Baba Bageshwar ने उठाए सनातन धर्म की कमियों पर सवाल साधु-संतों में सुधार की आवश्यकता पर जोर
इंदौर दौरे पर मीडिया से बातचीत
Baba Bageshwar धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बाबा बागेश्वर के नाम से जाना जाता है, सोमवार, 2 फरवरी को इंदौर पहुंचे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने सनातन धर्म की वर्तमान स्थिति पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। बाबा बागेश्वर ने कहा कि धर्म में कई कमियां हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देने और सुधार की आवश्यकता है।
साधुओं के विवाद और आपसी निंदा पर चिंता
Baba Bageshwar ने सबसे पहले साधुओं और संतों के बीच चल रहे विवादों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा,
साधु जो आपस में लड़कर और एक-दूसरे की निंदा करके समय बर्बाद कर रहे हैं, ये सनातन धर्म के लिए घातक है।”
उनके अनुसार, अगर साधु इसी तरह आपसी मतभेद में उलझे रहेंगे, तो धर्म की सच्ची परंपरा पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा का सबसे अच्छा तरीका है स्वयं सुधार और साधना, न कि दूसरों की आलोचना।
सनातन धर्म की पुरानी कमियां
Baba Bageshwar ने कहा कि सनातन धर्म में सबसे बड़ी कमियों में से एक पुरानी कुरीतियां, रूढ़िवादिता और बलि प्रथा है। उन्होंने यह भी कहा कि नए मंदिर बन रहे हैं, लेकिन पुराने मंदिरों और तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार नहीं हो रहा। इस कारण वे केवल पिकनिक स्पॉट की तरह बन गए हैं, जबकि ये आस्था और भक्ति के केंद्र होने चाहिए।
हमारे मंदिर, तीर्थ और देवालय केवल दर्शनीय स्थल नहीं हैं, बल्कि आस्था और ध्यान के केंद्र होने चाहिए।"
ज्ञान साझा करने में असमानता
Baba Bageshwar ने कहा कि सनातन धर्म में एक और कमी यह है कि हम व्यक्तिगत रूप से ज्ञान देते हैं, लेकिन इसे समाज और विश्व स्तर पर साझा करने की सोच नहीं रखते। उनका कहना है कि धर्म का उद्देश्य केवल आस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और मानवता के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करना चाहिए।
संतों के विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट
संतों के विवाद पर उन्होंने कहा,
“हम अभी संत नहीं बन पाए हैं। इसलिए किसी अन्य साधु पर टिप्पणी करना हमारे लिए उचित नहीं है।”
Baba Bageshwar ने यह भी बताया कि संत बनने की प्रक्रिया लंबी साधना और अभ्यास की मांग करती है। उनका उद्देश्य वाणी से नहीं, बल्कि अपने आचरण से संत बनने का है।
धर्म की निष्पक्ष स्थिति
Baba Bageshwar ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म किसी भी मजहब के विरोध में नहीं है। वे हमेशा से सनातन के पक्ष में रहे हैं और रहेंगे। उनका लक्ष्य केवल सत्य को सामने लाना और धर्म की शुद्धता बनाए रखना है। उन्होंने मीडिया से कहा कि हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि धर्म की असली भावना अक्सर नजरअंदाज की जा रही है।
आस्था का असली अर्थ
Baba Bageshwar ने लोगों से अपील की कि वे केवल धार्मिक आयोजनों और दिखावे तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि असली आस्था और धर्म का पालन तब होता है जब हम अपने विचारों, आचरण और कर्मों में सुधार करते हैं।
अगर हम इन मूल तत्वों पर ध्यान देंगे, तो सनातन धर्म की शुद्धता और गौरव सदैव बनी रहेगी।”
संदेश और निष्कर्ष
Baba Bageshwar ने अंत में कहा कि सनातन धर्म केवल मंदिरों, उत्सवों और धार्मिक रस्मों तक सीमित नहीं है। यह समाज में नैतिकता, ज्ञान और मानवता फैलाने का माध्यम है। उन्होंने साधु-संतों और आम जनता को संदेश दिया कि आलोचना करना या दिखावा करना पर्याप्त नहीं है।
हम यदि स्वयं सुधार करेंगे और समाज को सही दिशा देंगे, तो सनातन धर्म की परंपरा कभी खत्म नहीं होगी।”
Baba Bageshwar का यह संदेश स्पष्ट करता है कि धर्म की असली शक्ति हमारे आचार, विचार और कर्मों में निहित है। केवल सत्कार्य और आंतरिक सुधार ही धर्म को मजबूत और टिकाऊ बनाए रख सकते हैं।
