—Advertisement—

“Bhai Dooj 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और अगर भाई-बहन न हों तो ऐसे मनाएं |

Author Picture
Published On: 23 October 2025
21 10 2025 bhai dooj 2025 date 1 20251021 151357

—Advertisement—

Bhai Dooj 2025: पूरी जानकारी — तिथि, मुहूर्त, महत्व और अगर भाई-बहन नहीं हों तो कैसे मनाएं

हर साल दीपावली के ठीक दो दिन बाद मनाया जाने वाला भाई दूज (Bhai Dooj) भाई-बहन के स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व का पर्व है। यह दिन उस पवित्र रिश्ते की याद दिलाता है जो जीवनभर साथ निभाने, देखभाल करने और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का प्रतीक है।


🗓️ 1. तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2025 में भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर (गुरुवार) को मनाया जा रहा है। यह पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को आता है।

इस बार द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी। इसलिए पूजा और तिलक का शुभ समय 23 अक्टूबर की दोपहर में रहेगा।

शुभ तिलक मुहूर्त:
अपराह्न काल (1:13 PM से 3:28 PM तक) को भाई-बहन का मिलन और तिलक सबसे शुभ माना गया है। इस समय पूजा करने से भाई-बहन दोनों को दीर्घायु और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।


🌸 2. भाई दूज का महत्व और पौराणिक कथा

भाई दूज का अर्थ ही है — भाई के माथे पर “दूज” यानी दूसरा चाँद, तिलक लगाना। यह त्योहार केवल रीति नहीं बल्कि भावना है, जिसमें बहन भाई की रक्षा, सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है।

पौराणिक कथा:
प्राचीन मान्यता के अनुसार, मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के घर आए थे। यमुना ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया, माथे पर तिलक लगाया और भोजन परोसा। यमराज उस स्नेह से प्रसन्न हुए और आशीर्वाद दिया कि जो भी इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होगी।

तब से यह दिन ‘भाई दूज’ के नाम से मनाया जाने लगा और भाई-बहन के रिश्ते का सबसे पवित्र प्रतीक बन गया।


🪔 3. रीत-रिवाज और पारंपरिक विधि

(अ) पूजा और तिलक की विधि

  • प्रातः स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें।
  • बहन एक सुंदर थाली सजाती है जिसमें रोली, अक्षत (चावल), कपूर, सुपारी, मिठाई, और दीपक रखा होता है।
  • शुभ मुहूर्त में बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है, आरती करती है और उसके लंबे जीवन की प्रार्थना करती है।
  • तिलक के बाद भाई बहन को उपहार या नगद रूप में स्नेह का प्रतीक देता है।

(ब) भोजन, व्रत और उपहार

  • कई स्थानों पर बहनें इस दिन व्रत रखती हैं और तिलक के बाद भाई के साथ भोजन करती हैं।
  • पारंपरिक रूप से बहन भाई के लिए अपने हाथों से भोजन बनाती है — पूरी, हलवा, कचौरी, मिठाई आदि।
  • भाई भी उपहार स्वरूप कपड़े, आभूषण, मिठाई या कोई पसंदीदा चीज़ बहन को देकर स्नेह व्यक्त करता है।

🪻 4. भिन्न-भिन्न राज्यों में भाई दूज की विविध परंपराएँ

भारत भर में भाई दूज को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, पर भाव एक ही रहता है — प्यार और सुरक्षा।

  • पश्चिम बंगाल में इसे ‘भाई फोटा’ कहते हैं। यहाँ बहन भाई के माथे पर चंदन और सिंदूर का तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना करती है।
  • महाराष्ट्र और गोवा में यह ‘भाऊ बीज’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ बहनें ‘थाली पूजन’ के साथ भोजन समारोह का आयोजन करती हैं।
  • नेपाल में इसे ‘भाई टीका’ कहा जाता है। यहाँ सात रंगों के तिलक (सप्तवर्णी टीका) से भाई के माथे को सजाया जाता है।

💫 5. अगर भाई-बहन न हो तो कैसे मनाएं?

कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि कोई भाई या बहन न हो तो क्या यह त्योहार मनाया जा सकता है? उत्तर है — बिलकुल हाँ! भाई दूज रक्त से नहीं, रिश्ते की भावना से बनता है।

  • आप अपने कजन, मित्र या किसी प्रियजन को भाई-बहन के रूप में मान कर यह दिन मना सकते हैं।
  • यदि दूरी की वजह से सामने नहीं आ सकते, तो वीडियो कॉल के माध्यम से “वर्चुअल तिलक” कर सकते हैं।
  • जो लोग एकाकी रहते हैं, वे स्वयं को ‘आध्यात्मिक भाई’ या ‘स्वयं-बहन’ मान कर आत्म-प्रेम और सामाजिक बंधनों की भावना से यह दिन मना सकते हैं।
  • अपने माता-पिता या परिवार के बुजुर्गों को तिलक करना भी इस दिन की सच्ची भावना को जीने का एक सुंदर तरीका है।
  • कोई अनाथालय, वृद्धाश्रम या विद्यालय जा कर बच्चों के साथ मिठाई बाँटना भी इस दिन को विशेष बना सकता है।

इस तरह भाई दूज सिर्फ भाई-बहन का नहीं, बल्कि मानवता और रिश्तों की गरमाहट का पर्व बन जाता है।


🌞 6. इस वर्ष के खास बिंदु

  • वर्ष 2025 में भाई दूज का मुख्य उत्सव 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
  • दीपावली के बाद यह त्योहार साल भर के पारिवारिक मिलन का अंतिम अध्याय होता है।
  • इस वर्ष अनेक शहरों में भाई दूज विशेष कार्यक्रम, सांस्कृतिक मेलों और समूहिक पूजन का आयोजन किया जाएगा।
  • सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई स्थानों पर सामाजिक संस्थाएँ भी सड़क सुरक्षा और स्वच्छता अभियान से इसे जोड़ रही हैं।

🪙 7. भाई दूज के लिए SEO फ्रेंडली कीवर्ड (फोकस वर्ड्स)

भाई दूज 2025, भाई दूज की तिथि, भाई दूज का शुभ मुहूर्त, भाई दूज पूजा विधि, भाई दूज का महत्व, अगर भाई-बहन न हो तो कैसे मनाएं, भाई दूज का इतिहास, भाई दूज उपहार विचार, भाई दूज शुभकामनाएं मेसेज, Bhai Dooj 2025 date and time, Bhai Dooj rituals in Hindi.

इन फोकस कीवर्ड्स को आर्टिकल में स्वाभाविक रूप से शामिल करने से सर्च इंजन पर बेहतर रैंकिंग मिलती है।


🌼 8. निष्कर्ष

भाई दूज 2025 सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों के अटूट बंधन का प्रतीक है। यह दिन सिखाता है कि प्यार और संरक्षण का रिश्ता रक्त से नहीं, भावनाओं से बनता है। भाई के लिए बहन का तिलक हो या बहन के लिए भाई की मुस्कान — यह दोनों एक-दूसरे की दुआ और विश्वास का प्रतीक हैं।

तो इस वर्ष 23 अक्टूबर 2025 को भाई दूज को सिर्फ रीति के लिए नहीं, बल्कि भावना से मनाएं। रिश्तों को नए अर्थ में जीएं, क्योंकि सच्चा त्योहार वही है जो दिलों को जोड़ दे।

हैप्पी भाई दूज 2025!
आपका जीवन भी भाई दूज की तरह प्यार, शांति और खुशियों से रोशन रहे।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp