Bhopal Cyber Fraud: फर्जी ट्रेडिंग ऐप से 67 वर्षीय बुजुर्ग को लगा ₹3.91 करोड़ का चूना, 1600 गुना मुनाफे का दिया था झांसा
फर्जी ब्रोकर और नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ठगों ने हड़पी जीवनभर की कमाई, साइबर पुलिस ने शुरू की जांच
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal Cyber Fraud का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को ऑनलाइन निवेश और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से सावधान रहने की जरूरत को फिर उजागर कर दिया है। यहां एक 67 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति से ठगों ने फर्जी ब्रोकर और नकली ट्रेडिंग ऐप के जरिए करीब 3.91 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
पुलिस के अनुसार, यह भोपाल में सामने आए अब तक के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में से एक माना जा रहा है। ठगों ने बुजुर्ग को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच दिया और एक फर्जी ऐप के माध्यम से उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।
1600 गुना मुनाफे का दिखाया सपना
जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने बुजुर्ग को निवेश के जरिए 1600 गुना मुनाफा मिलने का झांसा दिया। उन्होंने ऐसा माहौल तैयार किया कि पीड़ित को लगा कि उनका पैसा लगातार बढ़ रहा है।
ठगों ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप में एक बड़ा बैलेंस दिखाया, जिससे बुजुर्ग को अपने निवेश पर भरोसा होने लगा। ऐप में करीब 62.31 अरब रुपये का फर्जी बैलेंस दिखाया गया था।
इतनी बड़ी रकम देखकर पीड़ित को लगा कि उनका निवेश कई गुना बढ़ चुका है और वह आगे भी अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाकर बनाया शिकार
पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगों ने पहले बुजुर्ग के मोबाइल में एक नकली ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया।
इसके बाद ऐप पर फर्जी तरीके से निवेश, मुनाफा और खाते की जानकारी दिखाई जाती रही। ठग लगातार पीड़ित से संपर्क में रहे और उन्हें निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित करते रहे।
जब बुजुर्ग ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे और रकम की मांग शुरू कर दी।
निकासी के नाम पर वसूली जाती रही फीस
ठगों ने पैसे निकालने के लिए कई तरह के शुल्क बताए। कभी प्रोसेसिंग फीस तो कभी अनलॉक चार्ज और अन्य टैक्स के नाम पर रकम मांगी गई।
पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि शुल्क जमा करने के बाद उनकी पूरी रकम वापस मिल जाएगी। इसी झांसे में आकर बुजुर्ग ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगा दी।
लेकिन बाद में न तो फर्जी ऐप में दिख रही अरबों रुपये की रकम मिली और न ही निवेश किए गए 3.91 करोड़ रुपये वापस लौटे।
फर्जी SEBI सर्टिफिकेट दिखाकर बनाया भरोसा
ठगों ने अपनी पहचान विश्वसनीय दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी SEBI सर्टिफिकेट दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीता।
साइबर अपराधी अक्सर निवेशकों को विश्वास में लेने के लिए बड़ी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और नियामक संस्थाओं के नाम का गलत इस्तेमाल करते हैं।
साइबर सेल में मामला दर्ज, जांच जारी
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब एक करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराई है। इसके साथ ही ठगी में शामिल आरोपियों और उनके नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह अपना शिकार बनाया हो सकता है। जांच आगे बढ़ने पर और मामलों का खुलासा होने की संभावना है।
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन निवेश करते समय सावधानी बरतें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें और भारी मुनाफे के लालच में अपनी निजी जानकारी या पैसा साझा न करें।
पुलिस ने बताया कि साइबर ठग अक्सर कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं। निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी और ऐप की विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी है।
कैसे बचें फर्जी ट्रेडिंग ऐप से?
- किसी अनजान लिंक से ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें।
- निवेश से पहले कंपनी और ब्रोकर की आधिकारिक जानकारी जांचें।
- गारंटीड या बहुत ज्यादा मुनाफे के दावे से सावधान रहें।
- बैंकिंग जानकारी, OTP और निजी दस्तावेज किसी के साथ साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध निवेश योजना की जानकारी साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को दें।
निष्कर्ष
भोपाल का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल दौर में साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। फर्जी ट्रेडिंग ऐप, नकली दस्तावेज और बड़े मुनाफे का लालच देकर ठग लोगों की मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं।
ऐसे में ऑनलाइन निवेश करते समय सतर्कता और जांच बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही जीवनभर की कमाई को नुकसान पहुंचा सकती है।
