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	<title>Mahakal &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Mahakal &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Ujjain: अजा एकादशी पर भांग से सजे बाबा महाकाल, चांदी का मुकुट और मुंड माला से हुआ दिव्य श्रृंगार</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-aja-ekadashi-shringar-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:10:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain Mahakal Mahakal Mahakaleshwar Temple Ujjain News]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain: अजा एकादशी पर भांग से सजे बाबा महाकाल, चांदी का मुकुट और मुंड माला से हुआ दिव्य श्रृंगार Ujjain: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी के पावन अवसर पर ... <a title="Ujjain: अजा एकादशी पर भांग से सजे बाबा महाकाल, चांदी का मुकुट और मुंड माला से हुआ दिव्य श्रृंगार" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-aja-ekadashi-shringar-2026/" aria-label="Read more about Ujjain: अजा एकादशी पर भांग से सजे बाबा महाकाल, चांदी का मुकुट और मुंड माला से हुआ दिव्य श्रृंगार">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="font-family: inherit; font-size: 42px; font-style: inherit;">Ujjain: अजा एकादशी पर भांग से सजे बाबा महाकाल, चांदी का मुकुट और मुंड माला से हुआ दिव्य श्रृंगार</span></strong></p>
<section>
<div>
<p><strong>Ujjain:</strong> भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी के पावन अवसर पर सोमवार को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत से विधि-विधानपूर्वक अभिषेक किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल को भांग से सजाया गया और चांदी का मुकुट, मुंड माला, त्रिपुंड तथा रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। बाबा महाकाल के इस मनोहारी और दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। जैसे ही श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार के दर्शन किए, पूरा परिसर <strong>&#8216;जय श्री महाकाल&#8217;</strong> के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने भगवान के सामने शीश झुकाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।</p>
<h2><strong>तड़के 2:30 बजे खुले मंदिर के पट</strong></h2>
<p>Ujjain महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अजा एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष पूजन और श्रृंगार किया गया। सोमवार तड़के करीब 2:30 बजे भस्म आरती की प्रक्रिया के लिए मंदिर के पट खोले गए। पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया।</p>
<p>इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। पूजन-अभिषेक की परंपरा के तहत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। पंचामृत से अभिषेक के बाद विभिन्न धार्मिक विधियां पूरी की गईं और बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई।</p>
<h3><strong>चांदी के मुकुट और मुंड माला से किया गया श्रृंगार</strong></h3>
<p>पूजन के बाद बाबा महाकाल को आकर्षक रूप में सजाया गया। प्रथम घंटाल के बाद भगवान को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात कपूर आरती की गई। बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट पहनाया गया और मुंड माला धारण कराई गई।</p>
<p>अजा एकादशी के इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का भांग से श्रृंगार किया गया। इसके साथ ही उनके मस्तक पर त्रिपुंड लगाया गया और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। भगवान को राम नाम लिखे बेलपत्र भी चढ़ाए गए। इस विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और दिव्य दिखाई दे रहा था।</p>
<p>श्रद्धालु बाबा महाकाल के इस अलौकिक स्वरूप को देखकर भावविभोर नजर आए। मंदिर परिसर में मौजूद भक्त लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे। कई श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की।</p>
<h4><strong>महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म</strong></h4>
<p>बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार के बाद ज्योतिर्लिंग पर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। इसके बाद कपूर आरती की गई और भगवान को भोग लगाया गया। भस्म आरती के दौरान मंदिर की परंपराओं और धार्मिक विधियों का विधिवत पालन किया गया।</p>
<p>महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देशभर में प्रसिद्ध है। इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही अनुमति और बुकिंग प्रक्रिया पूरी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को विशेष स्वरूप में दर्शन देते हैं। इसी कारण भस्म आरती को बाबा महाकाल की उपासना का विशेष और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।</p>
<h4><strong>जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर</strong></h4>
<p>अजा एकादशी के मौके पर भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। जैसे ही बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भक्तों के सामने आया, श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ <strong>&#8216;जय श्री महाकाल&#8217;</strong> का उद्घोष किया। मंदिर परिसर में घंटियों और जयकारों की आवाज से माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।</p>
<p>देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार के दर्शन बेहद खास रहे। भक्तों ने भगवान का आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।</p>
<h5><strong>अजा एकादशी पर विशेष धार्मिक माहौल</strong></h5>
<p>हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक आस्था के कारण अजा एकादशी के दिन देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।</p>
<p>उज्जैन में इस अवसर पर बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार ने श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर दिया। भांग, चांदी के मुकुट, मुंड माला, त्रिपुंड और रुद्राक्ष से सुसज्जित बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए भक्तों में खास उत्साह दिखाई दिया।</p>
<h6><strong>शरद पूर्णिमा तक आरती का संशोधित समय लागू</strong></h6>
<p>Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में वर्तमान में आरती के समय में बदलाव किया गया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा।</p>
<p>मंदिर में आरती का निर्धारित समय इस प्रकार है:</p>
<ul>
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दध्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन आरती:</strong> रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<p>अजा एकादशी पर बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दर्शन ने उज्जैन के धार्मिक वातावरण को और भक्तिमय बना दिया। भोर से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने को मिला। भांग से सजे बाबा महाकाल और चांदी के मुकुट व मुंड माला से सुसज्जित उनका स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया और जय श्री महाकाल के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा प्रकट की।</p>
