जनपद पंचायत अशोकनगर में उपयंत्री श्रीओम पाठक की ‘तानाशाही’
20 पंचायतों पर कब्जा, भ्रष्टाचार के खुले खेल से हड़कंप और अभी भी खेल जारी!
संवाददाता : राहुल जैन
Ashoknagar । प्रदेश के अशोकनगर जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में इन दिनों नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जनपद पंचायत अशोकनगर में भ्रष्टाचार और मनमानी का एक ऐसा ताना-बाना बुना जा चुका है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था के मूल उद्देश्यों पर ही पानी फेर दिया है।
चर्चाओं और प्रशासनिक गलियारों में गूंजता सबसे बड़ा नाम है उपयंत्री श्री ओम पाठक का। उपयंत्री श्रीओम पाठक ने अकेले ही जनपद पंचायत की करीब 20 ग्राम पंचायतों पर अपना प्रशासनिक कब्जा जमा रखा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस शह पर एक ही उपयंत्री को नियमों को ताक पर रखकर इतनी बड़ी संख्या में पंचायतों का प्रभार सौंप दिया गया है।
अशोकनगर जनपद के तहत आने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पिपरिया राय बेल्ट और राजपुर बेल्ट में उपयंत्री श्रीओम पाठक का एकछत्र राज चल रहा है। पंचायतों का जो बंटवारा अन्य तकनीकी अधिकारियों के बीच पारदर्शी तरीके से होना चाहिए था, उसे सिमटाकर एक ही व्यक्ति के हाथों में केंद्रित कर दिया गया है।
इनके पास पिपरिया राय बेल्ट इस क्षेत्र की 11 पंचायतों की कमान उपयंत्री पाठक के पास है। और राजपुर बेल्ट इस बेल्ट की 9 पंचायतों का जिम्मा भी इन्हीं के सुपुर्द किया गया है। कुल मिलाकर 20 पंचायतों की चाबी एक ही उपयंत्री के पास होना न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से संदेहास्पद है, बल्कि यह सीधे तौर पर विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
भ्रष्टाचार का गढ़ बनीं पंचायतें: विकास कागजों पर, जेबें भरीं धरातल पर-
इन 20 पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ लीपापोती और बंदरबांट हुई है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से लेकर मस्टर रोल और शासकीय स्वीकृतियों तक, हर स्तर पर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। सुदूर सड़क योजना, नाली निर्माण, और शांति धाम जैसे सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानक शून्य हैं। कई जगहों पर केवल कागजों में काम पूरा दिखाकर राशि का आहरण कर लिया गया।
विकसित भारत जी राम जी जैसी महत्वाकांक्षी योजना में मजदूरों के बजाए जेसीबी जैसी मशीनों से काम कराया जा रहा है और फर्जी मस्टर रोल तैयार कर राशि का गबन किया जा रहा है। स्वीकृत सीसी रोड, नालियों और पंचायत भवनों के मूल्यांकन में भारी हेर फेर करके बिना काम पूरा हुए ही फाइलें पास की जा रही हैं। जब एक ही अधिकारी के पास 20 पंचायतों की जिम्मेदारी होगी, तो वह निष्पक्षता और गुणवत्ता के साथ निरीक्षण कैसे कर सकता है यह सवाल अपने आप में चीख-चीखकर कह रहा है कि यह व्यवस्था काम की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि सुविधानुसार भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।
यदि समय रहते इस पूरे मामले में कठोर दंडात्मक कार्रवाई और प्रभार का पुनर्वितरण नहीं किया गया तो इन पंचायत में और अधिक नए कामों में भ्रष्टाचार देखने को मिल सकता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस तीखे उजागर हुए भ्रष्टाचार पर क्या संज्ञान लेता है, या फिर यह ‘कब्जा’ यूं ही बदस्तूर जारी रहेगा। और अगले अंक में दीनबंधु समाचार पत्र द्वारा उनके द्वारा किए गए काले कारनामों को उजागर किया जाएगा जिसकी पड़ताल जारी है।
