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अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह सम्पन्न: मुनिश्री सुधासागर जी की पिच्छिका राकेश-अनिता अमरौद को प्राप्त

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Published On: 12 December 2025
Ashoknagar Pichchhika Parivartan Samaroh”
— “अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह में मुनिश्री सुधासागर जी द्वारा पिच्छिका प्रदान करते हुए

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अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह सम्पन्न — भक्ति, त्याग और पुण्य का अद्भुत संगम

अशोकनगर में आयोजित अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह बुधवार को अत्यंत भव्यता, अनुशासन और अपार भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। यह समारोह जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें निर्जरापथ साधना के प्रतीक, र्निर्यापक श्रमण मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ससंघ ने अपनी पवित्र एवं पुरानी पिच्छिका परिवर्तन की धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण की।

सभा में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के मध्य यह क्षण भाव-विभोर कर देने वाला था जब पवित्र पिच्छिका सौंपे जाने की घोषणा की गई। इस अवसर पर वातावरण भक्ति, अनुशासन, जयघोष और भावपूर्ण करतल ध्वनि से गूंज उठा।

अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह में अमरौद परिवार को प्राप्त हुआ परम सौभाग्य

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह में भाग्यशाली समाजबंधुओं ने मुनि भगवंत की परंपरा अनुसार आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। यह केवल धार्मिक घटना नहीं बल्कि जगत के कल्याण हेतु त्याग, संयम और साधना की प्रेरणा का अद्वितीय क्षण बन गया।

समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह था जब मुनिश्री सुधासागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने वाले श्रावक-श्राविका के नाम की घोषणा की गई। यह परम सौभाग्य अशोकनगर जैन समाज के दानवीर, विनम्र एवं सेवाभावी श्री राकेश जैन अमरौद एवं उनकी सहधर्मिणी ब्रती श्राविका अनिता जैन को प्राप्त हुआ।

घोषणा होते ही समस्त उपस्थित जनसमूह में जोरदार करतल ध्वनि गूंज उठी, और समाज द्वारा इस पुण्य फल की हार्दिक अनुमोदना की गई।

प्रथम कलश स्थापक और गुरु भक्ति में अग्रणी — राकेश-अनिता अमरौद

अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह में सम्मानित राकेश जैन अमरौद केवल एक उद्योगपति नहीं बल्कि विनम्रता, सेवा और गुरु भक्ति के धनी माने जाते हैं।

उनकी धार्मिक सेवाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ:

प्रथम कलश स्थापक बनने का सौभाग्य

जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान आयोजित चातुर्मास में प्रथम कलश स्थापना का सौभाग्य भी राकेश अमरौद को मिला।

32 किमी पदयात्रा के मुख्य चक्रवर्ती

अशोकनगर से दर्शनोदय तीर्थ तक 32 किमी की पदयात्रा में राकेश जी मुख्य चक्रवर्ती बने। यह पद भक्तिभाव और गुरुशक्ति के प्रति समर्पण का प्रमाण माना जाता है।

H3: भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य

वर्तमान पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का दुर्लभ अवसर भी राकेश-अनिता अमरौद को प्राप्त हुआ — जो अत्यंत पुण्य और सौभाग्य का विषय है।

मन्दिर निर्माण में विशाल सहयोग

अशोकनगर तथा थूबोनजी तीर्थ क्षेत्र में मंदिर निर्माण कार्यों हेतु राकेश जी द्वारा प्रदत्त विशाल दान उनकी धार्मिक भावना को दर्शाता है। समाज उन्हें ‘भामाशाह’ और ‘चक्रवर्ती’ की उपाधियों से सम्मानित करता है।

जैन समाज की भावनाओं से गूंजा अशोकनगर

अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह के दौरान उपस्थित समाज के भाव-विभोर दृश्य देखते ही बनते थे।

  • शुद्ध भक्ति

  • अनुशासन

  • त्याग का माहौल

  • गुरु भक्ति के जयघोष

पूरी सभा में आध्यात्मिक ऊर्जा व्याप्त थी।

मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के चरणों में समर्पित अशोकनगर जैन समाज के सदस्यों ने सेवा, दान और संयम की मिसाल पेश की।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू के अनुसार पिच्छिका का महत्व

दद्दू जी ने बताया कि पिच्छिका केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि—

  • अहिंसा

  • संयम

  • करुणा

  • शुद्धता

का प्रतीक है।
इसे प्राप्त करना अत्यंत दुलर्भ आध्यात्मिक उपलब्धि मानी जाती है।

उन्होंने कहा कि अशोकनगर पिच्छिका परिवर्तन समारोह में पिच्छिका लेने वाले और देने वाले दोनों ही जीवन में अत्यंत सौभाग्यशाली होते हैं, क्योंकि यह गुरु भक्ति का सर्वोच्च रूप है।

अमरौद परिवार—सहज, सरल और पुण्यवान व्यक्तित्व

राकेश जैन अमरौद—

  • जमीन से जुड़े हुए

  • सरल स्वभाव के

  • समाज में सेवा भावना के लिए प्रसिद्ध

  • बड़ी दानराशि से मंदिर निर्माण में अग्रणी

  • गुरु भक्ति में समर्पित

उनके सम्पूर्ण परिवार के पुण्य की समाज द्वारा कोटिशः अनुमोदना की

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