</div>
</section>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल, मोर पंख और वैष्णव तिलक से हुआ दिव्य शृंगार</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-janmashtami-special-shringar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:44:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Baba Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal News]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain Mahakal]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल, मोर पंख और वैष्णव तिलक से हुआ दिव्य शृंगार Ujjain Mahakal News: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व ... <a title="Ujjain: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल, मोर पंख और वैष्णव तिलक से हुआ दिव्य शृंगार" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-janmashtami-special-shringar/" aria-label="Read more about Ujjain: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल, मोर पंख और वैष्णव तिलक से हुआ दिव्य शृंगार">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल, मोर पंख और वैष्णव तिलक से हुआ दिव्य शृंगार</strong></h1>
<p><strong>Ujjain Mahakal News:</strong> जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष और मनमोहक शृंगार किया गया। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी जन्माष्टमी के दिन शुक्रवार को भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में सजाया गया। बाबा के मस्तक पर वैष्णव तिलक लगाया गया और मोर पंख से उनका आकर्षक शृंगार किया गया। बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान जैसे ही बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए, पूरा मंदिर परिसर <strong>&#8216;जय श्री महाकाल&#8217; और &#8216;जय श्री कृष्ण&#8217;</strong> के जयघोष से गूंज उठा। भक्त बाबा महाकाल के दर्शन कर भाव-विभोर नजर आए और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना की।</p>
<h2><strong>सुबह 3 बजे खुले मंदिर के पट</strong></h2>
<p>Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की परंपरा के अनुसार शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे मंदिर के पट खोले गए। मंदिर के पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया।</p>
<p>जलाभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल को पंचामृत से स्नान कराया गया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस का प्रयोग किया गया। धार्मिक विधि पूरी होने के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक शृंगार किया गया।</p>
<p>मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर बाबा महाकाल के शृंगार को विशेष रूप दिया गया था। इस दौरान भगवान के स्वरूप को श्रीकृष्ण से जोड़ते हुए मोर पंख और वैष्णव तिलक का प्रयोग किया गया।</p>
<h3><strong>चांदी का मुकुट और मुंड माला से सजा स्वरूप</strong></h3>
<p>पंचामृत अभिषेक और पूजन के बाद बाबा महाकाल को विभिन्न धार्मिक विधियों के साथ शृंगारित किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई।</p>
<p>बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई। जन्माष्टमी के कारण इस शृंगार में मोर पंख और वैष्णव तिलक विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। बाबा महाकाल का यह स्वरूप श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की छवि की याद दिला रहा था।</p>
<h4><strong>महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म</strong></h4>
<p>विशेष शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। इसके बाद कपूर आरती हुई और भगवान को भोग लगाया गया।</p>
<p>महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश में अपनी विशेष धार्मिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। जन्माष्टमी जैसे विशेष अवसर पर जब बाबा महाकाल का श्रीकृष्ण स्वरूप में शृंगार किया गया, तो श्रद्धालुओं में इसे लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।</p>
<p>मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती के दर्शन को श्रद्धालु बेहद महत्वपूर्ण और पुण्यदायी मानते हैं।</p>
<h4><strong>बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु</strong></h4>
<p>जन्माष्टमी के अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने बाबा के विशेष स्वरूप के दर्शन किए और मंदिर परिसर में धार्मिक जयघोष किया। श्रद्धालु भगवान महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए।</p>
<p>बाबा महाकाल के श्रीकृष्ण स्वरूप को देखकर भक्तों में खास उत्साह दिखाई दिया। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और जय श्री महाकाल के साथ जय श्री कृष्ण के उद्घोष सुनाई देते रहे।</p>
<h5><strong>जानिए आज की आरती का समय</strong></h5>
<p>Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलग-अलग आरतियों और पूजन की अपनी विशेष परंपरा है। वर्तमान में आरतियों का संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा।</p>
<ul>
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दध्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन आरती:</strong> रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<h6><strong>जन्माष्टमी पर दिखी भक्ति और आस्था की अनोखी झलक</strong></h6>
<p>Ujjain के महाकालेश्वर मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर बाबा महाकाल का श्रीकृष्ण स्वरूप में किया गया शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। मोर पंख, वैष्णव तिलक, चांदी का मुकुट और पारंपरिक शृंगार ने बाबा के स्वरूप को और भी मनमोहक बना दिया।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। जन्माष्टमी के इस विशेष अवसर पर महाकाल मंदिर में शिव भक्ति के साथ कृष्ण भक्ति का भी सुंदर संगम देखने को मिला।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: पंचामृत अभिषेक के बाद दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पण के साथ गूंजा ‘जय श्री महाकाल’</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-2-september-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 03:11:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain Mahakal Mahakal Temple Ujjain Mahakaleshwar Temple Mahakal Bhasma Aarti Bhasma Aarti Baba Mahakal]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain: पंचामृत अभिषेक के बाद दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पण के साथ गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ Ujjain: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह भाद्रपद कृष्ण पक्ष ... <a title="Ujjain: पंचामृत अभिषेक के बाद दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पण के साथ गूंजा ‘जय श्री महाकाल’" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-2-september-2026/" aria-label="Read more about Ujjain: पंचामृत अभिषेक के बाद दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पण के साथ गूंजा ‘जय श्री महाकाल’">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: पंचामृत अभिषेक के बाद दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पण के साथ गूंजा ‘जय श्री महाकाल’</strong></h1>
<p><strong>Ujjain:</strong> विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की पंचमी-षष्ठी तिथि के अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस दौरान भगवान महाकाल का विशेष पूजन, पंचामृत अभिषेक और मनमोहक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई। कंकु और गुलाल से किए गए विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को सूर्य और चंद्रमा के दिव्य स्वरूप में सजाया गया।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मौजूद रहे। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से ज्योतिर्लिंग पर भस्म अर्पित किए जाने के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>सुबह 3 बजे खुले मंदिर के कपाट</strong></h2>
<p>Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की पंचमी-षष्ठी तिथि के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती के लिए सुबह 3 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन किया।</p>
<p>पूजन के बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाया गया और हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई।</p>
<p>कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई। भगवान के इस दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।</p>
<h3><strong>कंकु और गुलाल से किया गया आकर्षक श्रृंगार</strong></h3>
<p>बुधवार की भस्म आरती में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। कंकु और गुलाल से भगवान का मनमोहक श्रृंगार किया गया। इसके साथ ही बाबा महाकाल को सूर्य और चंद्रमा के अलौकिक स्वरूप में सजाया गया।</p>
<p>विशेष श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप बेहद आकर्षक दिखाई दे रहा था। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के इस स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर नजर आए। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग पर भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद कपूर आरती हुई और भगवान महाकाल को भोग लगाया गया।</p>
<h4><strong>Ujjain भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़</strong></h4>
<p>बुधवार सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने भस्म आरती के दौरान भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p>आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालु भगवान महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए। इस दौरान लगातार ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंजते रहे।</p>
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के कारण महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देशभर से श्रद्धालु इस विशेष आरती में शामिल होने और बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<h5><strong>शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा आरती का संशोधित समय</strong></h5>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों का संशोधित समय निर्धारित किया गया है। यह समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा। श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन और आरती के लिए निर्धारित समय का ध्यान रखने की सलाह दी गई है।</p>
<p>मंदिर में भस्म आरती सुबह 3 बजे से 6 बजे तक होगी। इसके बाद दध्योदक आरती सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक आयोजित की जाएगी। भोग आरती का समय सुबह 10 बजे से 10:45 बजे तक निर्धारित किया गया है।</p>
<p>संध्या पूजन शाम 5 बजे से 5:45 बजे तक और संध्या आरती शाम 7 बजे से 7:45 बजे तक होगी। वहीं, शयन आरती रात 10:30 बजे से 11 बजे तक आयोजित की जाएगी।</p>
<h6><strong>महाकाल मंदिर की आरतियों का समय</strong></h6>
<ul>
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दध्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन आरती:</strong> रात 10:30 से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा। उज्जैन आने वाले श्रद्धालु मंदिर में पूजा और आरती की योजना इसी समय के अनुसार बना सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: महाकाल के दरबार में भस्म आरती का दिव्य नजारा, चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-chandi-mukut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:44:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Bhasma Aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain News]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain: महाकाल के दरबार में भस्म आरती का दिव्य नजारा, चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार ... <a title="Ujjain: महाकाल के दरबार में भस्म आरती का दिव्य नजारा, चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-chandi-mukut/" aria-label="Read more about Ujjain: महाकाल के दरबार में भस्म आरती का दिव्य नजारा, चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: महाकाल के दरबार में भस्म आरती का दिव्य नजारा, चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा</strong></h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>Ujjain Mahakal Bhasma Aarti:</strong> विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और मनमोहक शृंगार किया गया। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आयोजित भस्म आरती में बाबा महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल को चांदी का मुकुट, मुंड माला, त्रिनेत्र, सूर्य और चंद्रमा से विशेष रूप से सजाया गया। भस्म अर्पित किए जाने के दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुबह तड़के मंदिर के पट खुलने के साथ ही भस्म आरती की तैयारियां शुरू हुईं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के इस विशेष स्वरूप के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचे। आरती और पूजन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और लगातार <strong>&#8216;जय श्री महाकाल&#8217;</strong> का उद्घोष करते रहे।</p>
<h2><strong>पंचामृत से किया गया बाबा महाकाल का अभिषेक</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि मंगलवार को बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। भस्म आरती के लिए सुबह मंदिर के पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान भगवान की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार किए गए पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचामृत अभिषेक को भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का विशेष माध्यम माना जाता है। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक शृंगार किया गया।</p>
<h3><strong>चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा महाकाल</strong></h3>
<p class="isSelectedEnd">पंचामृत अभिषेक के बाद मंदिर की परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाया गया और बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई। पूजा-अर्चना के क्रम में बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार के इस विशेष शृंगार में बाबा महाकाल का त्रिनेत्र भी लगाया गया। इसके अलावा भगवान को सूर्य और चंद्रमा के प्रतीकों से सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप बेहद अलौकिक और आकर्षक दिखाई दिया। बाबा के इस दिव्य स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंदिर में मौजूद भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। भस्म आरती के दौरान गर्भगृह और मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।</p>
<h4><strong>Ujjain भस्म अर्पित होते ही गूंजा जय श्री महाकाल</strong></h4>
<p class="isSelectedEnd">बाबा महाकाल के विशेष शृंगार के बाद ज्योतिर्लिंग पर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। भस्म अर्पित किए जाने के समय श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म अर्पण के बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल को भोग लगाया गया। जैसे ही भस्म आरती की प्रक्रिया संपन्न हुई, मंदिर परिसर <strong>&#8216;जय श्री महाकाल&#8217;</strong> के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने हाथ जोड़कर बाबा के दिव्य दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही वजह है कि महाकाल की भस्म आरती को श्रद्धालुओं के लिए बेहद विशेष और पवित्र माना जाता है।</p>
<h5><strong>बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के विशेष शृंगार के दर्शन किए। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तिमय माहौल देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्रद्धालुओं ने भस्म आरती के दौरान भगवान शिव की आराधना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। बाबा महाकाल के चांदी के मुकुट, मुंड माला और त्रिनेत्र से सजे स्वरूप ने भक्तों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।</p>
<h6><strong>Ujjain महाकाल मंदिर में आरती का समय</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd">महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन अलग-अलग समय पर आरती और पूजन की परंपरा निभाई जाती है। भस्म आरती के अलावा दिनभर होने वाली अन्य प्रमुख आरतियों का समय इस प्रकार है—</p>
<ul data-spread="false">
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दध्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन आरती:</strong> रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंगलवार को भी मंदिर में ऐसा ही भक्तिमय दृश्य देखने को मिला, जब बाबा महाकाल के विशेष शृंगार और भस्म आरती के दौरान पूरा परिसर <strong>हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल</strong> के जयघोष से गूंजता रहा।</p>
<div id="gtx-trans" style="position: absolute; left: 147px; top: -21.3333px;">
<div class="gtx-trans-icon"></div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: त्रिनेत्र, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-trinetra-surya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 05:35:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Bhasma Aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Bhasma Aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Darshan]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain News]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=351515</guid>

					<description><![CDATA[Ujjain: त्रिनेत्र, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब Ujjain महाकाल भस्म आरती: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह भाद्रपद कृष्ण ... <a title="Ujjain: त्रिनेत्र, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-trinetra-surya/" aria-label="Read more about Ujjain: त्रिनेत्र, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: त्रिनेत्र, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब</strong></h1>
<p><strong>Ujjain महाकाल भस्म आरती:</strong> विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। सुबह तड़के मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष और मनमोहक शृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें त्रिनेत्र के साथ सूर्य और चंद्रमा से सजाया गया, जिससे बाबा का स्वरूप बेहद दिव्य और आकर्षक नजर आया।</p>
<p>भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। जैसे ही बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई और आरती का क्रम शुरू हुआ, पूरा मंदिर परिसर <strong>&#8216;जय श्री महाकाल&#8217;</strong> के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्ति में लीन नजर आए।</p>
<h2><strong>तड़के 2:30 बजे खुले मंदिर के पट</strong></h2>
<p>Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया सोमवार के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। भस्म आरती की तैयारियों के लिए तड़के करीब 2:30 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया।</p>
<p>सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक और पूजन की विभिन्न विधियां पूरी करने के बाद प्रथम घंटाल बजाया गया और भगवान को हरि ओम का जल अर्पित किया गया।</p>
<p>इसके बाद कपूर आरती की गई। पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई। विशेष शृंगार में बाबा का स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा।</p>
<h3><strong>त्रिनेत्र और सूर्य-चंद्रमा से हुआ विशेष शृंगार</strong></h3>
<p>सोमवार की भस्म आरती में बाबा महाकाल के शृंगार की खास बात उनका त्रिनेत्र स्वरूप रहा। बाबा के मस्तक पर त्रिनेत्र सजाया गया और उन्हें सूर्य तथा चंद्रमा के प्रतीकों से आलौकिक रूप दिया गया। इस विशेष शृंगार ने बाबा के दिव्य स्वरूप को और अधिक आकर्षक बना दिया।</p>
<p>शृंगार के दौरान बाबा महाकाल को बेलपत्र सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। भक्तों ने बाबा के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए।</p>
<h4><strong>महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म</strong></h4>
<p>बाबा महाकाल के विशेष शृंगार और पूजन के बाद ज्योतिर्लिंग पर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है और इसके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>भस्म अर्पित किए जाने के बाद कपूर आरती की गई और भगवान महाकाल को भोग लगाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालु बाबा के दर्शन करते हुए लगातार &#8216;जय श्री महाकाल&#8217; का उद्घोष करते रहे।</p>
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते भस्म आरती को महाकाल मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण आरतियों में माना जाता है।</p>
<h5><strong>बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु</strong></h5>
<p>सोमवार होने के कारण बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुबह होने से पहले ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचने लगे थे। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।</p>
<p>बाबा महाकाल के त्रिनेत्र और सूर्य-चंद्रमा से सजे स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कई भक्तों ने हाथ जोड़कर बाबा से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।</p>
