बालाघाट में पहली बार महिला नक्सली ने किया आत्मसमर्पण, मुख्यधारा में लौटने का बड़ा कदम
बालाघाट, मध्य प्रदेश: माओवादी प्रभावित बालाघाट जिले में पहली बार किसी महिला नक्सली ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का साहसिक निर्णय लिया है। 23 वर्षीय सुनीता ने 1 नवंबर को हॉकफोर्स कैंप चौरिया में इंसास राइफल और पुलिस वर्दी के साथ आत्मसमर्पण किया। सुनीता माओवादी संगठन की सेंट्रल कमेटी सदस्य और एमएमसी जोन प्रभारी रामदेर की हथियारबंद गार्ड रही हैं। यह घटना न सिर्फ बालाघाट जिले के लिए, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
महिला नक्सली का आत्मसमर्पण और उसका सफर
सुनीता, पिता विसरू, निवासी विरमन, इंद्रावती क्षेत्र जिला बीजापुर (छत्तीसगढ़) हैं। उन्होंने 2022 में नक्सली संगठन से जुड़कर माड़ क्षेत्र में छह महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें रामदेर की सुरक्षा में तैनात किया गया। वह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय रही।
सुनीता ने 31 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे दलम छोड़ने का निर्णय लिया और जंगल में अपने हथियार तथा अन्य सामग्री छोड़ने के बाद हॉकफोर्स कैंप चौरिया पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुनीता पर तीन राज्यों – छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश – में संयुक्त रूप से 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
हथियार और सामग्री सौंपने की प्रक्रिया
आत्मसमर्पण के समय सुनीता ने इंसास राइफल, तीन मैगजीन, पिट्ठू बैग और वर्दी पुलिस को सौंपा। हॉकफोर्स के सहायक सेनानी रूपेंद्र धुर्वे ने इस प्रक्रिया का नेतृत्व किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुनीता का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के भीतर बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
संगठन में बदलाव के संकेत
पुलिस के अनुसार, रामदेर की टीम के कई अन्य सदस्य भी आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं। पहले ही सोनू दादा, रूपेश दादा और कुछ अन्य साथी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब रामदेर के बाकी सदस्य भी मुख्यधारा में लौटने पर विचार कर रहे हैं। पुलिस ने दलम छोड़ने वाले अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें योगेश और मल्लेश प्रमुख हैं। इसके अलावा चिलौरा निवासी देवेंद्र की हत्या में शामिल रामदेर, रोहित, विमला, तुलसी, चंदू दादा, प्रेम, अश्विरे और सागर की भूमिका की भी जांच जारी है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने पुष्टि की कि सुनीता से पूछताछ जारी है और आत्मसमर्पण की पूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जल्द ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी मीडिया के माध्यम से साझा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण को बताया सफलता
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सुनीता के आत्मसमर्पण को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उग्रवादियों को दी गई कड़ी चेतावनी का सकारात्मक परिणाम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की आत्मसमर्पण, पुनर्वास और राहत नीति 2023 के तहत यह किसी नक्सली का पहला आत्मसमर्पण है। 1992 के बाद यह पहली बार है कि किसी अन्य राज्य की नक्सली मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पिछले 10 महीनों में मध्य प्रदेश में कुल 1.46 करोड़ रुपये के इनामी नक्सलियों का सफाया किया जा चुका है। उनका मानना है कि यह आत्मसमर्पण न केवल सुनीता के लिए, बल्कि पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महिला नक्सली का आत्मसमर्पण
बालाघाट जिले में महिला नक्सली का यह आत्मसमर्पण न सिर्फ पुलिस और प्रशासन के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी एक संदेश है। यह घटना दिखाती है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में महिलाएं भी मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं के आत्मसमर्पण से संगठन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा संरचना पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण
सुनीता के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने कहा कि अन्य नक्सली सदस्य भी आत्मसमर्पण के लिए विचार कर रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार और सुरक्षा बलों की सक्रियता ने परिणाम देना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास के लिए सभी प्रकार की सहायता दी जाएगी।
सामाजिक और कानूनी महत्व
सुनीता का आत्मसमर्पण समाज में भी सकारात्मक संदेश पहुंचाता है। यह बताता है कि नक्सली गतिविधियों में शामिल व्यक्ति भी अपने जीवन में बदलाव कर सकते हैं और मुख्यधारा में लौट सकते हैं। पुलिस और प्रशासन का उद्देश्य न केवल सुरक्षा बनाए रखना है, बल्कि समाज में स्थायी शांति और विकास को बढ़ावा देना भी है।
भविष्य की रणनीति
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास और रोजगार की योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसके अलावा, नक्सल प्रभावित इलाकों में सामाजिक जागरूकता अभियान भी तेज किए जाएंगे ताकि स्थानीय लोग नक्सली गतिविधियों से दूर रहें।
निष्कर्ष
बालाघाट में महिला नक्सली का आत्मसमर्पण न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि यह मध्य प्रदेश सरकार की नक्सल विरोधी नीतियों की सफलता का प्रतीक भी है। यह घटना अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने और मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरणा देने वाली साबित हो सकती है। सुनीता का साहसिक कदम यह दिखाता है कि सही दिशा और समर्थन मिलने पर नक्सल प्रभावित व्यक्तियों का पुनर्वास संभव है।

