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चातुर्मास मंगल प्रवेश 2026: ऐतिहासिक एवं भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश में गूंजे जयकारे, 2000 से अधिक गुरु भक्त हुए शामिल

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Published On: 26 July 2026
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चातुर्मास मंगल प्रवेश के अवसर पर मुंबई के माटुंगा कच्छी मूर्तिपूजक श्वेतांबर जैन संघ में गणीवर्य उदयरत्न सागरजी म.सा. एवं गुणवल्लभ सागरजी म.सा. का ऐतिहासिक प्रवेश हुआ। 2000 से अधिक श्रद्धालु, राजु भाई मुंद्रा द्वारा पांचवीं बार 180 उपवास का पच्छाखाण एवं भव्य धर्मसभा की पूरी खबर पढ़ें।

चातुर्मास मंगल प्रवेश: माटुंगा में गणीवर्य उदयरत्न सागरजी एवं गुणवल्लभ सागरजी का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश, जयकारों से गूंजा पूरा नगर

रिपोर्ट : विक्रम सुराणा

माटुंगा में ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश

चातुर्मास मंगल प्रवेश के शुभ अवसर पर महाराष्ट्र की मायानगरी मुंबई स्थित श्री माटुंगा कच्छी मूर्तिपूजक श्वेतांबर जैन संघ में अचलगच्छ के परम पूज्य गणीवर्य उदयरत्न सागरजी महाराज साहेब एवं प्रवचनकार परम पूज्य गुणवल्लभ सागरजी महाराज साहेब का ऐतिहासिक एवं भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ।पूरा माटुंगा नगर जय जिनेंद्र, गुरु वंदन और धर्म जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो यह केवल रैली नहीं बल्कि गुरु भक्ति का विशाल जनसैलाब हो।


जयकारों से गूंजा पूरा माटुंगा

गुरुदेवों के मंगल प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों एवं धार्मिक ध्वजों के साथ शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकली।हर ओर एक ही स्वर सुनाई दे रहा था—“यह रैली नहीं, यह तो रैला है… उदयरत्न सागरजी और गुणवल्लभ सागरजी का मेला है।”इस ऐतिहासिक आयोजन में मुंबई सहित देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।गुरुदेवों के प्रेरणादायी प्रवचन

धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गणीवर्य उदयरत्न सागरजी महाराज साहेब ने कहा कि—

“चातुर्मास में वाणी और पानी दोनों का विशेष महत्व है। वाणी से सद्भाव और पानी से जीवन चलता है, इसलिए दोनों का संयम आवश्यक है।”

वहीं गुणवल्लभ सागरजी महाराज साहेब ने कहा—

“गुरु के बिना जीवन अधूरा है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना आवश्यक है क्योंकि गुरु ही सही मार्ग दिखाते हैं।”

दोनों संतों के प्रेरणादायी प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और सदाचार का संदेश दिया।


पांचवीं बार 180 उपवास का लिया पच्छाखाण

धर्मसभा का सबसे प्रेरणादायी क्षण तब आया जब परम गुरु भक्त राजु भाई मुंद्रा (पोर्ट हॉल, मुंबई) ने गुरुदेवों के सानिध्य में पांचवीं बार 180 उपवास करने का संकल्प लिया।उन्होंने 16 उपवास का पच्छाखाण लेकर उपस्थित श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया।विशेष उल्लेखनीय है कि वे इससे पूर्व चार बार 180 उपवास पूर्ण कर चुके हैं।उनके इस अद्भुत तप एवं गुरु भक्ति पर पूरी सभा ने खड़े होकर तालियों एवं जयकारों से उनका सम्मान किया।

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देशभर से पहुंचे 2000 से अधिक श्रद्धालु

इस ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश में भारत के विभिन्न राज्यों एवं शहरों से लगभग 2000 से अधिक गुरु भक्त पहुंचे।इनमें प्रमुख रूप से

  • मुंबई
  • दक्षिण मुंबई
  • सूरत
  • विजयवाड़ा
  • पंजाब
  • लुधियाना
  • हैदराबाद
  • हुबली
  • बाड़मेर
  • मोरसीम
  • गुड़ामालानी
  • सुराणा समाज

सहित अनेक स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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प्रमुख पदाधिकारी एवं अतिथि

इस अवसर पर उपस्थित प्रमुखजनों में—

  • श्री माटुंगा कच्छी श्वेताम्बर मूर्तिपूजक सकल जैन संघ
  • ट्रस्ट मंडल
  • नयन भाई भेदा
  • प्रमुख श्री अखिल भारत अचलगच्छ (विधीपक्ष) श्वेताम्बर जैन संघ
  • मंगलजी सेठ भीनमाल
  • प्रकाश भाई विरा
  • अशोकजी कटारिया संघवी
  • मिश्रीमलजी बाड़मेर
  • ताराचंदजी मोरसीम
  • विनोद भाई मोरसीम
  • नरपत भाई मोरसीम
  • संजय भाई मोरसीम
  • सुमित भाई कटारिया
  • विपुल भाई मोरसीम
  • कल्पेश भाई मोरसीम
  • विदित भाई मोरसीम
  • आशीष भाई मोरसीम
  • सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रदीप भाई
  • मीडिया प्रतिनिधि विक्रम सुराणा

सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धार्मिक वातावरण से सराबोर हुआ माटुंगा

पूरा आयोजन अत्यंत अनुशासित, भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ।श्रद्धालुओं ने गुरुदेवों के दर्शन, वंदन एवं प्रवचन का लाभ लिया तथा आगामी चातुर्मास को धर्म आराधना, स्वाध्याय, तप एवं संयम के साथ मनाने का संकल्प लिया।यह आयोजन गुरु भक्ति, तप, त्याग एवं धार्मिक एकता का अनुपम उदाहरण बन गया।

निष्कर्ष

मुंबई के माटुंगा में आयोजित यह चातुर्मास मंगल प्रवेश केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि श्रद्धा, गुरु भक्ति, तप एवं भारतीय जैन संस्कृति की अद्भुत झलक बनकर सामने आया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, संतों के प्रेरक प्रवचन और राजु भाई मुंद्रा के पांचवीं बार 180 उपवास के संकल्प ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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