<h6><strong>महाकाल मंदिर में आरती का संशोधित समय</strong></h6>
<p>Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों आरतियों का संशोधित समय लागू है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह समय <strong>आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक</strong> प्रभावी रहेगा।</p>
<p>आरतियों का समय इस प्रकार है:</p>
<ul>
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दद्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन आरती:</strong> रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। सोमवार की सुबह भी बाबा महाकाल के विशेष शृंगार और भस्म आरती के दर्शन ने भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। त्रिनेत्र, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव तथा जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजता रहा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा पर दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-bhadrapad/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 04:49:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain #Mahakal #BabaMahakal #Mahakaleshwar #MahakalTemple #UjjainMahakal]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=351214</guid>

					<description><![CDATA[Ujjain: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा पर दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष Ujjain: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को भाद्रपद कृष्ण ... <a title="Ujjain: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा पर दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-bhadrapad/" aria-label="Read more about Ujjain: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा पर दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा पर दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष</strong></h1>
<p><strong>Ujjain:</strong> विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह 3 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद गर्भगृह में भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को भस्म अर्पित की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालु भगवान महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए और लगातार <strong>‘जय श्री महाकाल’</strong> के जयकारे लगाते रहे। बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन कर भक्तों ने स्वयं को धन्य महसूस किया।</p>
<h2><strong>सुबह 3 बजे खुले मंदिर के कपाट</strong></h2>
<p>Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शनिवार को बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सुबह 3 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया।</p>
<p>पूजन के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया। धार्मिक मान्यताओं और मंदिर की परंपराओं के अनुसार सभी पूजन विधियां संपन्न की गईं।</p>
<h3><strong>पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ विशेष श्रृंगार</strong></h3>
<p>पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना का क्रम आगे बढ़ा। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई। बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई।</p>
<p>शनिवार के श्रृंगार में बाबा महाकाल को विशेष रूप से भांग से सजाया गया। भांग के श्रृंगार के साथ बाबा महाकाल को आकर्षक और आलौकिक स्वरूप प्रदान किया गया। विशेष श्रृंगार के बाद गर्भगृह में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन किए।</p>
<h4><strong>महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म</strong></h4>
<p>श्रृंगार और पूजन के बाद भस्म आरती की मुख्य परंपरा पूरी की गई। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद कपूर आरती की गई और भगवान को भोग लगाया गया।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी खास रही। जैसे ही बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई, भक्तों ने जयकारों के साथ अपनी श्रद्धा प्रकट की। मंदिर परिसर में ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।</p>
<h4><strong>Ujjain भस्म आरती को लेकर विशेष धार्मिक मान्यता</strong></h4>
<p>Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती देशभर में प्रसिद्ध है। इस आरती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।</p>
<p>इसी आस्था के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने और बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। शनिवार को भी मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।</p>
<h5><strong>भक्ति में डूबा नजर आया मंदिर परिसर</strong></h5>
<p>Ujjain भस्म आरती के दौरान महाकाल मंदिर का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया। मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और आरती के बीच श्रद्धालु भगवान महाकाल की भक्ति में डूबे रहे। बाबा के विशेष श्रृंगार के दर्शन के दौरान भक्तों ने जयकारे लगाए।</p>
<p>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के अवसर पर हुए इस विशेष श्रृंगार ने बाबा महाकाल के दर्शन को और भी खास बना दिया। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।</p>
<h6><strong>जानिए बाबा महाकाल की आरतियों का समय</strong></h6>
<p>श्री महाकालेश्वर मंदिर में दिनभर अलग-अलग समय पर आरती और पूजन की परंपरा है। श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आरतियों का समय इस प्रकार है:</p>
<ul>
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दध्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन आरती:</strong> रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<p>श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली इन आरतियों और पूजन में श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं। विशेष अवसरों पर बाबा महाकाल का श्रृंगार भी भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। शनिवार को भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा के अवसर पर बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: त्रिपुंड, चंद्रमा और भांग से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिखा दिव्य स्वरूप</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-tripurand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 04:08:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Bhasma Aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Darshan]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Sawan Purnima]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain News]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=350607</guid>

