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मजदूरों के अधिकार की बड़ी लड़ाई: भारतीय मजदूर संघ मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक ज्ञापन आंदोलन

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Published On: 21 April 2026
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भारतीय मजदूर संघ मध्य प्रदेश ज्ञापन आंदोलन के तहत नागदा-खाचरोद के श्रमिकों ने उज्जैन में रैली निकालकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा और न्यूनतम वेतन सहित कई अहम मांगें रखीं।

भारतीय मजदूर संघ मध्य प्रदेश ज्ञापन: श्रमिकों की आवाज बनी बड़ी रैली

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भारतीय मजदूर संघ मध्य प्रदेश ज्ञापन के तहत 21 अप्रैल को पूरे प्रदेश में एक व्यापक आंदोलन देखने को मिला। इसी कड़ी में जिला नागदा द्वारा भी श्रमिकों ने संगठित होकर उज्जैन पहुंचकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। यह आयोजन न केवल मजदूरों के अधिकारों के लिए था, बल्कि यह उनके भविष्य की सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारतीय मजदूर संघ मध्य प्रदेश ज्ञापन की पृष्ठभूमि

भारतीय मजदूर संघ द्वारा प्रदेशभर में यह आह्वान किया गया कि श्रमिकों की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाया जाए।प्रदेश के विभिन्न जिलों में कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। यह कदम मजदूरों के बढ़ते शोषण, असुरक्षा और आर्थिक असमानता के खिलाफ एक संगठित प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया।

नागदा-खाचरोद से उज्जैन तक श्रमिकों का प्रदर्शन

जिला नागदा द्वारा इस आंदोलन को मजबूती देते हुए नागदा-खाचरोद क्षेत्र से नगर पालिका कर्मचारियों और विभिन्न उद्योगों के ठेका श्रमिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।श्रमिक ट्रेन एवं निजी साधनों से उज्जैन पहुंचे, जो इस आंदोलन की व्यापकता और गंभीरता को दर्शाता है।

रैली और ज्ञापन कार्यक्रम का विवरण

उज्जैन में श्रमिकों ने फ्रीगंज टावर से रैली प्रारंभ की और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचे।इसके बाद कोठी परिसर में कलेक्टर महोदय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। यह रैली अनुशासित और शांतिपूर्ण रही, लेकिन इसमें शामिल मजदूरों का उत्साह और एकजुटता साफ नजर आई।

प्रमुख मांगें क्या रहीं

न्यूनतम वेतन लागू किया जाए

केंद्र सरकार द्वारा जारी न्यूनतम वेतन को प्रदेश में लागू करने की मांग प्रमुख रही।

आउटसोर्स और ठेका श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा

श्रमिकों ने मांग की कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को सभी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं दी जाएं।

ठेका श्रमिकों की छंटनी पर रोक

उद्योगों में हो रही लगातार छंटनी पर रोक लगाने की मांग उठाई गई।

स्थानीय युवाओं को रोजगार

नगर के उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की गई।

अस्थायी कर्मचारियों का स्थायीकरण

नगर पालिका में कार्यरत अस्थायी श्रमिकों को स्थायी करने की मांग रखी गई।

समय पर वेतन भुगतान

हर माह 7 तारीख से पहले वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल रही।

उपस्थित पदाधिकारी और श्रमिक

ज्ञापन देने के दौरान कई प्रमुख पदाधिकारी एवं श्रमिक उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • करण सिंह शेखावत (जिला मंत्री)
  • मोहब्बत सिंह राठौड़
  • राजकुमार सिसोदिया
  • महेश नायर
  • बालकिशन धौलपुरे
  • महेश दावरे
  • शिव सिंह रघुवंशी
  • भूपेंद्र सिंह सिकरवार
  • प्रवेश तिवारी
  • जितेंद्र सिंह नरूका
  • रमेश परमार
  • अर्जुन सेन

इसके अलावा बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक एवं आउटसोर्स कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

मजदूरों की समस्याओं का विश्लेषण

आज के समय में श्रमिकों के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं:

  • अस्थिर रोजगार
  • कम वेतन
  • सामाजिक सुरक्षा का अभाव
  • ठेका प्रथा का बढ़ता दायरा

यह आंदोलन इन सभी मुद्दों को एक मंच पर लाने का प्रयास था।

सरकार से अपेक्षाएं

श्रमिकों को उम्मीद है कि मोहान यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।अधिक जानकारी के लिए देखें:

  • Ministry of Labour and Employment India
  • Government of Madhya Pradesh

निष्कर्ष

भारतीय मजदूर संघ मध्य प्रदेश ज्ञापन आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि श्रमिक अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं और संगठित होकर आवाज उठाने लगे हैं।यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है, तो यह न केवल श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देगा।

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