—Advertisement—

Bhopal का बावड़िया ओवर ब्रिज बना ‘भ्रष्टाचार का पुल’: ईओडब्ल्यू ने PWD के तीन अधिकारियों के खिलाफ शुरू की कार्रवाई

Author Picture
Published On: 23 February 2026
bhopal
— “भोपाल का बावड़िया ओवरब्रिज भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा, ईओडब्ल्यू ने PWD के तीन अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की।”

—Advertisement—

Bhopal का बावड़िया ओवर ब्रिज बना भ्रष्टाचार का पुल’: ईओडब्ल्यू ने PWD के तीन अधिकारियों के खिलाफ शुरू की कार्रवाई

Bhopal : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित बावड़िया ओवर ब्रिज पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों—मुख्य अभियंता आरके मेहरा, अधीक्षण यंत्री एमके दुबे और कार्यपालन यंत्री एमपी सिंह—के खिलाफ ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) ने जांच शुरू कर दी है। मामला इतना गंभीर है कि शिकायतें सीधे लोकायुक्त तक पहुंच गई हैं और विधानसभा में भी इस पर सवाल उठाए जा चुके हैं।

आरोपों का संक्षिप्त विवरण

सूत्रों के अनुसार, मुख्य अभियंता आरके मेहरा पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप पहले भी लगे थे। वर्ष 2012 में उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज करवाई गई थी, जो अब तक सत्यापन की प्रक्रिया में है। इसके अलावा मार्च 2023 में मेहरा के खिलाफ एक और शिकायत दर्ज की गई, जो वर्तमान में जांचाधीन है।

साथ ही, अधीक्षण यंत्री एमके दुबे और कार्यपालन यंत्री एमपी सिंह के खिलाफ भी 29 मार्च 2023 को अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गईं। एमपी सिंह के खिलाफ अक्टूबर 2023 में एक और शिकायत में पुल निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता और कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने जून 2024 में अपराध दर्ज कर लिया, जिससे स्पष्ट हो गया कि मामला महज कागजी शिकायत तक सीमित नहीं है।

लोकायुक्त में भी इन अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग समय पर शिकायतें दर्ज की गई हैं। कुछ मामलों में प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ मामले सत्यापन स्तर पर हैं। एक शिकायत को लोकायुक्त ने आवश्यक कार्रवाई के लिए ईओडब्ल्यू को भी भेजा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियां आरोपों को गंभीरता से ले रही हैं।

निर्माण प्रक्रिया और परियोजना में उठ रहे सवाल

बावड़िया ओवर ब्रिज लंबे समय से गुणवत्ता, लागत वृद्धि और निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विवादों में रहा है। स्थानीय नागरिकों ने समय-समय पर निर्माण की गुणवत्ता और कार्य में देरी को लेकर अपनी नाराजगी जताई है।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि परियोजना में वित्तीय अनियमितताएं हुईं और जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की। पुल के निर्माण और मरम्मत कार्यों की लागत, समयसीमा और गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बावड़िया ओवर ब्रिज में निर्माण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई बार शिकायतें की गई थीं। इसमें वित्तीय दस्तावेज, ठेका प्रक्रिया और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई थी।

ईओडब्ल्यू की कार्रवाई

ईओडब्ल्यू ने इस मामले में तीन वरिष्ठ PWD अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। एजेंसी आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सभी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

अधिकारी और ठेकेदारों के बीच हुए लेन-देन, निर्माण सामग्री की खरीद, ठेका प्रक्रिया और परियोजना के कार्यान्वयन की सभी गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है।

जांच के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या पुल निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार के कारण लागत बढ़ी और गुणवत्ता प्रभावित हुई।

पहले भी विवादित रहे अधिकारी

मुख्य अभियंता आरके मेहरा के खिलाफ पहले भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे थे। वर्ष 2012 में दर्ज शिकायत का सत्यापन अब तक लंबित है। इसके अलावा, मार्च 2023 और अक्टूबर 2023 में दर्ज अन्य शिकायतें भी जांचाधीन हैं।

यह बात इस प्रकरण की गंभीरता को और बढ़ाती है, क्योंकि यह संकेत देती है कि पहले से ही अधिकारियों के खिलाफ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना थी, बावजूद इसके निर्माण प्रक्रिया में नियामक और प्रशासनिक निगरानी पूरी तरह प्रभावी नहीं रही।

परियोजना की लागत और महत्व

बावड़िया ओवर ब्रिज की परियोजना राजधानी भोपाल के महत्वपूर्ण यातायात मार्गों में से एक है। इसके निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। पुल का उद्देश्य स्थानीय और अंतरराज्यीय यातायात को सुगम बनाना था, लेकिन इस परियोजना में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल इसे विवादित बना रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने निर्माण में देरी और गुणवत्ता को लेकर विरोध जताया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और ठेकेदार समय पर नियमों और मानकों का पालन करते, तो इस परियोजना को लेकर इतने गंभीर आरोप और शिकायतें सामने नहीं आतीं।

निष्कर्ष

Bhopal के बावड़िया ओवर ब्रिज में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप यह स्पष्ट करते हैं कि निर्माण परियोजनाओं में निगरानी और पारदर्शिता की जरूरत कितनी महत्वपूर्ण है। तीन वरिष्ठ PWD अधिकारियों—आरके मेहरा, एमके दुबे और एमपी सिंह—के खिलाफ ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त की जांच इस मामले की गंभीरता को दिखाती है।

यह मामला न केवल प्रशासन और अधिकारियों के लिए चेतावनी है, बल्कि भविष्य में परियोजनाओं के निर्माण और निगरानी के लिए भी एक सबक है। अधिकारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी होती है कि जनता के पैसे और परियोजना की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया है कि लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों को निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में किसी बड़े भ्रष्टाचार या निर्माण दोष से बचा जा सके।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp