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बिहार में बड़ा राजनीतिक बदलाव? बेटे निशांत की एंट्री से नीतीश–बीजेपी समीकरण बदलने के संकेत

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Published On: 9 December 2025
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क्या नीतीश कुमार के बेटे निशांत बनेंगे बिहार के डिप्टी सीएम?

बिहार की सियासत में नई करवट — क्या बीजेपी के साथ मिलकर हो रही ग्रैंड एंट्री की तैयारी?

Bihar Politics: बिहार की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब भविष्य की राजनीति को लेकर गंभीर विचार कर रहे हैं और संभव है कि अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में बड़ा रोल देने की तैयारी में हैं। क्या यह सच है? क्या निशांत को सीधे डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है? और क्या बीजेपी भी इस प्लान का हिस्सा हो सकती है? आइए पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं।

निशांत कुमार—अब क्यों बढ़ गई है चर्चा?

यह चर्चा तब तेज हुई जब जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने एक बयान दिया। पटना एयरपोर्ट पर निशांत के साथ नजर आए संजय झा ने कहा कि—

“जेडीयू के हर नेता और कार्यकर्ता की इच्छा है कि निशांत अब राजनीति में आ जाएं। फैसला उन्हें ही लेना है।”

उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी।
दिलचस्प बात यह है कि निशांत किस काम से दिल्ली गए थे, यह साफ नहीं है। लेकिन संयोगवश दोनों एक ही फ्लाइट से पटना लौटे और वहां मीडिया ने बयान पूछ लिए—और बस, चर्चा फिर गर्म हो गई।

जनवरी से ही सुर्खियों में हैं निशांत

साल 2024 के जनवरी महीने में पहली बार लोगों ने निशांत कुमार को खुलकर राजनीतिक बयान देते सुना था।
अपने गांव कल्याण बिगहा के एक पारिवारिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था:

  • “मेरे पिता ने बिहार के लिए बहुत काम किया है।”
  • “बिहार के विकास के लिए नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बने रहना जरूरी है।”

इसके बाद भी समय-समय पर वे अपने पिता की नीतियों और विकास एजेंडे का समर्थन करते नजर आए।
जब यह खबर उड़ी कि BJP इस बार नीतीश को CM नहीं बनने देगी, तब निशांत ने यह भी कहा था कि—

“एनडीए पर पूरा भरोसा है, उन्हें नीतीश कुमार को ही अगले मुख्यमंत्री के रूप में घोषित कर देना चाहिए।”

यानी पॉलिटिकल स्किल और पब्लिक अप्रोच – दोनों की झलक लोगों को मिल चुकी है।

क्या सचमुच निशांत की ‘लांचिंग’ की तैयारी?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि निशांत की एंट्री अब सिर्फ समय की बात है।
इस बार चर्चाओं को मजबूती इसलिए मिली क्योंकि:

  • संजय झा जैसे वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया।
  • एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमित शाह ने भी जेडीयू के दो नेताओं से ‘नीतीश कुमार के एग्जिट प्लान’ पर चर्चा की।

रिपोर्ट में कहा गया कि अमित शाह ने संजय झा और ललन सिंह से पूछा था कि—

  • क्या नीतीश अब सक्रिय राजनीति से हटने का विचार कर रहे हैं?
  • क्या पार्टी भविष्य की रणनीति पर काम कर रही है?

हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस चर्चा ने और आग लगा दी।

अगर जहाज बदलेगा—तो कप्तान कौन होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि निशांत राजनीति में आएंगे तो उनकी भूमिका क्या होगी?

संभावनाएँ क्या हैं?

  • उन्हें जेडीयू संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
  • या फिर सीधे सरकार में एंट्री दिलाई जा सकती है—जैसे मंत्री पद या डिप्टी सीएम

लेकिन दोनों ही स्थितियों में अंतिम फैसला नीतीश कुमार को करना होगा। और वे इस विषय पर अभी तक पूरी तरह चुप हैं।

क्या नीतीश परिवारवाद की राह अपनाएंगे?

नीतीश कुमार हमेशा कहते आए हैं कि—

“मैं परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ हूँ।”

वे इस मुद्दे पर कई बार लालू यादव की आलोचना भी कर चुके हैं।
इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश अब खुद वही रास्ता अपनाएंगे जिसे वे गलत बताते रहे हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—

  • नीतीश जब तक खुद सक्रिय हैं, तब तक निशांत की सीधे सत्ता में एंट्री मुश्किल है।
  • लेकिन अगर रिटायरमेंट प्लान शुरू होता है, तो कहानी बदल सकती है।

लालू फैक्टर—क्या वही मॉडल दोहराएंगे नीतीश?

साल 2013–15 के बीच लालू यादव ने बेहद रणनीतिक तरीके से अपने बेटों—तेजस्वी और तेजप्रताप—की राजनीति में ग्रैंड एंट्री कराई थी।

  • तेजस्वी को डिप्टी सीएम
  • तेजप्रताप को कैबिनेट मंत्री

नीतीश को दबाव में लेकर यह राजनीतिक लांचिंग सफल साबित हुई।
अब चर्चा है कि अगर नीतीश राजनीति से धीरे-धीरे अलग होने की सोचते हैं, तो वे भी इसी मॉडल पर निशांत को आगे ला सकते हैं।

यानी क्या मॉडल हो सकता है?

  • बिहार में CM बीजेपी का,
  • और डिप्टी सीएम निशांत कुमार — जेडीयू से।

यह प्लान जेडीयू और बीजेपी दोनों के लिए राजनीतिक संतुलन भी बना सकता है।

विधान परिषद चुनाव—निशांत की संभावित एंट्री का दरवाजा?

अगले वर्ष बिहार में विधान परिषद चुनाव होने हैं।
अगर निशांत को राजनीति में लाना है, तो यही सबसे सुरक्षित रास्ता माना जा रहा है।

क्योंकि:

  • वे बिना चुनाव लड़े एमएलसी बन सकते हैं।
  • उसके बाद किसी भी समय मंत्री या डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है।

ये ठीक वैसा ही कदम होगा जैसा हाल ही में उपेंद्र कुशवाहा ने किया—
उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा को बिना किसी सदन का सदस्य बनाए मंत्री तक बनवा दिया।

बीजेपी की भूमिका—कितनी अहम?

अगर निशांत को डिप्टी सीएम बनाना है, तो बीजेपी का समर्थन जरूरी है।
अमित शाह से जुड़ी चर्चाएँ यह संकेत देती हैं कि:

  • बीजेपी बिहार में नई राजनीति,
  • नए चेहरे,
  • और नई सत्ता संरचना की संभावनाएँ तलाश रही है।

और इसमें जेडीयू की अगली पीढ़ी, यानी निशांत कुमार, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

निष्कर्ष: क्या आने वाला समय निशांत कुमार का होगा?

  • निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
  • सवाल सिर्फ यह है कि कब और किस भूमिका में?
  • अगर नीतीश कुमार रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, तो
    निशांत की सीधी एंट्री सत्ता के शीर्ष पर—यानी डिप्टी सीएम पद तक भी संभव है।
  • अगले 6–12 महीनों में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Bihar Politics News आज जिस करवट पर खड़ी है, वह आने वाले वर्षों की राजनीति तय कर सकती है।

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