अमेरिका से नाराज कनाडा ने थामा भारत का हाथ: पीएम मार्क कार्नी बोले – “नई साझेदारी बन रही है”
दुनिया की बदलती राजनीतिक हवाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कनाडा ने हाल ही में यह संकेत दिया है कि वह अब अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करेगा और भारत जैसे उभरते साझेदार देशों के साथ नए रिश्ते स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का ताजा बयान इसी रणनीतिक दिशा का स्पष्ट संकेत है।
अमेरिका-कनाडा रिश्तों में बढ़ता तनाव
अमेरिका और कनाडा के बीच पिछले कुछ महीनों से टैरिफ और व्यापार समझौतों को लेकर तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा के साथ सभी ट्रेड नेगोशिएशन को खत्म करने की घोषणा ने इन संबंधों में दरार गहरी कर दी है। ट्रंप ने कनाडा पर “गैर-न्यायसंगत व्यवहार” का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने व्यापारिक हितों की कीमत पर अब कनाडा की आर्थिक नीतियों को स्वीकार नहीं करेंगे।
इस बयान के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ओंटारियो सरकार द्वारा जारी ‘एंटी-टैरिफ एड’ का उद्देश्य विवाद बढ़ाना नहीं था। ट्रंप से व्यक्तिगत बातचीत में उन्होंने खेद प्रकट किया और स्पष्ट किया कि कनाडा का इरादा अमेरिका के साथ बने रिश्तों को नकारना नहीं बल्कि अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करना है।
APEC सम्मेलन के बाद कार्नी का संदेश
एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) समिट के समापन के बाद मीडिया से बातचीत में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश तेजी से नई साझेदारियां बना रहा है। उन्होंने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र को वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे तेज़ी से विकसित होता इलाका बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र पूरी दुनिया के GDP का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रखता है, और भारत इस क्षेत्र का सबसे अहम साझेदार बनकर उभर रहा है।
कार्नी ने कहा, “कनाडा अब एक नई दिशा में बढ़ रहा है। हम अमेरिका पर निर्भरता घटाकर भारत जैसे तेजी से उभरते बाजारों के साथ गठजोड़ कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि आने वाले दशक में भारत को व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदार बनाया जाए।”
भारत-कनाडा रिश्तों में नई ऊर्जा
भारत और कनाडा के बीच हाल के महीनों में राजनयिक बातचीत तेज हुई है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम कार्नी की सीधी मुलाकात अभी नहीं हुई है, लेकिन विदेश मंत्रियों और उच्च स्तरीय अधिकारियों के बीच कई राउंड की बैठकें हो चुकी हैं।
कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने हाल ही में भारत का दौरा किया था और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस यात्रा में दोनों देशों के बीच “न्यू ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट रोडमैप” को तैयार किया गया, जिसमें ऊर्जा सहयोग, नवीकरणीय संसाधन, क्रिटिकल मिनरल्स, शिक्षा और डिजिटल सेक्टर पर फोकस किया गया है।
2023 में खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच जो तनाव पैदा हुआ था, अब धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है। इस रोडमैप को उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है जिससे भारत-कनाडा के रिश्ते फिर से मजबूत हो सकें।
कनाडा की रणनीतिक आर्थिक दिशा
प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा का लक्ष्य अब एक “विविधीकृत अर्थव्यवस्था” बनाना है। उनका कहना था कि अमेरिकी टैरिफ नीतियों का असर उनकी घरेलू उद्योगों पर गिर रहा है, इसलिए कनाडा को एशियाई बाजारों में प्रवेश करना आवश्यक हो गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कनाडा ने हाल ही में इंडोनेशिया के साथ “फ्री ट्रेड एग्रीमेंट” साइन किया है, जबकि फिलीपींस और थाईलैंड के साथ वार्ता जारी है। चीन के साथ भी संबंधों में अब “टर्निंग पॉइंट” आ चुका है। ये सभी कदम दिखाते हैं कि कनाडा एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में खुद को नए सिरे से स्थापित करना चाहता है।
भारत—नए दौर की रणनीतिक साझेदारी
भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसकी आर्थिक प्रगति ने वैश्विक मंच पर नई संभावनाओं को जन्म दिया है। ऊर्जा सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, और सेमीकंडक्टर आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में भारत वैश्विक साझेदारी का केंद्र बनता जा रहा है। कनाडा भी इस प्रवृत्ति में अवसर देख रहा है।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के साथ साझेदारी सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक है। दोनों लोकतांत्रिक देश ऐसे समय में एक साथ आ रहे हैं जब वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला को संतुलन की आवश्यकता है। हमें विश्वास है कि भारत के साथ संबंधों को नया आयाम मिलेगा।”
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूती दी है। चाहे जी20 का सफल आयोजन रहा हो या भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की पहल, भारत ने खुद को वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है।
कनाडा की कोशिशों और मोदी सरकार की राजनीति में समानता यह है कि दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करना चाहते हैं। यह साझा दृष्टिकोण दोनों देशों के सहयोग को और गहराई तक ले जा सकता है।
व्यापार, ऊर्जा और शिक्षा के नए अवसर
भारतीय बाजार कनाडा के लिए विशाल अवसर प्रस्तुत करता है। क्रिटिकल मिनरल्स — जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकल — के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति दे सकता है।
साथ ही, कृषि, शिक्षा, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इनोवेशन के क्षेत्रों में भी कनाडा-भारत मिलकर काम कर सकते हैं। कनाडा के विश्वविद्यालय पहले से ही भारत के छात्रों के लिए लोकप्रिय हैं। आने वाले वर्षों में शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान में साझेदारी बड़े पैमाने पर बढ़ने की संभावना है।
अमेरिका पर निर्भरता घटाना – जरूरत या रणनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा की यह नीति केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि आर्थिक विवशता से जुड़ी है। अमेरिका की टैरिफ पॉलिसीज ने कनाडाई उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा।
इस स्थिति में भारत जैसी तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ना कनाडा के लिए न सिर्फ एक विकल्प बल्कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का ताजा बयान यह स्पष्ट संकेत देता है कि कनाडा अब अमेरिका की छाया से बाहर निकलना चाहता है। भारत के साथ गहराते संबंध भविष्य की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई दिशा तय कर सकते हैं।
भारत अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में एक निर्णायक शक्ति बन चुका है और कनाडा की यह नई कूटनीतिक पहल दोनों देशों के लिए अवसरों का विस्तार करने की दिशा में अहम कदम है। आने वाले वर्षों में यदि यह साझेदारी व्यापार, निवेश, और तकनीकी सहयोग के ठोस परिणाम देती है, तो यह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक स्थायी बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।
