कैबिनेट की बड़ी सौगात: सभी 413 नगरीय निकायों में बनेगा गीता भवन, जिनके पास ज़मीन नहीं उन्हें मिलेगी भूमि मात्र ₹1 में
राज्य सरकार ने प्रदेशवासियों के लिए एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए कैबिनेट ने गीता भवन निर्माण परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत कुल 413 नगरीय निकायों में गीता भवन बनाए जाएंगे।
जहाँ नगरपालिकाओं और नगर निगमों के पास ज़मीन उपलब्ध है, वहाँ जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। वहीं जिन निकायों के पास भूमि नहीं है, उन्हें सरकार प्रतीकात्मक रूप से मात्र ₹1 में ज़मीन उपलब्ध कराएगी।
क्या है इस योजना की खासियत?
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गीता भवन का निर्माण PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर होगा।
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भवन को सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
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यहाँ बड़ा बहुउद्देश्यीय हॉल, पुस्तकालय, और ई-लायब्रेरी की सुविधा होगी।
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छात्र अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ बेहतर माहौल पा सकेंगे।
निर्माण की चरणबद्ध योजना
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भूमि सर्वे और आवंटन — सभी नगर निगम/नगरपालिकाओं से जमीन की सूची मांगी गई है।
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जिन निकायों के पास भूमि नहीं — वहाँ शासन मात्र ₹1 में जमीन आवंटित करेगा।
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डिज़ाइन और टेंडर प्रक्रिया — मानक आर्किटेक्चरल डिजाइन तैयार कर निविदा आमंत्रित की जाएगी।
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निर्माण कार्य — प्रत्येक साइट पर 8 से 18 महीने में भवन तैयार करने का लक्ष्य।
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समाप्ति लक्ष्य — सभी 413 गीता भवन अगले पाँच सालों में पूरे होंगे।
युवाओं और समाज को मिलेगा लाभ
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स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को मंच मिलेगा।
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छात्रों के लिए पुस्तकालय और ई-लायब्रेरी से पढ़ाई आसान होगी।
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रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
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निजी साझेदारी से सरकारी खर्च पर संतुलन रहेगा।
चुनौतियाँ भी होंगी
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भूमि स्वामित्व और कानूनी प्रक्रिया में समय लग सकता है।
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PPP मोड में पारदर्शिता और संचालन की स्थिरता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी।
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हर नगरीय निकाय की भिन्न-भिन्न आवश्यकताओं का ध्यान रखना पड़ेगा।

