भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक के अवसर पर विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने देशभर के जैन परिवारों से संध्या में घर-घर 5 दीपक जलाने की अपील की है। जानिए आदिनाथ भगवान की शिक्षाओं और कार्यक्रमों का महत्व।
राजेश जैन दद्दू
भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक: देशभर में उत्सव, जैन समाज से घर-घर 5 दीपक जलाने की अपील
इंदौर / अयोध्या।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का जन्म कल्याणक महोत्सव देशभर में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने जैन समाज से एक विशेष पहल करते हुए अपील की है कि प्रत्येक जैन परिवार अपने घर की देहरी पर संध्या के समय 5 दीपक प्रज्वलित करें।
संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू और अध्यक्ष मयंक जैन भाया ने बताया कि यह दीपक केवल प्रकाश के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे पंच परमेष्ठी के प्रति श्रद्धा और जीवन में अज्ञान के अंधकार को दूर करने के संकल्प का संदेश देते हैं।
मानव सभ्यता के प्रथम शिक्षक भगवान आदिनाथ
जैन धर्म में भगवान आदिनाथ को मानव सभ्यता का प्रथम मार्गदर्शक माना जाता है। उन्हें केवल धार्मिक गुरु ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के संस्थापक के रूप में भी देखा जाता है।ऐसा माना जाता है कि जब प्रारंभिक युग में मानव समाज जीवनयापन की स्पष्ट व्यवस्था से अनभिज्ञ था, तब भगवान आदिनाथ ने लोगों को जीवन जीने की कला और समाज निर्माण की दिशा प्रदान की।इसी कारण उन्हें सभ्यता का प्रथम गुरु भी कहा जाता है।
षट्कर्म की शिक्षा: सभ्यता की नींव
भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को षट्कर्म (छह प्रमुख जीवन कौशल) की शिक्षा दी, जिसने सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाया।
1. असि (रक्षा और शौर्य)
समाज और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए शस्त्र संचालन और साहस का महत्व बताया गया।
2. मसि (लेखन और ज्ञान)
ज्ञान को सुरक्षित रखने और शासन व्यवस्था के संचालन के लिए लेखन कला की शिक्षा दी।
3. कृषि
अन्न उत्पादन के लिए खेती को जीवन का आधार बताया।
4. विद्या और व्यापार
कौशल और शिक्षा के माध्यम से समाज में आर्थिक संतुलन बनाए रखने का मार्ग दिखाया।
5. वाणिज्य
वस्तुओं के आदान-प्रदान और व्यापार के माध्यम से आर्थिक विकास की व्यवस्था बनाई।
6. शिल्प
वास्तुकला, निर्माण और कला के माध्यम से मानव जीवन को सृजनात्मक और समृद्ध बनाने का संदेश दिया।
इन शिक्षाओं के कारण भगवान आदिनाथ को मानव सभ्यता का संस्थापक माना जाता है।
घर-घर 5 दीपक जलाने का संदेश
विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने इस वर्ष भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक को प्रकाश पर्व के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
संगठन ने समाज के प्रत्येक परिवार से आग्रह किया है कि:
“भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक की खुशी में प्रत्येक जैन परिवार संध्या के समय अपने घर की देहरी पर 5 दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।”
इन पाँच दीपकों को पंच परमेष्ठी का प्रतीक माना गया है —
- अरिहंत
- सिद्ध
- आचार्य
- उपाध्याय
- साधु
ये दीपक आत्मा में ज्ञान और जागृति का प्रकाश फैलाने का संदेश देते हैं।
देशभर में होंगे धार्मिक कार्यक्रम
भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक के अवसर पर देशभर के जिनालयों और जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रभात फेरी
सुबह के समय केसरिया ध्वज के साथ भव्य प्रभात फेरियां निकाली जाएंगी।
अभिषेक और शांतिधारा
जिनालयों में भगवान आदिनाथ का 108 कलशों से मंगल अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी।
धार्मिक संगोष्ठी
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ द्वारा
“आदिनाथ का अर्थशास्त्र और वर्तमान समय” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी।
भगवान आदिनाथ का सार्वभौमिक संदेश
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि भगवान आदिनाथ केवल जैन धर्म के नहीं बल्कि पूरी मानवता के मार्गदर्शक हैं।उन्होंने मानव समाज को कर्म, धर्म और मोक्ष का मार्ग दिखाया और जीवन को अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में ले जाने का संदेश दिया।आज के समय में जब समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भगवान आदिनाथ की शिक्षाएं मानवता के लिए मार्गदर्शक प्रकाश के समान हैं।
