Bauridand–Surajpur रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना
Bauridand–Surajpur : बौरीडांड़ जंक्शन से सूरजपुर तक 80 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर जोन के अंतर्गत तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना इस पूरे रेलखंड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और यात्री व मालगाड़ियों के संचालन को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सिंगल लाइन होने के कारण इस रूट पर अक्सर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए रोकना पड़ता है, जिससे देरी की समस्या आम हो गई है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रेल संचालन में सुधार
यह रेल मार्ग सरगुजा और सूरजपुर क्षेत्र को देश के प्रमुख हिस्सों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। इस रूट पर अंबिकापुर–हजरत निजामुद्दीन सुपरफास्ट एक्सप्रेस, अंबिकापुर–जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस, शहडोल एक्सप्रेस, मेमू सेवाएं और दुर्ग एक्सप्रेस सहित कुल 6 प्रमुख ट्रेनें चलती हैं। दोहरीकरण पूरा होने के बाद ट्रेनों की गति, समयबद्धता और संचालन क्षमता में बड़ा सुधार होगा, जिससे यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
9 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी
परियोजना के लिए एमसीबी जिले के 9 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया गया है, जिनमें उजियारपुर, बरबसपुर, दर्रीटोला, सरोला, सेमरा, लाई, उदलकछार, शंकरगढ़ और बेलबहरा शामिल हैं। इन क्षेत्रों से कुल 6.980 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसमें निजी और सरकारी दोनों तरह की जमीन शामिल है।
111 किसानों को मिलेगा मुआवजा
भूमि अधिग्रहण के तहत 111 किसानों की निजी भूमि और 28 मामलों में सरकारी भूमि शामिल है। इसके बदले प्रभावित लोगों को कुल 4.78 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि दी जाएगी। प्रशासन द्वारा यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज बनी रहे।
2023 से शुरू हुआ निर्माण कार्य
इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2023 में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई थी। पहले चरण में बैकुंठपुर रोड स्टेशन से शिवप्रसाद नगर तक निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 485.78 करोड़ रुपये है, जबकि पूरे सेक्शन की कुल लागत करीब 1376.2 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
निर्माण में देरी और चुनौतियां
हालांकि बौरीडांड़–सूरजपुर रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना में देरी का मुख्य कारण ठेकेदार की लापरवाही और आवश्यक संसाधनों की कमी बताया जा रहा है। कई स्थानों पर काम की गति धीमी होने से समग्र प्रगति प्रभावित हुई है, जिससे परियोजना निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकी। इस स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं ताकि कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार सुनिश्चित किया जा सके। प्रशासन का लक्ष्य है कि शेष कार्य को तेजी से पूरा कर परियोजना को जल्द से जल्द जनता को समर्पित किया जाए, जिससे यात्रियों और मालगाड़ियों को इसका लाभ मिल सके।
कोयला परिवहन और मालगाड़ियों का दबाव
यह रेल मार्ग कोयला परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सूरजपुर और आसपास के क्षेत्रों में एसईसीएल सहित कई कोयला खदानें सक्रिय हैं, जहां से देश के विभिन्न पावर प्लांट्स के लिए कोयला भेजा जाता है। सिंगल लाइन होने के कारण मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे यात्री ट्रेनों की समयबद्धता प्रभावित होती है। दोहरीकरण के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
यात्रियों को मिलेगा बड़ा लाभ
दोहरीकरण परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को ट्रेनों की देरी से राहत मिलेगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी। क्रॉसिंग की समस्या समाप्त होगी और ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होगा। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।
क्षेत्रीय विकास और भविष्य की संभावनाएं
इस परियोजना के पूरा होने के बाद इस रूट पर नई ट्रेनों के संचालन की संभावना भी बढ़ जाएगी। बेहतर रेल नेटवर्क से क्षेत्रीय व्यापार, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
निष्कर्ष
Bauridand–Surajpur रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल रेलवे संचालन को आधुनिक और तेज बनाएगी, बल्कि यात्रियों, व्यापारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी लंबे समय तक लाभकारी साबित होगी।
