—Advertisement—

धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, ASI रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर दलीलें, यथास्थिति कायम रहेगी।

Author Picture
Published On: 6 April 2026
धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, ASI रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर दलीलें, यथास्थिति कायम रहेगी।

—Advertisement—

धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, ASI रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर दलीलें, यथास्थिति कायम रहेगी

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विवादित स्थल रहा है। यह परिसर अपनी स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक परंपराओं के कारण देशभर में चर्चित रहा है। पिछले कई दशकों से इस परिसर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद चलता रहा है। अब इस विवाद का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। 6 अप्रैल 2026 से इंदौर हाईकोर्ट की बेंच में इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हो गई है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की अध्यक्षता में, सभी याचिकाओं पर समग्र रूप से विचार करेगी। सुनवाई की कार्यसूची में यह मामला 41वें नंबर पर रखा गया है। इस सुनवाई में मुख्य रूप से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के आधार पर दलीलें सुनी जाएंगी। पिछले सुनवाई सत्र में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मुख्य याचिकाकर्ताओं के तर्कों के बाद जिन पक्षों ने ASI की रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उन्हें अपनी दलीलें रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में अंतिम निर्णय का अधिकार हाईकोर्ट के पास है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि ASI द्वारा पेश की गई विस्तृत सर्वे रिपोर्ट और स्थल की वीडियोग्राफी तथा फोटोग्राफी को गंभीरता से परखा जाएगा। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नया तथ्य या आपत्ति सामने आती है, तो हाईकोर्ट उसे भी ध्यान में रख सकता है।

ASI रिपोर्ट में मिले महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य

ASI की रिपोर्ट इस विवाद के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। सर्वे के दौरान परिसर की स्थापत्य कला, शिलालेख और अन्य ऐतिहासिक प्रमाण सामने आए हैं।

स्थापत्य कला: सर्वे में परिसर के कुल 106 स्तंभ पाए गए हैं, जिन पर बारीक नक्काशी और विशिष्ट डिजाइन मौजूद हैं। इन स्तंभों की कला राजा भोज के समय की परमार शैली को दर्शाती है।

महत्वपूर्ण शिलालेख: सर्वे के दौरान 32 शिलालेख पाए गए, जिनमें राजा भोज के काल की साहित्यिक रचनाओं का उल्लेख है। इनमें विशेष रूप से राजा अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के अंश पत्थरों पर उत्कीर्ण मिले। ये शिलालेख परिसर के ऐतिहासिक महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

ऐतिहासिक कालक्रम: ASI रिपोर्ट से यह प्रमाणित होता है कि परिसर का निर्माण कार्य 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच परमार वंश के शासनकाल में हुआ था। इसके साथ ही 14वीं शताब्दी के अंत में मालवा में मुस्लिम शासन की स्थापना और दिलावर खान (हुसैन) के आगमन से जुड़े साक्ष्य भी दर्ज हैं। इस प्रकार यह रिपोर्ट परिसर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।

कानूनी पक्ष और वकीलों की भागीदारी

धार भोजशाला विवाद में दोनों पक्षों ने अपने कानूनी दलीलें पेश करने के लिए अनुभवी वकीलों को मैदान में उतारा है।

हिंदू पक्ष: हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी उपस्थित रहकर अपने पक्ष की दलीलें देंगे।

मुस्लिम पक्ष: मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे।

इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट दोनों पक्षों को पर्याप्त समय और अवसर देने का निर्णय कर चुका है, ताकि हर तर्क और प्रमाण को गंभीरता से परखा जा सके।

यथास्थिति और धार्मिक परंपरा का पालन

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय नहीं आता, परिसर में किसी भी प्रकार का भौतिक बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी आदेश प्रभावी रहेगा। इसके तहत हिंदू पक्ष को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाएगी।

यह आदेश विवादित स्थल पर धार्मिक समन्वय और शांति बनाए रखने के लिए अहम है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान किया जाएगा और किसी भी प्रकार का विवादित या हिंसक कदम नहीं उठाया जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

धार भोजशाला विवाद दशकों पुराना है। यह परिसर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। विभिन्न शासकों के काल में इस परिसर का निर्माण और उपयोग हुआ, जिससे यह स्थल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य बन गया।

पिछले कई दशकों से दोनों धार्मिक समुदायों के बीच विवाद चलते रहे हैं। हिन्दू पक्ष का दावा है कि यह परिसर राजा भोज के समय निर्मित हुआ और इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता रहा। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि परिसर के कुछ हिस्सों का उपयोग मस्जिद या अन्य धार्मिक कार्यों के लिए भी होता रहा है।

इस विवाद के समाधान के लिए कई वर्षों से स्थानीय प्रशासन, न्यायपालिका और ASI कई बार प्रयास कर चुके हैं। ASI की रिपोर्ट और वीडियोग्राफी ने अब इस विवाद को एक निर्णायक मोड़ पर ला दिया है।

निष्कर्ष

आज से शुरू हुई यह दैनिक सुनवाई न केवल धार बल्कि पूरे देश की नजरों में है। ASI की वैज्ञानिक रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और ऐतिहासिक शिलालेखों के आधार पर यह तय होगा कि विवादित परिसर का भविष्य क्या होगा। हाईकोर्ट की सक्रियता और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद अब दशकों पुराने इस विवाद का कानूनी समाधान संभव लगता है।

इस मामले का निपटारा केवल न्यायिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक समन्वय के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों की दलीलों, ASI की रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि भोजशाला परिसर में किस प्रकार की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की अनुमति होगी।

इस सुनवाई की महत्वपूर्णता इसलिए भी है क्योंकि यह अन्य विवादित धार्मिक स्थलों के लिए भी कानूनी दृष्टिकोण और न्यायिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में एक मिसाल स्थापित कर सकती है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp