Bhopal का बड़ा तालाब: NGT ने जिला प्रशासन और नगर निगम को दिया दो सप्ताह का अल्टीमेटम
Bhopal में बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), सेंट्रल जोन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने जिला प्रशासन और नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) और जलग्रहण क्षेत्र में हुए अवैध अतिक्रमणों को हटाकर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
यह आदेश 7 अक्टूबर 2025 को हुई पिछली सुनवाई और पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर आधारित है। याचिका में भोज वेटलैंड के चारों ओर हो रही अवैध गतिविधियों पर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि तालाब के संरक्षित क्षेत्र में पक्के निर्माण, रिसॉर्ट और व्यावसायिक गतिविधियाँ धड़ल्ले से चल रही हैं।
अवैध गतिविधियों की विस्तृत जानकारी
भोज वेटलैंड के भीतर कई अवैध गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं, जो वेटलैंड नियम 2010 और 2017 का उल्लंघन हैं। इनमें शामिल हैं:
- कंक्रीट प्लांट और फ्लाई ऐश ब्लॉक इकाइयाँ: वेटलैंड के भीतर स्थापित, जो पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए हानिकारक हैं।
- मिट्टी और कचरे का भराव: तालाब के प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और कचरा डंप किया जा रहा है।
- अवैध कॉलोनियाँ: बैरागढ़ कलां और लखापुर क्षेत्र में कमल लाल द्वारा बफर क्षेत्र में कॉलोनी विकसित की गई।
- पानी के बहाव में अवरोध: खजूरी सड़क के पास, एके एसोसिएट्स द्वारा रेत और मिट्टी डालकर जल प्रवाह को रोका गया।
- प्राकृतिक चट्टानों और पहाड़ियों का तोड़ना: भारत भवन के पास 50 मीटर बफर क्षेत्र में अवैध तोड़फोड़।
- निर्माण गतिविधियों के नाम: पाटीदार फार्म, बैरागढ़ कलां, भैंसा खेड़ी, भौरी, जमोनियाचीर और कोलू खेड़ी में भगवान सिंह, हरविंदर सिंह भाटिया, विष्णु खत्री, हर्ष ललवानी और कृष्णा कुमारी सिंघल के निर्माण शामिल।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वेटलैंड की प्राकृतिक स्थलाकृति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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NGT का आदेश और कार्रवाई का अल्टीमेटम
एनजीटी ने जिला प्रशासन और नगर निगम से कहा है कि वे विशिष्ट अतिक्रमणों को हटाकर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल 2026 को होगी।
- अतिक्रमण मुक्त क्षेत्र की वास्तविक स्थिति रिपोर्ट तब कोर्ट के सामने रखी जानी होगी।
- यदि प्रशासन समय पर रिपोर्ट पेश नहीं करता है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है।
विभिन्न क्षेत्रों में अतिक्रमण
NGT ने अतिक्रमण की स्थिति का विवरण भी लिया:
- बैरागढ़ कलां: सेवन ओक्स होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियाँ, तालाब के FTL के पास अवैध।
- लखापुर क्षेत्र: भोज वेटलैंड के बफर क्षेत्र में कमल लाल द्वारा अवैध कॉलोनी।
- खजूरी सड़क: पानी के बहाव में बाधा डालने के लिए रेत और मिट्टी का अवैध निर्माण।
- भारत भवन के पास: प्राकृतिक चट्टानों और पहाड़ियों को तोड़कर निर्माण।
- इंदौर-सीहोर रोड, बैरागढ़, लखापुर: विभिन्न निजी निर्माण और फार्म।
इन अतिक्रमणों को हटाने में स्थानीय लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ा।
वक्फ बोर्ड के मस्जिदों पर दावा
सुनवाई में वक्फ बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ता मोहम्मद इकराम ने कहा कि अतिक्रमण बताई गई दो मस्जिदें नवाब काल की हैं और 1962 में वक्फ अधिसूचित की जा चुकी हैं।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि:
- एनजीटी केवल पर्यावरण कानूनों के तहत सुनवाई करता है।
- जमीन के मालिकाना हक का निर्णय सिविल कोर्ट या राजस्व विभाग का कार्य है।
पर्यावरण और वेटलैंड संरक्षण का महत्व
भोज वेटलैंड भोपाल का महत्वपूर्ण जलाशय है, जो शहर के लिए:
- जल संरक्षण
- जलवायु संतुलन
- जलीय जीव-जंतु का आश्रय
- बाढ़ नियंत्रण
जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य करता है। अवैध निर्माण और मिट्टी के भराव से न केवल जल संग्रहण प्रभावित होगा, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
एनजीटी ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का फुल टैंक लेवल (FTL) अतिक्रमण और बफर क्षेत्र में निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय विरोध और प्रशासन की चुनौतियाँ
कुछ अतिक्रमण हटाने के प्रयासों में स्थानीय लोगों का भारी विरोध हुआ। नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि नौ अतिक्रमणों को हटा दिया गया है, लेकिन शेष पर कार्रवाई रोकनी पड़ी।
स्थानीय विरोध और वक्फ बोर्ड के मस्जिदों के दावे के कारण प्रशासन को संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी होगी।
भविष्य की योजना और कोर्ट के निर्देश
एनजीटी ने जिला प्रशासन और नगर निगम को निर्देश दिया है:
- दो सप्ताह में अतिक्रमण हटाएँ और रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
- अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित।
- सख्त कानूनी कार्रवाई संभव, यदि रिपोर्ट समय पर न प्रस्तुत की जाए।
एनजीटी के आदेश का पालन करना शहर के जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
Bhopal के बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) का संरक्षण अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण की निगरानी में है।
- तालाब के फुल टैंक लेवल और जलग्रहण क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
- स्थानीय विरोध और वक्फ के मस्जिदों के दावे को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी।
- एनजीटी ने दो सप्ताह का अल्टीमेटम देकर प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है।
- वेटलैंड का संरक्षण न केवल जल संग्रहण बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।
भविष्य में यदि प्रशासन और नगर निगम समय पर अतिक्रमण हटाने में सफल होते हैं, तो भोपाल का यह महत्वपूर्ण जलाशय पर्यावरणीय दृष्टि से संरक्षित और सुरक्षित रहेगा।
