बछोड़िया शासकीय स्कूल परिसर की बदहाली: न बाउंड्री वॉल, न समतल मैदान; असुरक्षित माहौल में पढ़ने को मजबूर छात्र
संवाददाता – अर्जुन कुमावत, पिपलोदा
विशेष रिपोर्ट | बछोड़िया (रतलाम)
बछोड़िया। एक ओर जहां सरकार सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर पिपलोदा जनपद क्षेत्र के ग्राम बछोड़िया का शासकीय स्कूल परिसर इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
गांव के शासकीय स्कूल परिसर में प्राथमिक विद्यालय और शासकीय हाई स्कूल दोनों संचालित हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर यहां बाउंड्री वॉल तक नहीं है। इसके अलावा स्कूल परिसर में खेल मैदान भी पूरी तरह अव्यवस्थित और उबड़-खाबड़ है। ऐसे में छोटे बच्चों से लेकर हाई स्कूल के विद्यार्थियों तक को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुरक्षा दीवार के अभाव में असुरक्षित स्कूल परिसर
स्कूल परिसर के चारों ओर बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रात के समय यह परिसर असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरा होने के बाद कुछ लोग स्कूल परिसर में बैठकर शराब पीते हैं, जिससे सुबह स्कूल आने वाले बच्चों और शिक्षकों को असुरक्षित वातावरण का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों के अभाव में यहां कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। स्कूल परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश आसानी से हो जाता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
दिन में आवारा मवेशियों का रहता है जमावड़ा
बाउंड्री वॉल नहीं होने का असर केवल रात तक सीमित नहीं है। दिन के समय भी आवारा मवेशी स्कूल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे परिसर में गंदगी फैलती है और बच्चों के लिए परेशानी बढ़ जाती है।
प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे अक्सर मैदान में खेलते और घूमते रहते हैं। ऐसे में आवारा पशुओं की मौजूदगी उनके लिए खतरा बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल परिसर को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले चारों ओर पक्की बाउंड्री वॉल का निर्माण जरूरी है।

बदहाल मैदान से खेल गतिविधियां प्रभावित
स्कूल परिसर में खेल मैदान की स्थिति भी बेहद खराब है। मैदान समतल नहीं होने के कारण जगह-जगह पत्थर और गड्ढे दिखाई देते हैं। खेल गतिविधियों के दौरान बच्चों के गिरकर चोटिल होने का खतरा बना रहता है।
विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं खेलकूद में हिस्सा लेना चाहते हैं, लेकिन मैदान की खराब स्थिति के कारण उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियां भी जरूरी हैं, इसलिए मैदान का समतलीकरण कराया जाना चाहिए।
पहले भी हो चुकी हैं नुकसान की घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार सुरक्षा दीवार नहीं होने के कारण स्कूल परिसर पहले भी नुकसान झेल चुका है। रात के समय असामाजिक तत्वों द्वारा कक्षाओं की खिड़कियों के कांच तोड़े जा चुके हैं। इसके अलावा स्कूल में लगी एलईडी सहित अन्य सामग्री को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की संभावना बनी रहेगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
गांव के प्रबुद्धजनों और ग्रामीणों बलराम पटेल, प्रहलाद कुमावत, प्रकाश कुमावत एवं दिनेश खारोल ने स्कूल की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
ग्रामीणों ने कहा कि प्राथमिक और हाई स्कूल दोनों एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द बजट स्वीकृत कर स्कूल परिसर में सुरक्षा दीवार बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलने से बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी और अभिभावकों में भी विश्वास बढ़ेगा।
खेल मैदान के सुधार की भी उठी मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल के खेल मैदान को समतल कराने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों के लिए भी उचित माहौल मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों को भी शहरों की तरह अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें।

प्रशासन से उम्मीद, जल्द होगा समाधान
ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर जल्द समाधान करेगा। बाउंड्री वॉल निर्माण और मैदान के सुधार से न केवल स्कूल की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ाई और खेलकूद के लिए बेहतर वातावरण भी मिलेगा।
फिलहाल बछोड़िया के ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। अब देखना होगा कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदार विभाग कितनी जल्दी कदम उठाता है।
