सारंगपुर में ब्रह्माकुमारीज ने मनाया सामूहिक अलौकिक रक्षाबंधन महोत्सव, गणमान्य नागरिकों ने की सहभागिता
मधु दीदी बोलीं- विकारों और बुराइयों से मुक्ति का अनोखा बंधन है रक्षाबंधन; अतिथियों को ईश्वरीय सौगात देकर किया सम्मानित, व्यसन मुक्ति और नारी सशक्तिकरण का दिया संदेश
कार्यक्रम में राजगढ़ से पहुंचीं जिले की प्रभारी ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य को अपने भीतर मौजूद बुराइयों और विकारों से मुक्त होने की प्रेरणा भी देता है।
आयोजन में नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रतिनिधि नीलेश वर्मा, लायंस क्लब के को-ऑर्डिनेटर लायंस डिस्ट्रिक्ट महेश शर्मा, वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष ओ.पी. विजयवर्गीय, कथा प्रवक्ता पंडित अम्बाराम राजगुरु और ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी सहित अनेक अतिथि मौजूद रहे।
काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से मुक्ति का दिया संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य कई तरह के विकारों और नकारात्मक प्रवृत्तियों से प्रभावित हो रहा है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार व्यक्ति के विचार और कर्म दोनों को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति इन विकारों के प्रभाव में आता है तो कई बार उसके द्वारा ऐसे कार्य हो जाते हैं, जो स्वयं उसके और समाज दोनों के लिए नुकसानदायक होते हैं। आध्यात्मिक जीवन और परमात्मा से जुड़ाव मनुष्य को इन नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त होने की दिशा देता है।
मधु दीदी ने रक्षा सूत्र को आध्यात्मिक संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि परमात्मा का रक्षा सूत्र ऐसा बंधन है, जो मनुष्य को विकारों से मुक्त होने की प्रेरणा देकर आत्मा को उज्ज्वल बनाने का संदेश देता है।
नारी शक्ति समाज को दे सकती है सकारात्मक दिशा
अपने संबोधन में मधु दीदी ने नारी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नारी के भीतर त्याग, शक्ति, धैर्य, करुणा और नेतृत्व जैसे अनेक गुण मौजूद हैं। इन गुणों को सकारात्मक दिशा देकर महिलाएं समाज में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं से ऐसी ‘शिवशक्ति’ बनने का आह्वान किया, जो अपने परिवार के साथ पूरे समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करे। नारी सशक्तिकरण को केवल अधिकारों तक सीमित न रखते हुए संस्कार, आत्मबल और आध्यात्मिक शक्ति से भी जोड़ने की बात कही गई।
बहन-बेटियों की सुरक्षा और सम्मान जरूरी: विजयवर्गीय
वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष ओ.पी. विजयवर्गीय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज में बहन-बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा समाज में व्यसन मुक्ति को लेकर किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। विजयवर्गीय ने कहा कि नशा और दूसरी बुरी आदतें व्यक्ति के साथ उसके परिवार को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे में लोगों को व्यसनों से दूर करने के लिए जागरूकता बेहद आवश्यक है।
ब्रह्माकुमारीज के सामाजिक प्रयासों की सराहना

लायंस क्लब से जुड़े महेश शर्मा ने अपने संबोधन में ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में संस्था द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अन्य अतिथियों ने भी ब्रह्माकुमारी संस्था की सेवाओं को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए अपनी शुभकामनाएं दीं।
जटायु के प्रसंग से समझाया रक्षा का वास्तविक अर्थ
कथा प्रवक्ता पंडित अम्बाराम राजगुरु ने धार्मिक दृष्टांत के माध्यम से रक्षाबंधन के महत्व को समझाया। उन्होंने रामायण के गीधराज जटायु का उदाहरण देते हुए कहा कि जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह नहीं की और अपने कर्तव्य का निर्वहन किया।
उन्होंने कहा कि रक्षा का अर्थ केवल रक्षा सूत्र बांधने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आवश्यकता के समय किसी की सुरक्षा और सहायता के लिए खड़े होना भी इसका महत्वपूर्ण संदेश है।
पंडित राजगुरु ने ब्रह्माकुमारी बहनों की त्याग और तपस्या की सराहना करते हुए कहा कि संस्था से जुड़ी बहनें लोगों को सकारात्मक और उत्कृष्ट चिंतन की दिशा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
‘ओम शांति’ के आध्यात्मिक संदेश पर रखे विचार
नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रतिनिधि नीलेश वर्मा ने अपने संबोधन में ‘ओम शांति’ के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शांति का संदेश आज के तनावपूर्ण जीवन में विशेष महत्व रखता है।
वर्मा ने ब्रह्माकुमारी बहनों की त्याग, तपस्या और सेवा भावना की प्रशंसा करते हुए कहा कि आध्यात्मिक जीवन के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मक विचारों का प्रसार किया जा सकता है।
बुराइयां और विकार छोड़ने की दिलाई प्रतिज्ञा
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने उपस्थित लोगों को अपने जीवन से बुराइयों और विकारों को छोड़ने की प्रतिज्ञा कराई। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब व्यक्ति स्वयं अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प ले।
इसके बाद कार्यक्रम में शामिल भाई-बहनों को ईश्वरीय संदेश दिया गया और रक्षा सूत्र बांधा गया। अतिथियों को ईश्वरीय सौगात प्रदान कर सम्मानित भी किया गया। भाग्यलक्ष्मी दीदी ने सभी अतिथियों और उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कुमकुम की नृत्य प्रस्तुति ने मोहा मन
आध्यात्मिक संदेशों के साथ कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी हुई। कु. कुमकुम ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुति की अतिथियों और कार्यक्रम में मौजूद नागरिकों ने सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार नीरज भाई ने किया। आयोजन में सारंगपुर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
सामाजिक संगठनों और वरिष्ठ नागरिकों की रही मौजूदगी
सामूहिक अलौकिक रक्षाबंधन महोत्सव में पेंशनर संघ के सदस्य, पर्यावरण प्रेमी, महादेव मित्र मंडल के सदस्य, समाजसेवी, पत्रकार, पार्षद, वरिष्ठ नागरिक और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए महिला-पुरुष शामिल हुए।
कार्यक्रम के समापन पर सभी को आध्यात्मिकता, भाईचारा, नारी सम्मान, व्यसन मुक्ति और जीवन से नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करने का संदेश दिया गया। ब्रह्माकुमारीज ने रक्षाबंधन को सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए लोगों से सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
