहाँ है वहाँ ही रहेगा , लेकिन हमारे संघ परिवारों से निकले मुमुक्ष आत्मा दीक्षा लेने के बाद ४ महीना ये उपकारी महान संत ख़ुद की आत्मा के कल्याण के साथ साथ हमारी आत्मा का कल्याण करने के लिये चातुर्मास कराने आ रहे है
परम कृपालु परमात्मा भगवान महावीर स्वामीजी ने संघ की स्थापना की । संघ के सुधर्मा स्वामीजी की पाट पर बैठकर साधु महात्मा हमे धर्म के पाठ सुनायेंगे । हमे इनकी वाणी सुनकर अमल कर के उनके साथ साथ हमारा भी जीवन सुधारेंगे । चातुर्मास में आज की तारीख़ में बहुत सादगी पूर्ण धर्म आराधना के साथ साथ हमे हमारे साधार्मिक भाईओ का ध्यान रखना है
चौमासा , जो ये भव और पर भव दोनों सुधारने का अनमोल अवसर है । लेकिन आज कल क्या हो रहा है ? चातुर्मास के नाम करोड़ो का खर्चा ? एक तरफ़ संघ का साधार्मिक भाई तकलीफ़ में है , दुखी है और संघ साधर्मिक भाई की मदद ना कर के बेंड , बगी, हाथी , घोड़ा , गवैया , नाचने वाले , टेंट , नवकारसी, वीडियो , फोटो ग्राफ़ी , डेकोरेशन , एसी हॉल किराये लेना , ढोल , जगह जगह कमान , पोस्टर ऐसे कई अनगिनत खर्च करके क्या करना चाहते है ? इस में कौनसी धर्म आराधना करके हम हमारा पाप खपा रहे है ?
संघ के पहले दिन चातुर्मास कराने आने वाले साधु कहते है की हम एक भी पैसे की बोली या जो भी इंकम होगी वो सिर्फ संघ की होगी । चतुर्विध संघ के सामने ये बोलने वाले महात्मा , चातुर्मास पूरा होते ही कहेंगे की कोई एक प्रोजेक्ट हमारा मंदिर वगेरे बनाने का हाई वे पे चल रहा है ऐसा बोल के संघ से बड़े पैसे ले लेंगे ? ऐसे साधुओ से हार्दिक हुंडिया का सवाल है की आप चातुर्मास कराने आये है या व्यापार करने ? तमाशा कराने आये हो चातुर्मास कराने ? जरा अपनी आत्मा से पूछो ?
कोई कोई महात्मा तो चातुर्मास कराने आने से पहले ही तय कर देते है की चातुर्मास में जो भी इंकम होगी वो ६० पर्सेंट संघ की और ४० परसेंट चातुर्मास कराने आने वाली महात्मा की ? वाह रे वाह । आप साधु हो या साधु के नाम पे व्यापारी ? हार्दिक हुंडिया की देश के तमाम संघो से बिनती है की ऐसे व्यापार करने वाले साधु वेश में बैठे व्यापारीओ को धर्म के पाठ अब हमे उनको शिखाने का समय आ गया है । ये चातुर्मास है कोई तमाशा नहीं है की धर्म के नाम पे आप धंधा कर के जाओगे और हम चुप बैठेंगे ?
एक साधु अपने आप को माँ पद्मावती का भगत बताकर चातुर्मास में माँ पद्मावती माता के गुण गा के संघ से ये बोलकर लाखो रुपया की चाँदी ले ली की माता जी को गहना बनाना है । साधर्मिक भाई दुखी है तो क्या माँ गहना पहनेगी ? माँ के नाम पे व्यापार करने वाला क्या साधु हो सकता है ?
हार्दिक हुंडिया की ये बात देश के तमाम धर्म प्रेमीओ सोचे की जो राजा वर्धमान कुमार अरबो खरबो की सपंती छोड़कर भगवान महावीर बने थे उनके नाम पे व्यापार क्यों ? संघ ये सब खर्चे बंद करके साधर्मिक भाई ओ को मजबूत करे । जहाँ भगवान की पूजा करने वाला कोई नहीं है वहाँ मंदिर बनाकर करोड़ो रूपिया इकठा करने वाले साधुओ को बोलो चतुर्विध संघ के सामने शपथ ले की ऐसे मंदिर नहीं बनायेंगे ।
चौमासा ये भव के साथ साथ परभव सुधारने का अनमोल अवसर है , चौमासा तमाशा ना बने ये ही देश के तमाम संघों से बिनती के साथ
हार्दिक हुंडिया
आप सभी का शुभ चिंतक
( आइजा परिवार )

