Bhopal में कारतूस तस्करी का खुलासा, जांच रिपोर्ट के बाद NRAI और दो शूटरों पर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
Bhopal में कारतूसों की अवैध खरीद–फरोख्त और रिकॉर्ड में गड़बड़ी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य शूटिंग अकादमी से जुड़ी इस जांच में खुलासा हुआ है कि शूटिंग प्रतियोगिताओं के दौरान खरीदे गए कारतूसों का विधिवत रिकॉर्ड नहीं रखा गया। मामले की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ ने संज्ञान लेते हुए नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) से जुड़े दो शूटरों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है। यह मामला Bhopal रातीबड़ थाना क्षेत्र का है। हालांकि यह पूरा प्रकरण वर्ष 2024 का बताया जा रहा है, लेकिन लंबे समय से चल रही जांच के बाद अब जाकर इस पर कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार, प्रतियोगिताओं के दौरान कारतूस खरीदे गए, लेकिन उनकी अनिवार्य एंट्री न तो शस्त्र लाइसेंस में की गई और न ही अधिकृत रजिस्टर में दर्ज हुई, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद बढ़ी कार्रवाई
Bhopal पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले की जांच बीते कई महीनों से चल रही थी। जैसे ही विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आई, वैसे ही प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि NRAI से जुड़े शूटरों को नियमित रूप से कारतूस बेचे जाते रहे, लेकिन नियमानुसार उसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया। कानून के तहत किसी भी लाइसेंसी शूटर को कारतूस खरीदने, रखने या उपयोग करने के लिए शस्त्र लाइसेंस में स्पष्ट प्रविष्टि अनिवार्य होती है। इस नियम का उल्लंघन पाए जाने पर आर्म्स एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
NRAI पर गंभीर आरोप
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) को भारत में राइफल, पिस्टल और शॉटगन शूटिंग की शीर्ष संस्था माना जाता है। यह संस्था भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग संगठनों से मान्यता प्राप्त है। देश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर इसी संस्था के अंतर्गत प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। लेकिन पुलिस जांच में सामने आया है कि इसी मान्यता प्राप्त संस्था के माध्यम से शूटिंग प्रतियोगिताओं के नाम पर कारतूसों की खरीद–फरोख्त की गई, जिसकी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इससे हथियार और गोला-बारूद से जुड़े कानूनों की अनदेखी उजागर होती है।
दो शूटरों पर एफआईआर दर्ज
जांच के दौरान जिन दो शूटरों के नाम सामने आए हैं, उनमें असलम परवेज और तलैया निवासी सुलेम अली शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन दोनों शूटरों ने प्रतियोगिता के दौरान कारतूस खरीदे थे, लेकिन उनके शस्त्र लाइसेंस में इन कारतूसों की कोई एंट्री दर्ज नहीं थी। यह स्पष्ट रूप से आर्म्स एक्ट का उल्लंघन है। इसी आधार पर रातीबड़ थाना पुलिस ने दोनों शूटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
पहले ही जारी हो चुके थे नोटिस
इस पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि Bhopal जिला प्रशासन पहले ही सतर्क हो चुका था। प्रशासन की ओर से सभी लाइसेंसी शूटरों को नोटिस जारी कर निर्देश दिए गए थे कि वे एसडीएम कार्यालय में जाकर अपने शस्त्र और कारतूस की पूरी जानकारी जमा करें। इसके बावजूद कई शूटरों ने नियमों का पालन नहीं किया। प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी जब अनियमितताएं सामने आती रहीं, तो मामले की गहन जांच कराई गई। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद कानूनी कार्रवाई की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
Bhopal इस मामले के सामने आने के बाद शूटिंग अकादमियों और खेल आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कारतूसों की खरीद और उपयोग का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया, तो इससे भविष्य में गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं। कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि खेल प्रतियोगिताओं में इस्तेमाल होने वाले हथियार और कारतूस भी पूरी तरह आर्म्स एक्ट के दायरे में आते हैं, और इसमें किसी भी तरह की ढील स्वीकार्य नहीं है।
आगे की जांच जारी
फिलहाल Bhopal पुलिस यह भी जांच कर रही है कि
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कारतूसों की कुल संख्या कितनी थी
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क्या इसमें किसी अन्य शूटर या अधिकारी की भूमिका है
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और क्या यह गड़बड़ी केवल भोपाल तक सीमित थी या अन्य स्थानों पर भी हुई
जांच पूरी होने के बाद आगे और भी नाम सामने आ सकते हैं।
Bhopal प्रशासन का सख्त संदेश
इस पूरे मामले के जरिए प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि चाहे खेल संस्थान कितना ही बड़ा या मान्यता प्राप्त क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। आर्म्स एक्ट के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। Bhopal में सामने आया यह मामला आने वाले समय में शूटिंग प्रतियोगिताओं और अकादमियों के नियमों को और कड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
