भागीरथपुरा पानी संकट के बाद इंदौर में नई पाइपलाइन का काम जारी। पुष्यमित्र भार्गव और क्षितिज सिंघल ने 20 दिन में जलापूर्ति बहाल करने का दावा किया।
भागीरथपुरा पानी संकट क्या है
इंदौर का भागीरथपुरा पानी संकट पिछले दो महीनों से शहर की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य त्रासदी बना हुआ है।
दूषित पानी की वजह से 35 लोगों की मौत और हजारों लोगों के बीमार पड़ने के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।
आज भी कई मोहल्लों में नल से पानी नहीं आ रहा और लोग टैंकरों पर निर्भर हैं।
35 मौतों के बाद भी सामान्य नहीं हुए हालात
21 दिसंबर 2025 को पहली मौत दर्ज हुई थी।
29 दिसंबर तक 100 से अधिक लोग बीमार पड़ गए और धीरे-धीरे मौतों का आंकड़ा 35 तक पहुंच गया।
घटना को समय बीत चुका है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, वहां आज भी सन्नाटा और भय का माहौल है।
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लोग अब भी पानी पीने से पहले डरते हैं
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हल्की तबीयत खराब होने पर भी घबराहट बढ़ जाती है
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भरोसा अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हुआ
टैंकरों पर निर्भर जीवन
भागीरथपुरा के कई क्षेत्रों में अब भी:
- टैंकर से पानी भरना रोज़ की मजबूरी है
- लोग पानी उबालकर पी रहे हैं
- कई परिवार केन या फिल्टर पानी खरीद रहे हैं
- घरेलू खर्च अचानक बढ़ गया है
रहवासियों का कहना है कि जब तक पाइपलाइन पूरी तरह बदल नहीं जाती, वे निगम की सप्लाई पर भरोसा नहीं करेंगे।
नई पाइपलाइन का काम कहां तक पहुंचा
नगर निगम ने दूषित लाइन को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया है।
अभी क्या काम चल रहा है:
- पुरानी पाइपलाइन हटाई जा रही है
- नई लाइन डाली जा रही है
- कई जगह सड़कें खोदी गई हैं
- टेस्टिंग के बाद ही सप्लाई शुरू होगी
इसी कारण क्षेत्र में यातायात और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हैं।
अधिकारियों का क्या कहना है
निरीक्षण के दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अधिकारियों को काम तेज करने के निर्देश दिए।
इस दौरान एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा सहित नगर निगम की टीम मौजूद रही।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार:
“लाइन बदलने का काम तेजी से चल रहा है। टेस्टिंग रिपोर्ट संतोषजनक आने के बाद ही नियमित सप्लाई शुरू की जाएगी।”
कब तक खत्म होगा टैंकरों का दौर?
नगर निगम के अनुसार:
नियमित जलापूर्ति शुरू होने में करीब 20 दिन और लग सकते हैं
पूरी सप्लाई शुरू करने से पहले पानी की गुणवत्ता की जांच अनिवार्य होगी
चरणबद्ध तरीके से कनेक्शन चालू किए जाएंगे
यानी टैंकरों से राहत तुरंत नहीं, बल्कि परीक्षण पूरा होने के बाद ही मिलेगी।
जांच में क्या सामने आया?
जांच में बेहद गंभीर लापरवाही उजागर हुई:
- पानी की पाइपलाइन और ड्रेनेज लाइन साथ-साथ थीं
- लीकेज से गंदा पानी सप्लाई में मिला
- पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए
- 4000 से अधिक लोग बीमार पड़े
यही इस पूरे भागीरथपुरा पानी संकट की सबसे बड़ी वजह बनी।
स्वास्थ्य स्थिति अब कैसी है?
- अधिकांश मरीज अस्पताल से घर लौट चुके हैं
- एक महिला का इलाज अब भी जारी बताया गया है
- स्वास्थ्य विभाग निगरानी जारी रखे हुए है
लोग अभी भी सावधानी बरत रहे हैं — “उबालो, फिर पियो” नियम अपनाया जा रहा है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
यह सिर्फ पाइपलाइन बदलने का काम नहीं है, बल्कि:
जनता का भरोसा वापस लाना
सुरक्षित जल नेटवर्क बनाना
पुरानी अव्यवस्थित लाइनों का पुनर्गठन
भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकना
यह मामला विधानसभा तक पहुंच चुका है और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
आगे क्या होना चाहिए — स्थायी समाधान
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ पाइप बदलना काफी नहीं होगा।
जरूरी है:
- ड्रेनेज और वाटर लाइन का पूर्ण पृथक्करण
- GIS आधारित पाइपलाइन मैपिंग
- नियमित माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग
- नागरिक निगरानी तंत्र
- आपदा प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल
यदि यह नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
निष्कर्ष
भागीरथपुरा पानी संकट केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे की बड़ी चेतावनी है।
35 मौतों के बाद भी लोगों का डर खत्म नहीं हुआ है।
नई पाइपलाइन का काम जारी है, लेकिन असली चुनौती अब सुरक्षित और भरोसेमंद जलापूर्ति सुनिश्चित करना है।
अगले 20 दिन इस पूरे मामले के लिए निर्णायक साबित होंगे।



