दिल्ली में आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के सान्निध्य में भक्तामर और भारतीय चित्रांकन ग्रंथ का भव्य विमोचन हुआ। जानिए ग्रंथ की विशेषताएं और उपस्थित गणमान्य श्रद्धालुओं के बारे में।
भक्तामर और भारतीय चित्रांकन ग्रंथ का भव्य विमोचन, जैन संस्कृति की अनुपम धरोहर को मिला नया आयाम
दिल्ली/इंदौर। श्रमण संस्कृति के महाश्रमण आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में भक्तामर और भारतीय चित्रांकन नामक अनुपम ग्रंथ का भव्य एवं गरिमामय विमोचन दिल्ली के ऋषभ विहार में संपन्न हुआ। यह ग्रंथ जैन साहित्य, भक्तामर स्तोत्र और भारतीय चित्रांकन कला के अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण कृति मानी जा रही है।धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि परम पूज्य महाश्रमण आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं परम पूज्य श्रमण सुव्रत सागर जी महाराज के संपादन में तैयार भक्तामर और भारतीय चित्रांकन ग्रंथ का प्रकाशन श्रमण संस्कृति सेवा ट्रस्ट द्वारा किया गया है। ग्रंथ का लेखन श्री एन.पी. उपाध्याय जी ने किया है।
ग्रंथ की विशेषताएं
भक्तामर और भारतीय चित्रांकन के प्रथम संस्करण के प्रकाशन का पुण्यार्जन परम गुरु भक्त टी.के. मंजु वेद, इंदौर एवं श्री महेन्द्र जी लुहाडिया ने किया है। यह ग्रंथ स्वाध्याय प्रेमियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।ग्रंथ में भक्तामर स्तोत्र और भारतीय चित्रांकन कला के माध्यम से जैन संस्कृति की गहराई, आध्यात्मिक भावभूमि और कला की सूक्ष्म अभिव्यक्तियों को समझाने का प्रयास किया गया है। यही कारण है कि यह कृति धार्मिक साहित्य के साथ-साथ भारतीय कला एवं संस्कृति के अध्येताओं के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है।
आचार्य श्री के प्रवचन का केंद्र रहा ग्रंथ
विमोचन समारोह के दौरान परम पूज्य महाश्रमण आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का संपूर्ण प्रवचन ग्रंथ की विषय-वस्तु पर केंद्रित रहा। उन्होंने भक्तामर स्तोत्र के महत्व तथा भारतीय चित्रांकन कला के माध्यम से जैन संस्कृति की सूक्ष्मता और आध्यात्मिक पक्ष को विस्तार से समझाया।आचार्य श्री ने भारतीय परंपरा में ज्ञान, साधना, साहित्य और कला के महत्व को रेखांकित करते हुए धार्मिक साहित्य को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
दिल्ली में जुटे अनेक गणमान्य श्रद्धालु
विमोचन कार्यक्रम में पवन गोधा, दिल्ली, शरद कासलीवाल एवं महासभा पदाधिकारी शरद जैन, महालक्ष्मी चैनल, देवेंद्र सिंघई, वास्तुविद, केदार जैन, ग्वालियर सहित अनेक गणमान्य श्रद्धालु आचार्य श्री के सान्निध्य में उपस्थित रहे।कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्तामर और भारतीय चित्रांकन ग्रंथ के प्रकाशन को जैन साहित्य एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
स्वाध्याय प्रेमियों को निःशुल्क मिलेगा ग्रंथ
वर्षायोग समिति की ओर से बताया गया कि यह ग्रंथ सभी स्वाध्याय प्रेमियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। समिति के अनुसार सनातन संस्कृति के विद्वान द्वारा रचित यह कृति भक्तामर स्तोत्र एवं भारतीय कला के शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ और अमूल्य धरोहर सिद्ध हो सकती है।ग्रंथ के विमोचन के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसके प्रकाशन के लिए संपादक, लेखक, प्रकाशक एवं पुण्यार्जकों के प्रति आभार व्यक्त किया।जैन साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह कृति अध्ययन और स्वाध्याय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
रिपोर्टर: राजेश जैन दद्दू
नमोस्तु शासन। जयवंत हो।

