नहीं रहे बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र, 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
मुंबई, 11 नवंबर 2025:
हिंदी सिनेमा जगत से आज एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता, सदाबहार हीरो और “ही-मैन” के नाम से प्रसिद्ध धर्मेंद्र का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सोमवार सुबह मुंबई के Breach Candy Hospital में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से वे उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है।
अस्पताल में भर्ती और निधन की पुष्टि
सूत्रों के अनुसार धर्मेंद्र को 31 अक्टूबर 2025 को सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी की शिकायत के बाद Breach Candy Hospital में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। हालांकि कुछ दिन पहले उनकी हालत में सुधार की खबरें आई थीं, लेकिन 11 नवंबर की सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ली।
परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया है —
“धर्मेंद्रजी हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने शांति से अंतिम सांस ली। इस कठिन समय में हम सब से निवेदन करते हैं कि परिवार की निजता का सम्मान करें।”
पत्नी हेमा मालिनी, बेटे सनी देओल और बॉबी देओल, बेटियाँ ईशा और अहाना देओल सहित पूरा परिवार इस समय शोक में है।
पंजाब से मुंबई तक का सफर
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना ज़िले के नसराली गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे फिल्मों के दीवाने थे। फिल्मों में आने का सपना लेकर वे 1950 के दशक के अंत में मुंबई पहुंचे।
1958 में फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट जीतने के बाद धर्मेंद्र को पहला मौका मिला। उन्होंने 1960 में ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
छह दशकों का शानदार करियर
धर्मेंद्र ने अपने 60 साल लंबे फिल्मी करियर में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। 1960 और 1970 का दशक उनके करियर का स्वर्णिम काल रहा।
उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं:
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शोले (1975) — वीरू का किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में अमर है।
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फूल और पत्थर (1966) — जिसने उन्हें स्टारडम की ऊँचाइयों पर पहुंचाया।
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मेरा गाँव मेरा देश (1971)
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चुपके चुपके (1975)
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आया सावन झूम के (1969)
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शानदार (1978)
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सत्यकाम (1969) — जिसमें उन्होंने गहरी संवेदनाओं को बखूबी निभाया।
धर्मेंद्र की फिल्मों में एक्शन, रोमांस और कॉमेडी — तीनों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता था।
“ही-मैन” की उपाधि और लोकप्रियता
धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा का “ही-मैन” कहा जाता था। उस दौर में जब एक्शन फिल्मों की शुरुआत हो रही थी, धर्मेंद्र ने अपने दमदार शरीर और करिश्माई व्यक्तित्व से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई।
वे सिर्फ एक एक्शन हीरो नहीं थे, बल्कि रोमांटिक और संवेदनशील किरदारों में भी उतने ही सहज थे।
उनकी आंखों की मासूमियत, चेहरे का आत्मविश्वास और संवादों की सादगी ने उन्हें हर वर्ग का चहेता बनाया।
परिवार और निजी जीवन
धर्मेंद्र ने दो शादियाँ कीं — पहली पत्नी प्रकाश कौर और दूसरी अभिनेत्री हेमा मालिनी हैं।
उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता हैं, जबकि बेटियाँ ईशा और अहाना भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी रही हैं।
धर्मेंद्र हमेशा अपने परिवार के प्रति बेहद भावुक और जिम्मेदार रहे। कई इंटरव्यूज़ में उन्होंने कहा था —
“मेरे लिए परिवार ही सबसे बड़ी फिल्म है, जिसमें मैं हर दिन नया सीन जीता हूँ।”
अंतिम दिनों की स्थिति
पिछले कुछ वर्षों से धर्मेंद्र उम्रजनित बीमारियों से जूझ रहे थे। मई 2022 में उन्हें पीठ दर्द और थकान के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
2025 में हालत फिर बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, हालांकि परिवार ने तब अफवाहों को खारिज किया था।
अंतिम दिनों में वे अधिकतर समय घर पर ही रहते थे, जहां उनकी पत्नी और बच्चे उनकी देखभाल करते थे।
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म “इक्कीस” (Ikkees) थी, जो 25 दिसंबर 2025 को रिलीज़ होने वाली थी।
यह फिल्म भारतीय वायुसेना की पृष्ठभूमि पर आधारित थी, जिसमें धर्मेंद्र ने एक वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका निभाई थी।
उनका अभिनय देखकर निर्देशक राजकुमार संतोषी ने कहा था —
“धर्मेंद्र साहब सेट पर आते थे तो ऊर्जा अपने आप बढ़ जाती थी। उनकी मुस्कान ही सबका मन जीत लेती थी।”
फिल्मी विरासत और योगदान
धर्मेंद्र केवल अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक जीवंत संस्था थे। उन्होंने भारतीय सिनेमा को नए आयाम दिए।
उन्होंने 1970 के दशक में एक्शन हीरो की परिभाषा बदल दी और साबित किया कि एक अभिनेता मसल्स के साथ भावनाओं का भी राजा हो सकता है।
उन्होंने पंजाबी सिनेमा को भी समृद्ध किया — “कंकण दे ओले”, “दोस्त” और “तलाशी” जैसी फिल्मों के ज़रिए।
धर्मेंद्र को 1997 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया, जबकि 2012 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा।
फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर
धर्मेंद्र के निधन के बाद पूरे बॉलीवुड में गहरा शोक व्याप्त है।
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अमिताभ बच्चन ने लिखा — “वीरू चला गया… एक युग खत्म हुआ।”
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सनी देओल ने सोशल मीडिया पर लिखा — “पापा… आपने हमें जीने का असली मतलब सिखाया।”
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हेमा मालिनी ने कहा — “मेरे जीवन का सबसे सुंदर अध्याय अब समाप्त हो गया।”
फैंस सोशल मीडिया पर लगातार श्रद्धांजलि दे रहे हैं। #RIPDharmendra और #LegendForever ट्रेंड कर रहे हैं।
धर्मेंद्र – एक युग का अंत
धर्मेंद्र सिर्फ फिल्मों में नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसते थे।
उनकी सादगी, नम्रता और ज़मीन से जुड़े रहने की आदत ने उन्हें एक “जनता का हीरो” बनाया।
उनके जाने से हिंदी सिनेमा का एक पूरा अध्याय समाप्त हो गया — वह दौर, जब हीरो मेहनती, ईमानदार और दिल से जुड़ा होता था।
उनकी विरासत हमेशा जिंदा रहेगी
धर्मेंद्र ने कभी खुद को सुपरस्टार नहीं कहा, वे खुद को हमेशा “किसान का बेटा” बताते रहे।
उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय, करुणा और मेहनत का पाठ हैं।
उनका जीवन एक प्रेरणा है कि कैसे साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर कोई व्यक्ति मेहनत और जुनून के बल पर अमर हो सकता है।
श्रद्धांजलि 🙏:
“धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका मुस्कुराता चेहरा, उनकी आवाज़, उनका जोश — हमेशा भारतीय सिनेमा की रीलों में जीवित रहेगा।”
