भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट तुलसी पूजन कार्यक्रम बागली जिला देवास के मुकुंद बाग राम मंदिर में श्रद्धा से संपन्न हुआ। भजन-कीर्तन, आरती और सामाजिक संदेशों के साथ संगठन ने सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त किया।
प्रस्तावना: तुलसी पूजन का महत्व
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट तुलसी पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और सेवा भाव का सशक्त प्रतीक है। तुलसी माता को सनातन परंपरा में देवी स्वरूप माना गया है, जो शुद्धता, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत हैं।
आयोजन का संक्षिप्त विवरण
दिनांक 22 दिसंबर 2025 को भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की जिला कार्यकारिणी द्वारा बागली जिला देवास स्थित मुकुंद बाग राम मंदिर में तुलसी पूजन एवं भजन-कीर्तन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, अनुशासन और भक्तिभाव से परिपूर्ण रहा।
मंदिर स्थल एवं धार्मिक वातावरण
मुकुंद बाग राम मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया। दीपों की रोशनी, अगरबत्ती की सुगंध और राम नाम के उच्चारण से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। यह स्थल बागली जिला देवास में आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गया।

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष श्रीमती अरुणा त्रिपाठी ने किया।
विशेष रूप से उपस्थित रहे—
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राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य: श्रीमती सुधा रानी शर्मा
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संभाग अध्यक्ष: श्रीमती शोभा गोस्वामी
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प्रदेश महामंत्री: श्रीमती संध्या शिवहरे
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जिला कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी व सदस्य
तुलसी पूजन एवं विधि-विधान
पूजन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। तुलसी माता को जल, पुष्प, अक्षत एवं दीप अर्पित किए गए।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट तुलसी पूजन के दौरान सामूहिक आरती ने सभी को आध्यात्मिक रूप से जोड़ दिया।

भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा
पूजन के पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। “श्रीराम जय राम जय जय राम” और “तुलसी महारानी की जय” के उद्घोष से वातावरण ऊर्जा से भर उठा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव का संदेश
“तुलसी पूजन जैसे आयोजनों से समाज में संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना सुदृढ़ होती है। प्रभु श्रीराम से संगठन की निरंतर प्रगति की कामना करता हूँ।”
अन्य पदाधिकारियों के प्रेरक विचार
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राष्ट्रीय सचिव श्री शिवम तिवारी:
“धार्मिक चेतना के कार्यक्रम संगठन को जन-जन से जोड़ते हैं।”
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युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कृष्णा यादव:
“युवाओं को संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ना चाहिए।”
तुलसी का धार्मिक एवं औषधीय महत्व
आयुर्वेद में तुलसी को औषधियों की जननी कहा गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
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कार्तिक मास में तुलसी पूजन से सौभाग्य
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नकारात्मक ऊर्जा का नाश
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पारिवारिक शांति की प्राप्ति
संगठन और सांस्कृतिक चेतना
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट तुलसी पूजन यह दर्शाता है कि संगठन मानवाधिकार के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण हेतु भी प्रतिबद्ध है।
युवाओं की भूमिका
युवाओं की भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़कर समाज निर्माण में अग्रसर है।
मीडिया एवं जनसंपर्क संदेश
प्रेस/मीडिया प्रभारी: जीवनलाल जैन, भावेश नाहर,
“यह आयोजन मानवाधिकार और संस्कृति के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है।”
निष्कर्ष
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट तुलसी पूजन बागली जिला देवास में एक प्रेरणादायक, सकारात्मक और शक्तिशाली आयोजन बनकर उभरा, जिसने समाज को संस्कार, सेवा और समर्पण का संदेश दिया।
