भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026 में मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. का भव्य मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। 81 जापानी भक्तों ने भारतीय संस्कृति और जैन धर्म के प्रति अपनी आस्था से सभी का दिल जीत लिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026: 81 जापानी भक्तों ने भारतीय संस्कृति से जीता सभी का दिल
भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026: हजारों श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक उपस्थिति
भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026 पूरे धार्मिक उत्साह और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। पुण्यसम्राट गुरुदेव श्री विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य एवं गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. तथा आचार्य श्री जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती, समता गुणरसिक एवं प्रखर प्रवचनकार मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. आदि ठाणा का प्रथम स्वतंत्र चातुर्मास प्रवेश अत्यंत भव्य एवं ऐतिहासिक रहा।
श्री थराद त्रिस्तुतिक जैन संघ, मुंबई द्वारा आयोजित इस मग्गदयाणं चातुर्मास मंगल प्रवेश में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026 पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
81 जापानी भक्तों ने जीता भायंदरवासियों का दिल
इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण जापान से आए 81 जापानी श्रद्धालु रहे।इन सभी जापानी भक्तों ने भारतीय संस्कृति एवं जैन परंपरा का अद्भुत सम्मान प्रस्तुत किया।
- सभी महिलाओं ने भारतीय पारंपरिक परिधान धारण किए।
- सभी ने सिर पूरी तरह ढका हुआ था।
- पुरुषों ने कुर्ता-पायजामा पहन रखा था।
- सभी जिनशासन का ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुए।
- पूरी यात्रा में किसी ने चप्पल नहीं पहनी।
उनकी श्रद्धा और अनुशासन ने हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।ये सभी जापानी भक्त कई वर्षों से गच्छाधिपति श्री विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में नवकार मंत्र की आराधना और चातुर्मास प्रवेश में नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं।
52 जिनालय से निकली भव्य शोभायात्रा
भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026 की शोभायात्रा 52 जिनालय से प्रारंभ हुई।मुनि भगवंतों ने सबसे पहले बावन जिनालय में विराजमान आचार्य पुण्यरत्न सूरीश्वरजी म.सा. को वंदन किया।इसके बाद यात्रा
- नवकार पार्श्वनाथ जिनालय
- गुरुमंदिर
के दर्शन करते हुएनूतन थराद भवन जयन्तगिरि से अग्रवाल ग्राउंड पहुँची।पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
धर्मसभा में मिला प्रेरणादायी संदेश
अग्रवाल ग्राउंड में विशाल धर्मसभा आयोजित की गई।यहाँ मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि—चातुर्मास आत्मचिंतन, संयम, तप, स्वाध्याय एवं धर्म साधना का श्रेष्ठ अवसर है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म आराधना, नवकार मंत्र जप एवं संयम जीवन अपनाने का आह्वान किया।
25 वर्षों के संयम जीवन का दूसरा स्वतंत्र चातुर्मास
मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. के 25 वर्षीय संयम जीवन का यह द्वितीय स्वतंत्र चातुर्मास है।इसी कारण पूरे जैन समाज में विशेष उत्साह देखने को मिला।श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए बड़ी संख्या में भाग लिया।
चातुर्मास में होंगे अनेक धार्मिक आयोजन
धर्मसभा में आगामी चार माह के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की घोषणा भी की गई।इनमें प्रमुख रूप से—
- नवकार मंत्र आराधना
- प्रवचनमाला
- तप एवं उपवास
- सामायिक
- प्रतिक्रमण
- धर्मशिक्षा शिविर
- युवा एवं महिला धार्मिक कार्यक्रम
- संस्कार शिविर
- ज्ञान गंगा प्रवचन
- विशेष पूजा एवं आराधना
जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भारतीय संस्कृति का विश्वव्यापी संदेश
जापान से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति और जैन धर्म की शिक्षाएं आज विश्वभर में लोगों को आकर्षित कर रही हैं।उनकी सादगी, अनुशासन, विनम्रता और श्रद्धा ने पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
निष्कर्ष
भायंदर चातुर्मास प्रवेश 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, जैन दर्शन और वैश्विक आध्यात्मिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, 81 जापानी भक्तों की अनुकरणीय श्रद्धा, तथा मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. के प्रेरणादायी प्रवचनों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। आने वाले चार महीनों में आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर प्रदान करेंगे।