					<description><![CDATA[Ujjain: त्रिपुंड, चंद्रमा और भांग से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिखा दिव्य स्वरूप Ujjain। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के पावन अवसर ... <a title="Ujjain: त्रिपुंड, चंद्रमा और भांग से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिखा दिव्य स्वरूप" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aarti-tripurand/" aria-label="Read more about Ujjain: त्रिपुंड, चंद्रमा और भांग से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिखा दिव्य स्वरूप">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: त्रिपुंड, चंद्रमा और भांग से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिखा दिव्य स्वरूप</strong></h1>
<p>Ujjain। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरुवार सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और विशेष धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। तड़के 3 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में विशेष पूजन-अभिषेक शुरू हुआ। इस दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया और इसके बाद उनका आकर्षक एवं मनोहारी शृंगार किया गया।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को त्रिपुंड, चंद्रमा और भांग से विशेष रूप से सजाया गया। भगवान को बेलपत्र की माला धारण कराई गई। चांदी का मुकुट और मुंड माला पहनाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप बेहद अलौकिक नजर आया। विशेष शृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और उन्होंने भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>पंचामृत से हुआ बाबा महाकाल का अभिषेक</strong></h2>
<p>Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। भस्म आरती के लिए सुबह 3 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया गया।</p>
<p>इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार पंचामृत पूजन-अभिषेक के बाद प्रथम घंटाल बजाया गया और भगवान महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया।</p>
<p>पूजन की विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद कपूर आरती संपन्न हुई। इसके पश्चात बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई। मंदिर के गर्भगृह में चल रहे इस विशेष पूजन के दौरान धार्मिक वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<h3><strong>भांग से हुआ विशेष शृंगार</strong></h3>
<p>इस दिन बाबा महाकाल के शृंगार की सबसे खास बात उनका भांग से किया गया विशेष शृंगार रहा। भगवान महाकाल को भांग से सजाकर उन्हें एक अद्भुत और आलौकिक स्वरूप प्रदान किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा के साथ बाबा महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।</p>
<p>शृंगार के दौरान बाबा महाकाल को बेलपत्र की माला भी पहनाई गई। चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर में भक्त लगातार भगवान महाकाल की आराधना करते रहे और वातावरण &#8216;जय श्री महाकाल&#8217; के उद्घोष से गूंजता रहा।</p>
<h4><strong>महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म</strong></h4>
<p>विशेष शृंगार पूरा होने के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। भस्म अर्पण के बाद कपूर आरती की गई और भगवान को भोग लगाया गया।</p>
<p>मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक आस्था के चलते भस्म आरती को बाबा महाकाल की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस विशेष आरती में शामिल होने और भगवान के दिव्य दर्शन करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे।</p>
<h5><strong>जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंजा मंदिर परिसर</strong></h5>
<p>Ujjain भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की भारी मौजूदगी रही। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के विशेष शृंगार के दर्शन किए और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। जैसे ही भगवान महाकाल का दिव्य स्वरूप भक्तों के सामने आया, पूरा मंदिर परिसर &#8216;जय श्री महाकाल&#8217; के जयकारों से गूंज उठा।</p>
<p>श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष शृंगार और भस्म आरती श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र रही।</p>
<h6><strong>महाकालेश्वर मंदिर में आरती का संशोधित समय</strong></h6>
<p>Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में वर्तमान समय के अनुसार विभिन्न आरतियों का आयोजन निर्धारित समय पर किया जा रहा है। मंदिर में आरती और पूजन का संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा।</p>
<p>भस्म आरती: सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक<br />
दद्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक<br />
भोग आरती: सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक<br />
संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक<br />
संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक<br />
शयन आरती: रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक</p>
<p>बाबा महाकाल के विशेष शृंगार और भस्म आरती के इस पावन अवसर पर उज्जैन का महाकाल मंदिर पूरी तरह शिवमय नजर आया। भस्म, बेलपत्र, भांग, त्रिपुंड और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। भक्तों ने आरती में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद लिया और &#8216;जय श्री महाकाल&#8217; के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-baba-mahakal-adorned-in-lord-ganesha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:01:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain #Mahakal #BabaMahakal #Mahakaleshwar #MahakalTemple]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain: भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब Ujjain विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में बुधवार को भस्म आरती के दौरान ... <a title="Ujjain: भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-baba-mahakal-adorned-in-lord-ganesha/" aria-label="Read more about Ujjain: भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब</strong></h1>
<p><strong>Ujjain</strong> विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में बुधवार को भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद मनोहारी और आकर्षक श्रृंगार किया गया। श्रावण शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर तड़के 3 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई। इस अवसर पर बाबा महाकाल को पंचामृत से स्नान कराया गया और बाद में भस्म अर्पित कर उन्हें भगवान श्री गणेश के स्वरूप में सजाया गया। बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। बाबा महाकाल के दर्शन होते ही श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयकारे लगाए। लगातार गूंजते जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>तड़के 3 बजे खुले मंदिर के कपाट</strong></h2>
<p>Ujjain मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती के लिए सुबह करीब 3 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p>सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न इस पूजन के दौरान गर्भगृह में विशेष आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।</p>
<p>अभिषेक और पूजन के बाद प्रथम घंटाल बजाया गया। इसके पश्चात बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई।</p>
<h3><strong>गणेश स्वरूप में हुआ बाबा महाकाल का श्रृंगार</strong></h3>
<p>बुधवार के श्रृंगार की सबसे खास बात बाबा महाकाल का श्री गणेश स्वरूप था। बाबा महाकाल का भांग से विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें भगवान गणेश के स्वरूप में सजाया गया। इस मनोहारी स्वरूप को देखने के लिए भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।</p>
<p>बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार पूरा होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से उन्हें भस्म अर्पित की गई। इसके बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल को भोग लगाया गया। भस्म आरती की धार्मिक परंपरा के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को कराए गए।</p>
<h5><strong>जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंजा मंदिर</strong></h5>
<p>Ujjain भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। बाबा महाकाल के गणेश स्वरूप के दर्शन पाकर भक्तों में उत्साह देखने को मिला। दर्शन के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए और मंदिर परिसर में लगातार जय श्री महाकाल के जयकारे लगते रहे।</p>
<p>श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा महाकाल के इस विशेष स्वरूप के दर्शन उनके लिए बेहद आध्यात्मिक और यादगार अनुभव रहे। मंदिर में होने वाली भस्म आरती देशभर में प्रसिद्ध है और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<h5><strong>Ujjain भस्म आरती से जुड़ी धार्मिक मान्यता</strong></h5>
<p>Ujjain महाकाल मंदिर की भस्म आरती को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रहती है।</p>
<p>श्रावण मास में बाबा महाकाल के विभिन्न स्वरूपों में होने वाले श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान मंदिर में भक्तों की संख्या भी काफी बढ़ जाती है। बुधवार को भी भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।</p>
<h6><strong>आरती का संशोधित समय</strong></h6>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में फिलहाल आरती का संशोधित समय लागू है। यह व्यवस्था आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगी।</p>
<ul>
<li><strong>भस्म आरती:</strong> सुबह 3:00 से 6:00 बजे तक</li>
<li><strong>दद्योदक आरती:</strong> सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>भोग आरती:</strong> सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या पूजन:</strong> शाम 5:00 से 5:45 बजे तक</li>
<li><strong>संध्या आरती:</strong> शाम 7:00 से 7:45 बजे तक</li>
<li><strong>शयन</strong> आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे तक</li>
</ul>
<p>श्रावण शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर हुए इस विशेष श्रृंगार और भस्म आरती ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में भक्ति और आस्था का माहौल और भी खास बना दिया। गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन करने के बाद श्रद्धालु जय श्री महाकाल का उद्घोष करते हुए मंदिर से रवाना हुए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain में बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aart-shravan-shukla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 03:18:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain #Mahakal #Mahakaleshwar #BabaMahakal #MahakalTemple]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain में बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के अवसर पर ... <a title="Ujjain में बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-bhasma-aart-shravan-shukla/" aria-label="Read more about Ujjain में बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain में बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु</strong></h1>
<p>Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के अवसर पर मंगलवार सुबह बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती और विशेष शृंगार किया गया। तड़के 3 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही गर्भगृह में विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का विधिवत पूजन-अभिषेक हुआ। इसके बाद हरि ओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती संपन्न हुई।</p>
<h3><strong>भांग से किया गया बाबा महाकाल का शृंगार</strong></h3>
<p>आज के पूजन की खास बात बाबा महाकाल का भांग से किया गया विशेष शृंगार रहा। श्रृंगार के दौरान भगवान को सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजाया गया। इसके साथ ही बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई।</p>
<p>विशेष शृंगार के बाद ज्योतिर्लिंग पर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। इसके बाद कपूर आरती हुई और बाबा महाकाल को भोग लगाया गया।</p>
<p>मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का यह विशेष स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।</p>
<h3><strong>जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंजा मंदिर परिसर</strong></h3>
<p>Ujjain भस्म आरती में शामिल श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए। जैसे ही विशेष शृंगार के बाद बाबा महाकाल के दर्शन हुए, मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।</p>
<p>श्रावण मास के दौरान महाकालेश्वर मंदिर में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भस्म आरती को मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान प्राप्त है। इस दौरान भगवान महाकाल का अलग-अलग स्वरूपों में शृंगार किया जाता है।</p>
<h4><strong>Ujjain भस्म आरती से शयन आरती तक बदला समय</strong></h4>
<p>Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में वर्तमान समय के अनुसार भस्म आरती सुबह 3 बजे से 6 बजे तक होती है। इसके बाद दध्योदक आरती सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक, भोग आरती सुबह 10 बजे से 10:45 बजे तक और संध्या पूजन शाम 5 बजे से 5:45 बजे तक निर्धारित है।</p>
<p>संध्या आरती शाम 7 बजे से 7:45 बजे तक होती है, जबकि शयन आरती रात 10:30 बजे से 11 बजे तक संपन्न होती है।</p>
<p>मंदिर प्रशासन के अनुसार आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा। श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन और आरती में शामिल होने के लिए निर्धारित समय का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।</p>
<p>कुल मिलाकर श्रावण शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर बाबा महाकाल का भांग से किया गया विशेष शृंगार और भस्म आरती श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और भक्तिमय अनुभव का केंद्र रहा। हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आस्था और श्रद्धा के साथ जयकारे लगाए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Ujjain: श्रावण की अंतिम सवारी आज, चार दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल; शिप्रा में होगा जलाभिषेक</title>
		<link>https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-sawari-24-august-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 02:54:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Mahakal Sawari 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sawan Sawari 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain Mahakal]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain News]]></category>
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					<description><![CDATA[Ujjain: श्रावण की अंतिम सवारी आज, चार दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल; शिप्रा में होगा जलाभिषेक Ujjain, : मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्रावण मास की अंतिम और ... <a title="Ujjain: श्रावण की अंतिम सवारी आज, चार दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल; शिप्रा में होगा जलाभिषेक" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ujjain-mahakal-sawari-24-august-2026/" aria-label="Read more about Ujjain: श्रावण की अंतिम सवारी आज, चार दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल; शिप्रा में होगा जलाभिषेक">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ujjain: श्रावण की अंतिम सवारी आज, चार दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल; शिप्रा में होगा जलाभिषेक</strong></h1>
<p><strong>Ujjain, :</strong> मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्रावण मास की अंतिम और चौथी सवारी सोमवार, 24 अगस्त को पूरे धार्मिक उत्साह और राजसी परंपरा के साथ निकलेगी। भगवान महाकालेश्वर की इस भव्य सवारी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। इस बार बाबा महाकाल एक साथ <strong>चार दिव्य स्वरूपों</strong> में भक्तों को दर्शन देंगे। सवारी के दौरान पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव और नंदी रथ पर श्री उमा-महेश विराजमान रहेंगे।</p>
<p>श्रावण मास में निकलने वाली महाकाल की सवारियों का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सवारी के माध्यम से भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलकर अपनी प्रजा का हाल जानते हैं और भक्तों को दर्शन देकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। अंतिम सवारी में भगवान के चार स्वरूपों का एक साथ दर्शन होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।</p>
<h2><strong>चार स्वरूपों में देंगे दर्शन</strong></h2>
<p>श्रावण की अंतिम सवारी में बाबा महाकाल के चार स्वरूप अलग-अलग वाहनों पर नगर भ्रमण करेंगे। पालकी में <strong>श्री चंद्रमौलेश्वर</strong>, हाथी पर <strong>श्री मनमहेश</strong>, गरुड़ रथ पर <strong>श्री शिवतांडव</strong> और नंदी रथ पर <strong>श्री उमा-महेश</strong> विराजमान रहेंगे।</p>
<p>परंपरा के अनुसार श्रावण की प्रत्येक सवारी के साथ भगवान के स्वरूपों की संख्या और भव्यता बढ़ती जाती है। अंतिम सवारी में चार स्वरूपों का समावेश इस धार्मिक आयोजन को और खास बना रहा है। सवारी के दौरान मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।</p>
<h3><strong>शाम चार बजे मंदिर से निकलेगी सवारी</strong></h3>
<p>सवारी की तैयारियां दोपहर से ही शुरू हो जाएंगी। दोपहर <strong>3:30 बजे महाकाल मंदिर के सभामंडप में श्री चंद्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन</strong> किया जाएगा। मंदिर के मुख्य पुजारी और जनप्रतिनिधि पूजा में शामिल होंगे।</p>
<p>इसके बाद शाम <strong>4 बजे बाबा महाकाल की पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचेगी</strong>। यहां सशस्त्र पुलिस बल की ओर से राजाधिराज भगवान महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना होगी।</p>
<p>सवारी को लेकर शहर के प्रमुख मार्गों को सजाया गया है। श्रद्धालु रास्तेभर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मौजूद रहेंगे। कई स्थानों पर भक्तों की ओर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी।</p>
<h4><strong>इन प्रमुख मार्गों से गुजरेगी सवारी</strong></h4>
<p>Ujjain मंदिर से निकलने के बाद बाबा महाकाल की सवारी <strong>महाकाल चौक, गुदरी चौराहा, बक्शी बाजार और कहारवाड़ी</strong> होते हुए रामघाट पहुंचेगी। सवारी मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़ रहने की संभावना है।</p>
<p>बाबा के नगर भ्रमण के दौरान जयकारों और भजनों से उज्जैन की गलियां गूंजेंगी। श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए सड़क के दोनों ओर और आसपास की इमारतों से दर्शन करेंगे।</p>
<h4><strong>रामघाट पर शिप्रा जल से होगा अभिषेक</strong></h4>
<p>सवारी का एक प्रमुख धार्मिक पड़ाव रामघाट रहेगा। पवित्र शिप्रा नदी के तट पर पहुंचने के बाद भगवान महाकाल का <strong>शिप्रा जल से जलाभिषेक</strong> किया जाएगा। इसके बाद बाबा की भव्य आरती होगी।</p>
<p>रामघाट पर होने वाला जलाभिषेक और आरती सवारी के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहेंगे और भगवान महाकाल के जयकारों से पूरा घाट भक्तिमय हो उठेगा।</p>
<h5><strong>गोपाल मंदिर में होगा हरिहर मिलन</strong></h5>
<p>रामघाट से पूजन और आरती के बाद सवारी आगे बढ़ेगी। बाबा महाकाल की सवारी <strong>रामानंद आश्रम, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा और छत्री चौक</strong> होते हुए प्रसिद्ध गोपाल मंदिर पहुंचेगी।</p>
<p>गोपाल मंदिर में <strong>हरिहर मिलन</strong> की परंपरा निभाई जाएगी। यह आयोजन शैव और वैष्णव परंपराओं के धार्मिक समन्वय का प्रतीक माना जाता है। यहां भगवान महाकाल और भगवान विष्णु के स्वरूपों के मिलन की परंपरा के माध्यम से दोनों परंपराओं के बीच एकता और सद्भाव का संदेश दिया जाता है।</p>
<p>हरिहर मिलन के बाद सवारी अपने निर्धारित मार्ग से वापस मंदिर की ओर रवाना होगी।</p>
<h6><strong>शाम 7:30 बजे मंदिर पहुंचेगी सवारी</strong></h6>
<p>Ujjain गोपाल मंदिर में धार्मिक परंपराएं पूरी होने के बाद सवारी <strong>पटनी बाजार</strong> से होते हुए वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी। सवारी के लगभग <strong>शाम 7:30 बजे मंदिर पहुंचने</strong> की संभावना है। मंदिर पहुंचने के बाद आरती के साथ इस भव्य धार्मिक यात्रा का समापन होगा।</p>
<p>श्रावण की अंतिम सवारी होने के कारण उज्जैन में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह है। बाबा महाकाल के चार दिव्य स्वरूपों के दर्शन, शिप्रा जल से अभिषेक, रामघाट की आरती और गोपाल मंदिर में हरिहर मिलन इस आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहे हैं।</p>
<pre><strong>श्रद्धालुओं में उत्साह, शहर में भक्तिमय माहौल</strong></pre>
<p>अंतिम सवारी को लेकर Ujjain में सुबह से ही भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। बाबा महाकाल के दर्शन और सवारी में शामिल होने के लिए भक्त उत्साहित हैं।</p>
<p>श्रावण मास की अंतिम सवारी के साथ इस वर्ष की श्रावण सवारी परंपरा का समापन होगा। भगवान महाकाल के चार स्वरूपों का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी रहने की उम्मीद है। सवारी के पूरे मार्ग में धार्मिक जयकारों, भजनों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच उज्जैन नगरी बाबा महाकाल की भक्ति में डूबी नजर आएगी।</p>
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