अवैध कॉलोनियों का नामांतरण विवाद नागदा की जनसुनवाई में जोर-शोर से उठा। भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश अध्यक्ष कवि देव सिंह गुर्जर ने नगरपालिका पर प्लॉट स्वामियों को नामांतरण के लिए परेशान करने और कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए।
अवैध कॉलोनियों का नामांतरण विवाद: जनसुनवाई में गूंजा नगरपालिका के खिलाफ मामला
अवैध कॉलोनियों का नामांतरण विवाद बना जनसुनवाई का प्रमुख मुद्दा
नागदा में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान अवैध कॉलोनियों का नामांतरण विवाद प्रमुख रूप से सामने आया। भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश अध्यक्ष कवि देव सिंह गुर्जर ने प्रशासन को शिकायत सौंपते हुए नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि नगरपालिका के अधिकारी एवं कर्मचारी प्लॉट स्वामियों को नामांतरण (नामांतरण/म्यूटेशन) की प्रक्रिया में अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन कॉलोनियों की पूरी भूमि का डायवर्सन पहले से किया जा चुका है, वहां भी प्रत्येक प्लॉट धारक से अलग-अलग डायवर्सन दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
नामांतरण के दौरान प्लॉट स्वामियों से अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग
कवि देव सिंह गुर्जर ने कहा कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां प्लॉट मालिकों के पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद नामांतरण नहीं किया जा रहा।उन्होंने आरोप लगाया कि नगरपालिका के अधिकारी यह कहकर आवेदन वापस कर रहे हैं कि संबंधित कॉलोनी ही अवैध है।गुर्जर के अनुसार यदि वास्तव में कॉलोनी अवैध है, तो सबसे पहले अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, न कि वर्षों से वहां रहने वाले आम नागरिकों और प्लॉट खरीदारों को परेशान किया जाए।
कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई नहीं होने पर उठाए सवाल
भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रशासन से पूछा कि यदि संबंधित कॉलोनियां अवैध हैं तो अब तक कॉलोनाइजरों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या अन्य कारणों से कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन निष्पक्ष है तो अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ भी समान रूप से कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन मंच ने की निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायत में मांग की गई कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर नामांतरण प्रक्रिया में अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग किस आधार पर की जा रही है।साथ ही ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए जो आम नागरिकों को अनावश्यक परेशान कर रहे हैं।
प्रशासन से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग
भारतीय किसान यूनियन मंच ने मांग की कि भविष्य में नामांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए ताकि प्लॉट स्वामियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।उन्होंने कहा कि यदि कॉलोनियों का डायवर्सन विधिवत किया जा चुका है तो नामांतरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनसुनवाई में प्रस्तुत शिकायत पर जिला प्रशासन एवं नगरपालिका क्या कार्रवाई करते हैं। यदि मामले की जांच होती है तो अवैध कॉलोनियों, नामांतरण प्रक्रिया तथा कॉलोनाइजरों की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।फिलहाल प्लॉट स्वामियों को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।
रिपोर्ट
जीवनलाल जैन
नागदा संवाददाता
मो. 9179662633


