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सावधानता: भोपाल मंदिर के पास शराब की दुकान पर विरोध, प्रियंक कानूनगो निरीक्षण, महिलाएं सड़क पर, प्रशासन सवालों में

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Published On: 8 February 2026
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भोपाल मंदिर के पास शराब की दुकान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रियंक कानूनगो के निरीक्षण के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे।

भोपाल मंदिर के पास शराब की दुकान: पूरा मामला

भोपाल मंदिर के पास शराब की दुकान का मुद्दा अब केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही, धार्मिक आस्था और मानव अधिकारों से जुड़ता जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राजधानी भोपाल में नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आई है।

राजधानी की पॉश कॉलोनी अरेरा कॉलोनी में स्थित आर्य समाज मंदिर के महज 100 मीटर के दायरे में शराब की दुकान संचालित हो रही है, जिस पर लंबे समय से स्थानीय नागरिक आपत्ति जता रहे थे।

अरेरा कॉलोनी का आर्य समाज मंदिर और विवाद

अरेरा कॉलोनी भोपाल की एक प्रतिष्ठित रिहायशी कॉलोनी मानी जाती है। यहां स्थित आर्य समाज मंदिर वर्षों से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के बिल्कुल पास शराब की दुकान खुलने से:

  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है

  • धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है

  • असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ रहा है

प्रियंक कानूनगो का निरीक्षण: “मैं हैरान हूं”

रविवार को मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो स्वयं मौके पर पहुंचे।

शराब की दुकान को मंदिर के बेहद पास देखकर उन्होंने कहा:

“मैं यह देखकर हैरान हूं कि भगवान से ही भगवान के होने का सबूत मांगा जा रहा है।”

उन्होंने साफ कहा कि जिला प्रशासन का जवाब हास्यास्पद है।

प्रशासन का जवाब और गजट नोटिफिकेशन विवाद

जिला प्रशासन ने मानव अधिकार आयोग को अपने जवाब में कहा था कि:

“शराब दुकान के 100 मीटर के दायरे में कोई गजट नोटिफाइड धार्मिक स्थल नहीं है।”

इसी बयान पर प्रियंक कानूनगो ने सवाल उठाए और कहा:

  • क्या मंदिर तभी मंदिर माना जाएगा जब वह गजट में हो?

  • क्या भगवान के अस्तित्व के लिए सरकारी प्रमाण जरूरी है?

महिलाओं और स्थानीय लोगों का विरोध

प्रियंक कानूनगो के पहुंचते ही बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक एकत्र हो गए।
हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाए गए:

  • “मंदिर के पास शराब बंद करो”

  • “नियमों का पालन करो”

स्थानीय निवासियों ने बताया कि:

  • कई बार शिकायत दी गई

  • लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई


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मध्य प्रदेश सरकार का नियम क्या कहता है

मध्य प्रदेश आबकारी नीति के अनुसार:

  • किसी भी मंदिर, मस्जिद, चर्च, स्कूल के
  • 100 मीटर के दायरे में शराब की दुकान नहीं खुल सकती

मानव अधिकार आयोग की भूमिका

मानव अधिकार आयोग का दायित्व है:

  • नागरिकों की सुरक्षा
  • सामाजिक न्याय
  • धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा

प्रियंक कानूनगो ने स्पष्ट संकेत दिए कि:

यह मामला केवल नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि मानव अधिकारों का उल्लंघन भी हो सकता है।

सवालों के घेरे में जिला प्रशासन

अब सबसे बड़ा सवाल:

  • प्रशासन ने पहले शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
  • गलत रिपोर्ट आयोग को क्यों भेजी गई?

यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सामाजिक और धार्मिक भावनाओं पर असर

मंदिर के पास शराब दुकान:

  • धार्मिक आस्था को ठेस
  • सामाजिक माहौल खराब
  • महिलाओं की सुरक्षा पर असर

ऐसे मामलों से समाज में असंतोष बढ़ता है।

आगे क्या हो सकता है

संभावनाएं:

  • शराब दुकान हटाने के आदेश
  • प्रशासनिक जांच
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

मानव अधिकार आयोग जल्द ही रिपोर्ट सौंप सकता है।

निष्कर्ष

भोपाल मंदिर के पास शराब की दुकान का मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा। यह:

  • कानून
  • आस्था
  • प्रशासनिक ईमानदारी
  • और मानव अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

प्रियंक कानूनगो की सख्ती के बाद उम्मीद है कि जल्द ही उचित कार्रवाई होगी।

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