Bharat-फ्रांस संबंध: व्यापार दोगुना करने की बड़ी योजना, रक्षा से लेकर परमाणु ऊर्जा तक नई साझेदारी
Bharat और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने के लिए दोनों देशों ने आगामी पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। यह व्यापार वर्तमान में लगभग 16 अरब डॉलर के आसपास है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंचाने की योजना है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फ्रांस के नीस शहर में हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान लिया गया।
नीस में हुई अहम द्विपक्षीय बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे के पहले चरण में फ्रांस पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तकनीक, अंतरिक्ष और वैश्विक सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक से पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों और तकनीकी साझेदारों से जोड़ना है, जिससे नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिले।
व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति
विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में व्यापार दोगुना करने के लिए एक उच्च स्तरीय तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ तैयार करने का भी निर्णय लिया गया है, जो भविष्य में आर्थिक और तकनीकी सहयोग को दिशा देगा।
फ्रांस वर्तमान में यूरोपीय संघ में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 15.81 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें भारत का फ्रांस को निर्यात करीब 7.1 अरब डॉलर रहा है।
रक्षा सहयोग और राफेल समझौते पर चर्चा
बैठक में रक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों देशों ने भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद योजना पर विस्तार से चर्चा की। बताया गया कि इस सौदे पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।
Bharat ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि सह-विकास, सह-डिजाइन और सह-उत्पादन के मॉडल को आगे बढ़ाना चाहता है।
एमआरएफए (MRFA) परियोजना के तहत भारत 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से खरीदेगा, जबकि शेष 96 विमान भारत में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ निर्मित किए जाने की योजना है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा सहयोग
Bharat और फ्रांस के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। दोनों देशों ने छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR और AMR) तकनीक में संयुक्त कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
फ्रांस की प्रमुख कंपनी EDF और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के बीच महाराष्ट्र के जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर बातचीत जारी है। यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा फ्रांसीसी कंपनियों को भारत के परमाणु क्षेत्र में सीधे या भारतीय निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से निवेश की अनुमति देने पर भी चर्चा हुई है।
नई तकनीक और नवाचार में साझेदारी
बैठक के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हाई-स्पीड रेलवे, अंतरिक्ष अनुसंधान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने AI के वैश्विक नियमन के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा फ्रांस में भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे डिजिटल लेनदेन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। आईआईटी कानपुर में एरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और नवाचार से जुड़े 19 संस्थागत समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
अंतरिक्ष और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग
Bharat और फ्रांस ने अंतरिक्ष अनुसंधान में भी साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। मानव अंतरिक्ष उड़ान, उपग्रह तकनीक और अंतरिक्ष निगरानी के क्षेत्रों में संयुक्त कार्य को बढ़ावा दिया जाएगा।
शिक्षा क्षेत्र में छात्रों और शोधकर्ताओं की आवाजाही को आसान बनाने, शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता और वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी सहमति बनी है। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के हवाई अड्डों पर भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा देने के लिए राष्ट्रपति मैक्रों का आभार व्यक्त किया।
वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण
बैठक में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार साझा किए। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस की साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि वह आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए उत्साहित हैं।
निष्कर्ष
Bharat और फ्रांस के बीच यह नई रणनीतिक साझेदारी न केवल व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखती है, बल्कि रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों को एक नई दिशा प्रदान करती है। यह समझौता आने वाले वर्षों में वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
